‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ का संविधान

CONSTITUTION OF ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’

संविधान

भारतीय अवाम ताक़त दल

राष्ट्रीय/केंद्रीय/पंजीकृत कार्यालय

मकान :- श्री राम यज्ञ मिश्र, ग्राम-सुजानीडीह (रामपुर), पत्रालय-सोहान्सा (मुंगराबादशाहपुर), जनपद-जौनपुर(उ.प्र.)-222 204 ।

CONSTITUTION

BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL

NATIONAL/CENTRAL/REGISTERED OFFICE

House : Shree Ram Yagya mishra, Village—Sujaneedeeh (Rampur), Post office—Sohaansaa (Mungaraabaadshaahpur), District—Jaunpur(UP)-222 204.

 

धारा-1  :  नाम

दल का नाम ” ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’” होगा

और इसके संविधान को ” ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’संविधान” कहा जायगा । नीचे/बाद के वर्णनों में ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ की ज़गह ‘दल’ तथा ‘‘भारतीय अवाम ताक़त दल’संविधान’ की ज़गह ‘दल संविधान’ संदर्भित किया/कहा जायगा ।

Article-1 : Name

The name of the party will be “BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL”

and its constitution will be called “BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL CONSTITUTION”. In later/below descriptions, ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ will be referred/called as ‘DAL’ and ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL CONSTITUTION’ will be referred/called as ‘DAL CONSTITUTION’.

धारा-2 : उद्देश्य एवम ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ के गठन का प्रस्ताव :

Article-2 : Objective and proposal to constitute ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’.

कहने को तो अपना देश भारत विश्व का सबसे बड़ा एवम सफल लोकतन्त्र कहा जाता है और इसे उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में भी देखा जा रहा है । पर, समानान्तर, हम इस कड़वी सच्चाई से मुख मोड़ नहीं सकते कि देश की इस आलोकित आभा के ठीक नीचे करोड़ों भारतीय भाई-बहनों, ख़ासकर आम भारतीय भाई-बहनों और उनमें भी विशेषकर ग़रीब/दिहाड़ी (दैनिक आमदनी पर निर्भर रहने वाले) मज़दूर/रिक्से वाले/रेड़ी पटरी वाले/बे-सहारा/साधन विहीन/विपन्न/सामाजिक क़तार का आख़िरी व्यक्ति आदि भारतीय भाई-बहनों को मंहगाई, भ्रष्टाचार, सरकारी-अर्ध सरकारी-निगम दफ्तरों के भ्रष्ट, निकम्मे/काम चोर  कर्मचारियों/अधिकारियों, जिनका अनुपात/प्रतिशत/संख्या मायने नहीं रखता क्योंकि व्यवस्था को चौपट/गंदा करने के लिए एक ही गंदी मछली काफ़ी होती है, की मार झेलनी पड़ती है । वास्तविकता सिर्फ़ व्यवस्था/सेवा प्रदायी प्रणाली (Delivery System) में ऐसे तत्वों (गंदी मछलियों) के अनुपात/प्रतिशत/संख्या तक ही सीमित नहीं है बल्कि इस वास्तविकता की कड़वाहट इस विडम्बना में है कि इन बुराइयों जिनसे हमारे आम भारतीय भाई-बहनों और उनमें भी विशेषकर ग़रीब/दिहाड़ी (दैनिक आमदनी पर निर्भर रहने वाले) मज़दूर/रिक्से वाले/रेड़ी पटरी वाले/बे-सहारा/साधन विहीन/विपन्न/सामाजिक क़तार का आख़िरी व्यक्ति आदि भारतीय भाई-बहनों को मंहगाई, भ्रष्टाचार- – -को नारकीय जीवन झेलना पड़ता है—–को समाज/व्यवस्था के बड़े/प्रभावशाली हस्तियों का संरक्षण प्राप्त होता है- – -और हमारे यही भारतीय भाई-बहन अपनी निजी स्वार्थ की कमज़ोरियों के चलते इन्हीं बड़े/प्रभावशाली लोगों को चुनकर, सत्तानशीं कर फिर उक्त नारकीय जीवन जीने/झेलने को मज़बूर होने को आमंत्रित करते हैं- – –हक़ीक़त का चेहरा कुछ बंद वृत्त (VICIOUS CIRCLE) जैसा है ।

Though our country is said to be the largest and successful democracy in the world    and it is looked upon as emerging global power but, parallelly, we can’t shut our eyes from bitter reality that just underneath of this glittering glory, our common Bhaarateey Bhaai-Bahan and especially in them the poor/daily earning labourers/rikshaw pullers/street sellers/destitute/indigent/ poor without any support of livelihood/poor at the last rung of the social ladder suffer under the scourge of price escalation /corruption/harassment by the corrupt/inefficient/shirking  officials/officers of government/semi government/corporations—-their percentage/ratio/number does not matter as only a single rotten fish is enough to spoil/defile a system. Reality about the ambit of such a problem is not confined to the percentage/ratio/number(of corrupt/inefficient/shirking officials/officers of government/semi government/corporations) but veracity of bitterness of the fact lies in the IRONY that Ills/evils, which are responsible for the hell like lives our common Bhaarateey Bhaai-Bahan and especially in them the poor———at the last rung of the social ladder are forced to undergo under the aforesaid scourge, get the patronage and protection of heavy weights and influentials and our same common Bhaarateey Bhaai-Bahan and especially in them the poor——–at the last rung of the social ladder, for the weaknesses of their own selfish ends, elect and send to the power the same heavy weights and influentials to invite the said hell like lives for themselves to live with- – –thus the real face of the fact is somewhat like VICIOUS CIRCLE.

औसतन अपने भारतीय समाज एवम व्यवस्था में भ्रष्ट/तिकड़मी/अपराधी/काले धन पर इतराने वालों का वर्चस्व एवम बोलबाला है और सच्चरित्र, नियम-क़ानून का पालन करके शुद्ध आचरण से जीवन निर्वहन करने वाले हाशिये पर हैं- – -इस कड़वी हक़ीक़त से भी मुख नहीं मोड़ा जा सकता ।

हमारी सभी लोकतान्त्रिक संस्थाओं—कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका और उनकी अधीनस्थ इकाइयों के रहते व उनकी भली भाँति संज्ञान (Well Cognizance) के बावज़ूद हमारे आम भारतीय भाई-बहनों और उनमें भी विशेषकर ग़रीब/दिहाड़ी (दैनिक आमदनी पर निर्भर रहने वाले) मज़दूर/रिक्से वाले/रेड़ी पटरी वाले/बे-सहारा/साधन विहीन/विपन्न/सामाजिक क़तार का आख़िरी व्यक्ति आदि भारतीय भाई-बहनों को मंहगाई, भ्रष्टाचार- – -का नारकीय जीवन झेलना पड़ता है- – -इस विडम्बना के यथार्थ से भी मुख नहीं मोड़ा जा सकता ।

राष्ट्र भक्ति, देश भक्ति की असल भावना/अवधारणा/जज़्बा/अनुसरण आज हमारे, इका-दुक्का अपवादों को छोड़कर, बीच से ग़ायब होकर पुस्तकों/किताबों/लेखों/प्रलेखों/भाषणों/कवि सम्मेलनों/मुशायरों/मंचों की शोभा बढ़ाने वाले वक्तव्यों आदि तक ही सिमट कर पाखंड के दलदल में जा फँसी है । अब तो राष्ट्र भक्ति, देश भक्ति की अवधारणाओं/परिभाषाओं को ही बदलने की कोशिशें भी हो रही हैं । अपने मुल्क़ के कुछ हल्कों में राष्ट्र भक्ति-देश भक्ति का मतलब समूचे देश के लोगों के प्रति भक्ति न होकर कुछ समूह या व्यक्ति विशेष की भक्ति को ही राष्ट्र भक्ति-देश भक्ति में रंजित किया जा रहा है, जिसके दृष्टान्त स्पष्ट दृष्टिगोचर हैं- – – देश भक्ति-राष्ट्र भक्ति की विकृत अवधारणा को परिलक्षित करती हुई “India is ‘X’ and ‘X’ is India” की ध्वनि/प्रतिध्वनि आज भी हम सभी के कानों में मौज़ूद है ।

There is dominance and hold, as a general trend in BHAARAT on average, of corrupt/ manipulator/criminal/imperious on vulgar display of black earned opulence in Indian society and Indian establishment (Executive, Legislature and Judiciary—with their respective subordinate units) and the people of character, leading life with pure conduct and abiding law/rules/regulations of the land are marginalized——eyes can’t be shut from this bitter reality also.

In spite of the presence of and under the well cognizance of all the democratic institutions—–Executive, Legislature and Judiciary with their respective subordinate units—-our common Bhaarateey Bhaai-Bahan and especially in them the poor/daily earning labourers/rikshaw pullers/street sellers/destitute/indigent/poor without any support of livelihood/poor at the last rung of the social ladder are forced to undergo the above said hell like lives- – – eyes can’t be shut from this bitter reality also.

The real spirit/concept/passion/conduct of allegiance to the Nation and patriotism has disappeared from our Bhaarateey Bhaai-Bahan and got confined to the precincts of articles-subarticles-columns in news papers/panel discussion on TV channels/books/congregations of poets/congregations of Urdoo poets (Mushaayaraa) /loud and lofty speeches/rhetoric from public platforms to be doomed to the quagmire of hypocrisy and show. Now, efforts are being made, as learnt, to change the concept/definition itself of patriotism and allegiance to the Nation. In some quarters in our country patriotism and allegiance to the Nation is not meant allegiance to the whole of the country but to the certain group or to the personality special. The reverberation of sound and echo of “India is ‘X’ and ‘X’ is India” in our ears even today vindicates the perverted concept of patriotism and allegiance to the Nation.

अन्तिम आस के रूप में बौद्धिक वर्ग( Intellectuals/Intelligentsia) एवम प्रचार माध्यम—मीडिया, अख़बार, टीवी चैनल को आम भारतीय भाई-बहनों और उनमें भी विशेषकर ग़रीब/दिहाड़ी (दैनिक आमदनी पर निर्भर रहने वाले) मज़दूर/रिक्से वाले/रेड़ी पटरी वाले/बे-सहारा/साधन विहीन/विपन्न/सामाजिक क़तार का आख़िरी व्यक्ति आदि भारतीय भाई-बहनों के हितों के रक्षक के रूप में देखा जाता है । पर विडम्बना एवम इसका दुखद पक्ष यह है कि यह बौद्धिक वर्ग (Intellectuals/Intelligentsia) एवम प्रचार माध्यम—मीडिया, अख़बार, टीवी चैनल अपने को आम नागरिक न समझ कर अपने को विशेषाधिकार प्राप्त (Privilegentsia) समझता है । समाज एवम व्यवस्था (कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका——-उनकी अपनी-अपनी अधीनस्थ इकाइयों सहित) के उपरोक्त वर्णित भ्रष्ट/तिकड़मी/अपराधी/काले धन पर इतराने वाले तत्वों जिनका इस व्यवस्था में वर्चस्व एवम बोलबाला है—से इस बौद्धिक वर्ग (Intellectuals/Intelligentsia) एवम प्रचार माध्यम—मीडिया, अख़बार, टीवी चैनल की मिलीभगत है । अतः यह बौद्धिक वर्ग- – -टीवी चैनल इन तत्वों के निहित स्वार्थों की रक्षा करते हुए दिखावे के रूप में छोटी मछली को उजागर कर अपनी ज़िम्मेदारी निर्वहन का दम्भ भरता है– – -की हक़ीक़त “किसी देश का कष्ट वहाँ के दुष्टों के कारण नहीं होता अपितु वहाँ के बौद्धिक वर्ग की निष्क्रियता के कारण होता है ।” जैसी विकट स्थिति को मात्र चरितार्थ ही नहीं करती अपितु यह हमें उस बड़े यथार्थ “किसी देश का कष्ट मात्र वहाँ के दुष्टों के कारण नहीं होता अपितु वहाँ के बौद्धिक वर्ग की निष्क्रियता के कारण ज़्यादे होता है, उससे भी अधिक कष्ट उस गठजोड़ के कारण होता है जो बौद्धिक वर्ग व मीडिया से उपरोक्त तत्वों के बीच होता है, यहाँ तक कि उससे और भी अधिक कष्ट बौद्धिक वर्ग एवम मीडिया की स्वयं उन गतिविधियों में संलिप्तता के कारण होता है जो भ्रष्ट/तिकड़मी/अपराधी/काले धन पर इतराने वाले तत्वों के क्रिया-कलाप हैं और सबसे अधिक कष्ट इस तथ्य के कारण होता है कि बौद्धिक वर्ग एवम मीडिया उक्त ततवों के हाथों अपनी अन्तरात्मा, अपने आदर्श एवम अपनी बुद्धि को या तो बेंच दिया है या गिरवी रख दिया है या उससे सौदा कर लिया है ।” से रू-ब-रू भी करवाती है और साथ ही साथ उस हक़ीक़त “भ्रष्ट/तिकड़मी/अपराधी/काले धन- – – -इस बौद्धिक वर्ग- – – – अख़बार, टीवी चैनल की मिलीभगत है- – – – छोटी मछली को उजागर कर अपनी ज़िम्मेदारी निर्वहन का दम्भ भरता है” का बड़ा हिम शैल(ICEBERG) भी है । इसलिए उक्त हक़ीक़त “भ्रष्ट/तिकड़मी/अपराधी/काले धन- – – -इस बौद्धिक वर्ग- – – – अख़बार, टीवी चैनल की मिलीभगत है- – – – छोटी मछली को उजागर कर अपनी ज़िम्मेदारी निर्वहन का दम्भ भरता है” उपरोक्त हिम शैल(ICEBERG) वाली हक़ीक़त का एक मस्तूल( Mast ) मात्र है।

Intelligentsia/intellectuals and media are looked upon as a beacon of last hope for our hapless common Bhaarateey Bhaai-Bahan and especially in them the poor/daily earning labourers/rikshaw pullers/street sellers/destitute/indigent/ poor without any support of livelihood/poor at the last rung of the social ladder. But the tragic and ironical side of the situation in this respect is that this intellectuals/intelligentsia and media, barring few exceptions, assume themselves not as an ordinary citizen but ‘Privilegentsia’. There is nexus of these intellectuals/ intelligentsia and media, barring few exceptions, with those elements which are corrupt/manipulator/criminal/ imperious on vulgar display of their black earned opulence and have dominance and hold in Indian society and Indian establishment. The reality that “There is nexus of these intellectuals/intelligentsia and media, barring few exceptions, with those elements which are corrupt/manipulator/criminal/imperious on vulgar display of their black earned opulence and have dominance and hold in Indian society and Indian establishment and these intellectuals/ intelligentsia and media, barring few exceptions, brag to discharge their duty by exposing small fish only while protecting the vested interests of the aforesaid elements” not only vindicates the precarious situation  “The tragedy of a nation is not because of the scoundrels but because of the inactivity of the so called intellectuals” but it makes us to encounter the bigger reality “The tragedy of a nation is not only because of the scoundrels but MUCH because of inactivity of so called intellectuals and MUCH MORE because of the nexus of intelligentsia and media, barring few exceptions, with aforesaid elements which are corrupt/manipulator/criminal/ imperious on vulgar display of their black earned opulence and EVEN MORE because of indulgence of intelligentsia and media themselves in the activities similar to those of corrupt/manipulator/criminal/imperious on vulgar display of their black earned opulence and even MOST because of the fact that intelligentsia and media , barring few exceptions, have either sold or mortgaged or bartered with their conscience, their morals and their intellect to the aforesaid elements (corrupt/manipulator/criminal/imperious on vulgar display of their black earned opulence who have dominance and hold over the establishment : Executive, Legislature and Judiciary—with their respective subordinate units) of Bhaarateey society and Bhaarateey establishment” which is the iceberg of the reality “There is nexus of these intellectuals/intelligentsia and media, barring few exceptions, with those elements which are corrupt/manipulator/criminal/ imperious on vulgar display of their black earned opulence and have dominance and hold in Indian society and Indian establishment and these intellectuals/intelligentsia and media, barring few exceptions, brag to discharge their duty by exposing small fish only while protecting the vested interests of the aforesaid elements” and this reality is only the mast of the said iceberg of reality.

देश की सुरक्षा, ख़ुफ़िया एजेंसियाँ आदि आतंकवादी हमले जैसे मौक़ों पर भी पुख़्ता निश्चिंतता की सीमा तक नहीं आ पायी हैं- – -इस यथार्थ से भी नहीं मुख मोड़ा जा सकता ।

आज हमारे भारतीय समाज में जातिवाद/साम्प्रदायिकता/भाषावाद/प्रान्तवाद/समूहवाद/क्षेत्रवाद आदि के नाम पर बिखराव-वैमनस्य-टकराव-विध्वंश, जो हमारी भारतीय एकता के परम शत्रु हैं, चारो ओर व्याप्त हैं, कहीं-कहीं तो इनके ताण्डव भी दृष्टिगोचर होते हैं—इस यथार्थ से भी मुख मोड़ा नहीं जा सकता ।

विचित्र मगर हम सभी भारतीय भाई-बहनों को घूरता यथार्थ यह है कि उपरोक्त वर्णित विकट एवम दुखदायी स्थिति की जड़ में भ्रष्ट/अपराधी/तिकड़मी आदि राजनीतिक दल व नेता नहीं हैं बल्कि हम सभी भारतीय भाई-बहन हैं जो जातिवाद/साम्प्रदायिकता/भाषावाद/प्रान्तवाद/समूहवाद/क्षेत्रवाद आदि कई विकारों एवम विकृतियों में बिखरे हुए हैं, बंटे हुए हैं, वैसा अनुभव करते हैं, व्यवहार करते हैं, इन्हीं संकीर्णताओं पर आधारित एकता/जत्थे बनाते/बनवाते हैं और सबसे दुखद बात यह है कि चुनाव (आम/संसदीय, विधानसभा, पंचायात/स्थानीय निकाय यहाँ तक कि संगठनों के भी) जैसे राष्ट्रीय एवम अहम मौक़ों पर भी हम भारतीय भाई-बहन, बहुत थोड़े से अपवादों को छोड़कर, अपने नागरिक फर्ज़ निभाने के बजाय इन्हीं जातिवाद/साम्प्रदायिकता/भाषावाद/प्रान्तवाद/समूहवाद/क्षेत्रवाद आदि बुराइयों में ही अपने व्यक्तिगत स्वार्थ साधते हैं और यहाँ तक कि प्रलोभन/लालच (रुपया/पैसा/बोतल/कंबल/मांस-मंदिरा/वादा (ठीका मिलने का, थाने से बसें छुड़वाने का, ग़लत-सलत/भ्रष्ट काम करवाने/दिलवाने आदि का)) के वशीभूत होकर समाज के ऐसे सबसे गंदे तत्वों, कुछ अपवादों को छोड़कर, जिन्हें भारतीय समाज यदि जागरूक हो तो समाज और देश के बाहर कर दिया जाय एवम यदि देश का क़ानून निष्पक्षता व सख़्ती से काम करे तो जेल की सलाख़ों के पीछे कर दिया जाय, को चुनकर सदन/सत्ता में भेज देते हैं । फलतः, इन्हीं तत्वों द्वारा अपनी पृष्ठ भूमि (भ्रष्ट/तिकड़मी/अपराधी/काले धन पर इतराने वाले आदि ) अनुसार हुक़ूमत/व्यवस्था का भी माहौल बना दिया जाता है । इस तरह के प्रदूषित व्यवस्था/हुकूमत माहौल से हम भारतीय भाई-बहनों को, इक्का-दुक्का अपवादों को छोड़कर, कुछ भी नहीं मिल सकता । असली व्यथा आगे है कि हमारे आम भारतीय भाई-बहनों और उनमें भी विशेषकर ग़रीब/दिहाड़ी (दैनिक आमदनी पर निर्भर रहने वाले) मज़दूर/रिक्से वाले/रेड़ी पटरी वाले/बे-सहारा/साधन विहीन/विपन्न/सामाजिक क़तार का आख़िरी व्यक्ति आदि भारतीय भाई-बहनों को भी कुछ भी नहीं मिल सकता सिवाय उपरोक्त नरकीय जीवन (मंहगाई, भ्रष्टाचार, सरकारी-अर्ध सरकारी-निगम दफ्तरों के भ्रष्ट (जो रिश्वत के लिए दस चक्कर लगवाते हैं,  आम जनता को परेशान करते हैं ), निकम्मे/कामचोर  कर्मचारियों/अधिकारियों की मार) जिसे वे झेलने को मज़बूर होते हैं, या उन्हें झेलना पड़ता है । हमारे भारतीय भाई-बहनों द्वारा इस घूरते यथार्थ की सीधे व साफ़गोई-क़बूलनामे से बचने की पुरजोर कोशिश करते हुए एवम “लोगों को सरकार या हुक़ूमत वैसी ही मिलती है जिसके वे पात्र होते हैं ” की कड़वी सच्चाई से मुख मोड़ते हुए नेताओं/दलों को दोष देना, उन्हें अपशब्द/गालियाँ भी देना इस समस्या को और गम्भीर बना देता है—इस यथार्थ से भी मुख मोड़ा नहीं जा सकता ।

National security and intelligence agencies have not been able to assure the Nation BHAARAT and its Bhaarateey Bhaai-Bahan to the level of complete tension free about their safety and security, particularly at the time of terror attacks—-eyes can’t be shut from this bitter reality also.

Today, there is widespread presence of disunity-animosity-tussle-violence/sabotage in the name of casteism/communalism/religion/provincialism/linguisticism/regionalism/groupism etc., the dead enemy of our Indian unity, in our Bhaarateey society, and somewhere in our country its catastrophic forms are conspicuous by its presence —-eyes can’t be shut from this bitter reality also.

The fact, apparently peculiar but staring in the face, about our Bhaararateey Bhaai-Bahan is that the genesis of the woeful situation, hinted above or otherwise is of common knowledge, does not lie with crooks (corrupt-criminal-manipulator etc.) of political system but solely lies with the we people—Bhaarateey Bhaai-Bahan themselves who, barring very few exceptions, being deeply entrenched in the maladies/evils of casteism/communalism/religion/ provincialism/linguisticism/regionalism/groupism etc., stand divided being disunited, feel accordingly, conduct accordingly, form unity and associations based on these parochials of caste——etc. The most tragic aspect of this fact is that at the time of national and important occasions of elections (General/Parliamentary, Assembly, Panchaayat/Local Bodies etc. even of unions/associations of various groups and trades) we Bhaarateey Bhaai-Bahan, barring very few exceptions, instead of discharging their citizenry duty, settle our selfish ends in these maladies/evils of casteism/ communalism/religion/provincialism/linguisticism/regionalism/ groupism etc. and even being captive of their own greed (money/paisa/bottle(of wine)/blanket/meat-wine/selfish promises of (contract, manage to get released of seized buses, arranging immoral/corrupt jobs etc.) they elect and send into power such persons, by and large the most scum of our society, barring very few exceptions, who deserve to be thrown out of Bharateey society and the territory of BHAARAT if its people are conscious (of their duties as citizen of this country ) and to be put behind bar if the law of the land (BHAARAT) is complied with impartiality and strictness. What the result of all this is obvious : These elements/persons (the most scum of our society) when get elected to the power, create the atmosphere of governance and administration as per their back ground (criminal/corrupt/manipulator etc.). We Bhaarateey Bhaai-Bahan can’t get anything, barring few stray cases as exceptions, from such an atmosphere created as hinted above. More tragically, our common Bhaarateey Bhaai-Bahan and especially in them the poor/daily earning labourers/rikshaw pullers/street sellers/destitute/indigent/poor without any support of livelihood/poor at the last rung of the social ladder can’t get anything from such an atmosphere created, barring few stray cases as exceptions, but the hell like lives they are forced to undergo. Instead of accepting candidly the above said blunder they have been committing for the last 6 to 7 decades, we Bhaarateey Bhaai-Bahan deliberately try our best to shut our eyes from the glaring fact staring into our face “PEOPLE GET THE GOVERNMENT THEY DESERVE” and deliberately pass the buck to the political leaders and political parties with allegations (for the aforesaid misdeeds of we Bhaarateey Bhaai-Bahan), foul/unethical/unpaliamentary words and abuses. Such a trend in our Bharateey Bhaai-Bahan complicates the problem delineated in detail above—-eyes can’t be shut from this bitter reality also.

हमारे आम भारतीय भाई-बहनों और उनमें भी विशेषकर ग़रीब/दिहाड़ी (दैनिक आमदनी पर निर्भर रहने वाले) मज़दूर/रिक्से वाले/रेड़ी पटरी वाले/बे-सहारा/साधन विहीन/विपन्न/सामाजिक क़तार का आख़िरी व्यक्ति आदि भारतीय भाई-बहनों के लिए चारों तरफ़ निराशा एवम नरक- – -यह कड़वा यथार्थ विश्व के सबसे बड़े लोकतन्त्र एवम उभरती हुई विश्व शक्ति के रूप में अपने भारत देश की चमक के ठीक नीचे या यूं कहिए इसका दावा करने वाले ऊँचे ऊँचे उद्घोषों के ठीक पीछे हम भारतीय भाई-बहनों एवम अपने मुल्क़ भारत को व्यंगात्मक उपहास के साथ घूर रहा है ।

ग़रीबों एवम दलितों का नारा दे-दे कर कई राजनैतिक दलों व संगठनों नें इन ग़रीबों को छला है, इनकी स्थिति और ख़राब की है और साथ-साथ सामाजिक भेद-विभेद की खाई को और चौड़ा किया है ।

ऐसा नहीं है कि हुक़ूमतों ने आम एवम ग़रीब भारतीय भाई-बहनों के लिए कुछ नीतियाँ नहीं बनाई हों । हुक़ूमतों ने ग़रीबों के नाम पर कई-कई योजनाओं की घोषणा की जिनका सम्बन्धित राजनैतिक दल /संगठन ढिंढोरा भी पीटते रहते हैं । पर ज़्यादातर ये योजनाएँ दलालों/बिचौलियों आदि, जो समाज/व्यवस्था के उपरोक्त भ्रष्ट/तिकड़मी/अपराधी/काले धन पर इतराने वाले तत्वों के एजेंट होते हैं, के ही कारण इन्हीं बिचौलियों के स्वार्थ की भेंट चढ़ जाती हैं और वे हमारे ग़रीब भारतीय भाई-बहन, जिनके लिए व जिनके नाम पर ये योजनाए घोषित की गई हैं, वस्तुतः वंचित रह जाते हैं ।

हमारे इस्लाम धर्मास्था वाले भारतीय भाई-बहनों (जिन्हें अब तक परम्परागत रूप से ‘मुसलमान’ अल्फ़ाज़ से सम्बोधित किया जाता रहा है । पर ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ इन भारतीय भाई-बहनों को भारतीय प्रेम से जोड़ने हेतु ‘मुसलमान’ अल्फ़ाज़ के स्थान पर ‘इस्लाम धर्मावलम्बी/धर्मास्था वाले भारतीय भाई-बहन’ के रूप में सम्बोधित करना और संदर्भित करना ज़्यादे मुनासिब, तर्क संगत एवम ज़रूरी मानता है । इसीलिए ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ इन भारतीय भाई-बहनों को ‘इस्लाम धर्मावलम्बी/धर्मास्था वाले भारतीय भाई-बहन’ के रूप में ही सम्बोधित करने का निश्चय किया है) को अल्पसंख्यक आदि अल्फ़ाज़ों से सम्बोधित कर-कर के, कर-कर के भारतीय वातावरण में घुलने-मिलने से दूर रखते हुए (वैसे ‘भारतीयता’ को ‘हिदुत्व’ का पर्याय बताकर कुछ संगठनों नें ‘भारतीयता’ की अवधारणा को प्रदूषित ही नहीं किया अपितु इस पर बहुत बड़ा कुठाराघात किया है।) उनके साथ इसी तरह का छलावा किया गया है और उनके नाम पर (मृग मरीचिका वाली) अनेकों योजनाएँ भी घोषित की गई हैं । ये योजनाएँ दलालों/बिचौलियों आदि, जो समाज/व्यवस्था के उपरोक्त भ्रष्ट/तिकड़मी/अपराधी/काले धन पर इतराने वाले तत्वों के एजेंट होते हैं, के ही कारण इन्हीं बिचौलियों के स्वार्थ की भेंट चढ़ जाती हैं और वे हमारे इस्लाम धर्मास्था वाले भारतीय भाई-बहन, जिनके लिए व जिनके नाम पर ये योजनाए घोषित की गई हैं, वस्तुतः वंचित रह जाते हैं । यह सिलसिला विगत 60-70 सालों से बदस्तूर ज़ारी है ।

For our common Bhaarateey Bhaai-Bahan and especially in them the poor/daily earning labourers/rikshaw pullers/street sellers/destitute/indigent/ poor without any support of livelihood/poor at the last rung of the social ladder in our Nation BHAARAT, there is widespread hopelessness and hell- – -this bitter reality is staring in the face of we Bhaarateey Bhaai-Bahan and the country BHAARAT with mocking sarcasm just below the glittering halo/radiance of India as the largest democracy in the world and as an emerging global power AND ALSO JUST BEHIND the lofty and cacophonous speeches glorifying it.

Through resounding slogans of poor and Dalit, several political parties and organizations have duped these poor and down trodden Bhaarateey Bhaai-Bahan, worsened their condition and widened the social fissures of discrimination and differences.

It is not like that the governments did not frame welfare policies for our poor Bhaarateey Bhaai-Bahan. In the name of our poor Bhaarateey Bhaai-Bahan, governments announced numerous schemes which the concerned political parties and organizations do trumpet. But due to middlemen/brokers of such schemes, most of these schemes are sacrificed at the altar of selfish ends of these middlemen/brokers who are the agents of corrupt/manipulator/criminal/ imperious on vulgar display of their black earned opulence elements of Indian society and Indian establishment and our poor Bhaarateey Bhaai-Bahan for whom and under whose name the schemes are announced and trumpeted are actually rendered deprived of the benefits of such schemes.

Similar imposture have also been wreaked on our Islaamic faith Bhaarateey Bhaai-Bahan {We have been traditionally referring them as ‘Musalmaan’. In order to bring them closer to the rest of the Bhaarateey Bhaai—Bahan of BHAARAT through the bond of Bhaarateey love and affection, ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ considers the address ‘Islamic Faith Bhaarateey Bhaai-Bahan’ OR ‘Islam Dharmaawalambee (OR Islam Dharmaasthaa waale) Bhaarateey Bhaai—Bahan’ in lieu of the address ‘Musalman’ more authentic-appropriate-essential. Therefore, ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ has decided to address them invariably, without fail, ‘ Islamic Faith Bhaarateey Bhaai-Bahan ’ OR ‘ Islam Dharmaawalambee (OR Islam Dharmaasthaa waale) Bhaarateey Bhaai—Bahan’ in lieu of ‘Musalman’} by repeatedly addressing/ referring them ‘Minority’ and keeping them away/isolated from mainstream social and national life {even otherwise, by terming ‘BHAARATEEYATAA’ as synonym of ‘HIDUTWA’ by certain political parties and organizations, the real concept of ‘BHAARATEEYATAA’ has not only been polluted/defiled/perverted but a deadly blow has been given to the essence of ‘BHAARATEEYATAA’} and announce numerous (mirage like) schemes in their name. But due to middlemen/brokers of such schemes, most of these schemes are sacrificed at the altar of selfish ends of these middlemen/brokers who are the agents of corrupt/manipulator/criminal/ imperious on vulgar display of their black earned opulence elements of Indian society and Indian establishment and our hapless Islamic Faith Bhaarateey Bhaai-Bahan for whom and under whose name the schemes are announced and trumpeted are actually rendered deprived of the benefits of such schemes. This sequence of event continues since 60-70 years unchangeably.

उपरोक्त समस्या एक बन्द वृत्त (Vicious Circle) की तरह है । आम तौर पर समझ में नहीं आता कि इसके समाधान की शुरुआत कहाँ से करें, कहाँ इसकी जड़ है, जड़ से इलाज़ करें तो कैसे करें- – -इत्यादि ।

हमारे लोगों, जो प्रस्तावित दल जिसका नाम ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ प्रस्तावित है के संस्थापक अथवा बुनियादी सदस्य हैं और जिनका आगे पत्राचार पता व मोबाइल विवरण के साथ वर्णन किया गया है, ने फ़ैसला लिया कि एक राष्ट्र व्यापी संगठन बनाकर राष्ट्र भक्ति शिरोमणि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, शहीदे आज़म भगत सिंह, अमर शहीदों चन्द्र शेखर आज़ाद, अशफ़ाक़-उल-लाह, खुदीराम बोस, सुब्रमण्यम भारती, रानी गैडेल्यू आदि से राष्ट्र भक्ति/देश भक्ति, समता, बराबरी, भारतीयता एवम भारतीय एकता हेतु त्याग, क़ुर्बानी की प्रेरणा लेते हुए अपने मुल्क़ भारत, इंडिया नहीं, व भारतीय भाई-बहनों में सिर्फ़ भारतीयता आधारित एकता, सिर्फ़ भारतीयता आधारित भाई-चारा, सिर्फ़ भारतीयता आधारित आपसी सम्मान, सिर्फ़ भारतीयता आधारित आपसी सहयोग, सिर्फ़ भारतीयता आधारित आपसी सद्भाव, सिर्फ़ भारतीयता आधारित शांति स्थापित करते हुए, इनका आरक्षण विहीन प्रतिभा-विलक्षणता-कौशल का विकास करते हुए, इन भारतीय भाई-बहनों द्वारा अपनी अधिकतम क्षमता/प्रतिभा/विलक्षणता/कौशल से भारतीय समाज व अपने मुल्क़ भारत को योगदान करते हुए, व्यक्तिगत उत्थान व उत्कर्ष करते हुए एवम स्वयं व मुल्क़ को विश्व में सबसे ऊँचा व बेहतर बनाते हुए अपने राष्ट्र भारत को विश्व के आर्थिक, सैन्य, राजनैतिक व सभ्यता/शराफ़त/क़ाबिलियत के शिरमौर्य (नेता) के रूप में प्रतिस्थापित करने हेतु निम्न प्रयास करने का संकल्प लिया जाय :-

Above said problem is like a vicious circle. Normally, it is understood difficult as from where to begin with in finding its solution, from where its roots emanate, how to remedy if root treatment is required- – -etc.

Our people(founding friends) who are founding members of the party, the proposed name of which is ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ and whose mailing addresses with their mobile phone details are given below have collectively decided ; by forming a national level (political) organization and taking inspiration of sacrifice from Rashtra Bhakti Shiromani (Torch bearer legend of patriots) Netaa Ji Subhash Chandra Bose, Shaheede Aazam (Chieh of martyres )Bhagat Singh, immortal martyres like Chandra Shekhar Aazaad, Ashfaaqullaah, Khudiraam Bose, Subramnyam Bharati, Raanee Gaidelieu etc. for patriotism, allegiance to the Nation, equality, equity, Bhaarateeyataa and Bhaarateey unity in our Nation BHAARAT, NOT ‘INDIA’, in order to inculcate/enthuse and develop/strengthen (the sense/spirit/attachment/passion/conduct of) unity based on Bhaarateeyataa only, fraternity based on Bhaarateeyataa only, mutual respect based on Bhaarateeyataa only, mutual co-operation based on Bhaarateeyataa only, mutual goodwill based on Bhaarateeyataa only, (mutual or otherwise) peace based on Bhaarateeyataa only among our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN(Indian brethren and sisters) so that these our BHAARATEEY BHAAI_BAHAN, by developing their own talent/brilliance/skill- – -far away from the mirage of ‘RESERVATION’, will contribute to their maximum capability/talent/brilliance/skill to Bhaarateey society and to the Nation BHAARAT thereby self uplifting and scaling the heights of success/progress and making themselves and the Nation BHAARAT best and at the top of the world by making it (BHAARAT) the foremost as economic power, military power, political power and talent/ability/gentleness power of the world ; to take a pledge :-

  • अपने भारतीय भाई-बहनों को यह समझाकर व विश्वास दिलाकर कि हमारा चारित्रिक एवम संवैधानिक वज़ूद भारतीय (भारतीय नागरिक के रूप में) ही है, उनमें भारतीय एकता,भारतीय बराबरी एवम भारतीय समता स्थापित करना ।
  • अपने भारतीय भाई-बहनों में सिर्फ़ भारतीयता आधारित एकता, सिर्फ़ भारतीयता आधारित भाई-चारा, सिर्फ़ भारतीयता आधारित आपसी सम्मान, सिर्फ़ भारतीयता आधारित आपसी सहयोग, सिर्फ़ भारतीयता आधारित आपसी सद्भाव, सिर्फ़ भारतीयता आधारित शांति आदि स्थापित करना ।
  • अपने भारतीय भाई-बहनों में यह समझ विकसित कर स्थापित करना कि हमारा सामुहिक धर्म हिन्दू/हिदुत्व, इस्लाम, ईसाई, सिक्ख—- इत्यादि नहीं है, ये तो मात्र व्यक्तिगत आस्थाएं हैं जो शुद्धतः व्यक्तिगत हैं जिस पर किसी दूसरे को टीका-टिप्पणी/कटाक्ष/आहत/व्यंग/नीचा दीखाने का बिल्कुल अधिकार नहीं है । हमारा धर्म यानी फ़र्ज़ तो सिर्फ़ राष्ट्र-धर्म यानी फर्ज़े-मुल्क़ अर्थात अपने देशवासियों एवम देश के विषय में ही चिंतन करना है ।

इसी प्रकार हमारा जीवन/व्यवहार व्यक्यिगत रूप से किसी भी आस्था (हिन्दू/इस्लाम/ईसाई/सिक्ख—-आदि) से देशित/निर्देशित हो सकता है पर, पर हमारा सामुहिक/सामाजिक जीवन/व्यवहार भारतीय एवम राष्ट्रीय ही होगा । दूसरे शब्दों में, अपनी व्यक्यिगत आस्था के अनुसरण अनुसार अपने घर/चार दीवारी के अंदर पूजा/अर्चना-अर्पण/इबादत/शिज़दा—–आदि जो भी पसंद हो, कर सकते हैं पर, अपनी घर/चारदीवारी की चौखट के बाहर कदम रखते ही हमारा जीवन/व्यवहार भारतीय।राष्ट्रीय हो जायगा जसमें सिर्फ राष्ट्र-धर्म निभाना है ।

  • अपने भारतीय भाई-बहनों में इस आस्था का संचार करना कि राष्ट्र-धर्म कोई गूढ, रहस्यमय,Metaphysical, Abstraction, Philosophical Riddle(दार्शनिक पहेली) न होकर साधारण रूप में यह अवधारणा है कि हमें अपने प्रत्येक भारतीय भाई-बहन का सम्मान करना, उनसे प्रेम करना व उनकी सुख-सुविधा-तरक़्क़ी की चिंता/चिन्तन करते हुए अपने मुल्क़ भारत से प्रेम करना हमारा परम फ़र्ज़ है । हमारा यही फ़र्ज़ ही हमारा राष्ट्र-धर्म है ।
  • अपने भारतीय भाई-बहनों में यह एहसास दिलाना कि हमने अब तक बंटकर, बिखरकर, जाति/सम्प्रदाय/भाषा/प्रान्त/समूह/क्षेत्र आदि राष्ट्रीय बुराइयों में ही अपने व्यक्तिगत स्वार्थ को साधकर और यहाँ तक कि प्रलोभन/लालच (रुपया/पैसा/बोतल/कंबल /मांस-मंदिरा/वादा (ठीका दिलवाने का, थाने से बसें छुड़वाने का, ग़लत/भ्रष्ट काम दिलवाने आदि का) के वशीभूत होकर समाज के ऐसे भ्रष्ट/अपराधी/तिकड़मी/देश का पैसा लूटकर कालाधान जमा करने वाले सबसे गन्दे व समाज/राष्ट्र विरोधी तत्वों, कुछ अपवादों को छोड़कर, जिन्होंनें राजनीति को जनसेवा/देश-सेवा के स्थान पर लूट/धन्धा का पर्याय बना दिया है और, यदि भारतीय समाज जागरूक हो तो समाज/देश के बाहर कर दिये गए होते तथा देश का क़ानून यदि निष्पक्षता व सख़्ती से पालन किया जाय तो जेल की सलाख़ों के पीछे होते, को चुनकर/भेजकर एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय अपराध किया है जिसके प्रायश्चित के रूप में केवल पात्र लोगों सिर्फ़ अल्फ़ाज़ों में ही नहीं अपितु सच्चे मायनों में राष्ट्र-भक्त, समर्पित, कर्तव्यनिष्ठ एवम चरित्रवान होंगे—उन्हीं को चुनकर हुक़ूमत में भेजने हेतु अपने भारतीय भाई-बहनों को मानसिक रूप से कटिवद्ध तैयार करना ।
  • अपने भारतीय भाई-बहनों/नागरिकों/मतदाताओं को भारत निर्वाचन द्वारा आयोजित चुनाव एवम स्थानीय निकायों के चुनाव जसे राष्ट्रीय अवसरों पर इस बात का एहसास कराना कि 1. यह चुनावी (राष्ट्रीय) अवसर व्यक्तिगत स्वार्थ (जाति, सम्प्रदाय, भाषा, प्रान्त, क्षेत्र, समूह, रिस्तेदारी आदि के प्रति वफ़ादारी निभाने) को साधने तथा प्रलोभन, लालच (रूपाया, पैसा, बोतल, कंबल, उपरोक्त वर्णित वादों) के वशीभूत होकर, क्षणिक, या कुछ देर का ही सही, आनंद लेते हुए किसी ज़लसे, त्यौहार, मेला, पर्व, कुम्भ या महाकुंभ आदि जैसा बिल्कुल नहीं है, यह तो भारतीय नागरिक होने के नाते उनका परम फ़र्ज़ बनता है कि भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मताधिकार के अस्त्र द्वारा भारतीय शासन/हुक़ूमत/व्यवस्था के पात्र/लायक़ अर्थात जो अल्फ़ाज़ों में नहीं बल्कि सच्चे मायनों में, प्रतिशत परिवर्तनीय , राष्ट्र-भक्त (सभी भारतीय भाई-बहनों से समान रूप से मोहब्बत करने वाला एवम उनको समान रूप से सम्मान देने वाला), समर्पित, कर्तव्यनिष्ठ एवम चरित्रवान (रूपये-पैसे की लालच, भ्रष्टाचार, अपराध——आदि से दूर रहने वाला या/और दूर रखने की पर्याप्त क्षमता वाला) हों—उन्हीं को ही चुनकर सदन/सत्ता में भेजें । अपनी भारतीय आवाम (भारतीय भाई-बहन) को इस बात के लिए भी एहसास करवाना कि प्रत्येक भारतीय भाई-बहन/भारतीय नागरिक/भारतीय मतदाता अपने उपरोक्त राष्ट्रीय फर्ज़ निभाते समय उपरोक्त सावधानी बरतने के साथ इस बात को ज़रूर याद रखें कि वही भारतीय भाई-बहन/भारतीय नागरिक/भारतीय मतदाता अपने व्यक्तिगत मार्मिक/महत्वपूर्ण मामलों/अवसरों जैसे बच्चों की शिक्षा, मकान बनाना/बनवाना, बेटी का रिश्ता/शादी आदि पर जिस सजगता/सावधानी/संज़ीदगीपन से वह अपने कर्तव्य का निर्वहन करता है या/और उस अवसर को क़ामयाब बनाने की कोशिश करता है, उससे कई गुने सजगता/सावधानी/ संज़ीदगीपन के साथ उसे अपने उपरोक्त राष्ट्रीय फ़र्ज़ निभाने की नितांत आवश्यकता है क्योंकि इसी से अपने देश/व्यवस्था, देश की सेवी संस्थाओं (Delivery System) के और फलतः हमारे व्यक्तिगत/सामूहिक/सामाजिक/राष्ट्रीय जीवन के भाग्य का निर्माण होगा तथा शासन/प्रशासन/हुक़ूमत/व्यवस्था का पाक़, मुल्क़ परस्ती एवम जनोन्मुखी माहौल बनेगा जो अपने भारतीय समाज में भी संचरित होगा ।
  • Having got our Bharateey Bhaai-Bahan well conceived/understood and made them fully believed that our constitutional and moral existence is BHAARATEEY (as Indian citizen) only, it is to inculcate and establish in them Bhaarateey unity, Bhaarateey equality and Bhaarateey equity.
  • Among our Bharateey Bhaai-Bahan (Indian brethren and sisters), it is to establish unity based on BHAARATEEYATAA only, fraternity based on BHAARATEEYATAA only, mutual co-operation based on BHAARATEEYATAA only, mutual respect based on BHAARATEEYATAA only, mutual goodwill based on BHAARATEEYATAA only, peace based on BHAARATEEYATAA only.
  • Among our Bharateey Bhaai-Bahan (Indian brethren and sisters), it is to establish the understanding that our collective religion OR duty is not as per Hindutw, Islaam, Christianity——-etc. as these are only conventional religious convictions and which are purely personal/private on which, absolutely nobody NOR any other faith-holder has any right to comment/ cast sarcasm or satire/hurt the feeling/demean. Our collective religion is RAASHTRA DHARM i.e. FARZE-MULQ (DUTY TO THE NATION) only, that is, to think and have concern about our country and our fellow countrymen.

Thus, our personal/private lives/conduct may be guided/directed by our personal convictions (Hindoo/Islaam/Christanity—-etc. and other also) but our collective/social lives/conduct will be BHAARATEEY and national only. In other words, within our house or four walls, we may perform poojaa (worship), OR pay tribute and other sacred offerings such as flowers etc., OR offer Namaaz, OR do SHIZDAA (bow before Almighty)—etc., whatever we like and choose according to the practices ordained as per aforesaid personal religious convictions. But the moment we step out of our house or four walls, our lives/conduct will be national/BHAARATEEY only in which RAASHTRA DHARM i.e. DUTY TO THE NATION only has to be discharged.

  • Among our Bharateey Bhaai-Bahan (Indian brethren and sisters), it is to propagate and establish the belief that RAASHTRA DHARM or DUTY TO THE NATION is not like somewhat deeply ponderable theology, mysterious, Metaphysical, Abstraction, Philosophpical Riddle but it is a concept in simple terms that to love and respect/honour each BHAARATEEY Bhaai-Bahan equally and have concern about their happiness, well-being, life easing facilities and their progress, to love our country BHAARAT is our greatest and absolute duty. This absolute duty only is our RAASHTRA DHARM or FARZE-MULQ or DUTY TO THE NATION.
  • To make our Bharateey Bhaai-Bahan (Indian brethren and sisters) feel and candidly accept the bitter fact that till now we, being divided-disunited, settling our selfish ends in national maladies/evils of casteism / communalism / religion / provincialism / linguisticism/ regionalism/groupism etc. and even being captive of our own greed (money/paisa/bottle(of wine)/blanket/meat-wine/selfish promises of (contract, manage to get released of seized buses, arranging immoral/corrupt jobs etc. )) have elected and sent into power such corrupt/criminal/manipulator persons who, barring very few exceptions, are, by and large, the most scum of our society and who have made today’s politics, instead of SERVICE TO THE NATION AND ITS PEOPLE, synonymous to LOOT AND BUSINESS and stashed away black money in foreign banks by ruthlessly looting the precious wealth of this country and who deserve to be thrown out of Bharateey society and the territory of BHAARAT if its people are conscious (of their duties as citizen of this country) and to be put behind bar if the law of the land (BHAARAT) is complied with impartiality and strictness—thereby have committed a great national blunder. As a repentance (of ours aforesaid national blunder), we are to elect and send into governance only those persons who are, not only in words and hear sake but actually, RAASHTRA-BHAKT (faithful to the nation), dedicated, dutiful and men of character AND for that it is to make our Bhaarateey Bhaai-Bahan mentally committed.
  • On national occasions of elections arranged by Election Commission of India and of local bodies (Panchaayats and Municipal bodies), it is to make our Bhaarateey Bhaai-Bahan/Bhaarateey citizen/Bhaarateey voters feel that 1. This election (national occasion) is certainly not meant to settle our selfish ends in national maladies of casteism/ communalism /religion/ provincialism /linguisticism /regionalism /groupism/ discharging the faithfulness of relational bonds, not meant to enjoy, whether momentarily or for some while, being captive of greed (money, paisa, meat, bottle of wine, blanket, aforesaid promises etc.) and to participate in festivities of either function or festival, fair, KUMBH/MAHAAKUMBH etc. 2. It is their (our Bhaarateey Bhaai-Bahan/Bhaarateey citizen/Bhaarateey voter’s ) noble, essential and absolute duty as Bhaarateey citizen to elect and send to Legislature and governance those persons who deserve for governance and establishment i.e. who are, not only in words and hear sake but actually, RAASHTRA-BHAKT (faithful to the nation )(persons loving and giving respect to each and every Bhaarateey Bhaa-Bahan equally), dedicated, dutiful and men of character (persons having the capability to maintain adequate distance from greed of money-paisaa, corruption, crime- – -etc. and to keep these evils away at adequate distance). Our Bhaarateey people (our Bhaarateey Bhaai-Bahan/Bhaarateey citizen/Bhaarateey voter) must remember, at the time of taking above said precautions while discharging their aforesaid citizenry/national duty at the occasion of above said elections, that same our Bhaarateey Bhaai-Bahan/Bhaarateey citizen/Bhaarateey voter requires certain level of alacrity/carefulness/sensitivity to discharge his/her duty in his/her own personal sensitive/crucial matters such as in matters of children’s education, in constructing/making construct own house, marriage or seeking relation for daughter etc. and/or makes efforts in making the said occasion/matter successful. It is quintessentially important that our same Bhaarateey Bhaai-Bahan/Bhaarateey citizen/Bhaarateey voter must take many fold level of those of alacrity/carefulness/sensitivity while discharging his/her above said national/citizenry duty at the occasion of above said elections. Because of this only, the fate of our nation/establishment, of delivery system of our country and consequently that of our personal/collective/social/ national lives will be shaped accordingly and a clean/pure and healthy atmosphere of governance/administration/government/establishment will be formed which will be transmitted in our Bhaarateey society as well.

 

धारा-3 : सदस्यता

Article-3 : Membership

अ-प्राथमिक सदस्यता :

भारत का कोई भी नागरिक :

  • जो भारत की सम्प्रभुता एवम् अखण्डता में विश्वास के साथ भारत की मिट्टी, भारत के लोगों तथा भारत के संविधान में आस्था रखता हो ।
  • जो ‘दल’ के उद्देश्य, सिद्धान्त, नीतियों, कार्यक्रमों एवम् सम्विधान में आस्था रखता हो ।
  • जिसने 18 वर्ष की अवस्था (आयु) प्राप्त कर ली हो ।
  • जिसकी आपराधिक/भ्रष्ट पृष्ठभूमि न रही हो ।
  • जिसका व्यवहार/आचरण नैतिक रूप से अवांछनीय न रहा हो ।
  • जो किसी दूसरे दल का सदस्य न हो ।

वह ‘दल’ का प्राथमिक सदस्य बनने की पात्रता रखता/रखती है ।

ब-सक्रिय सदस्यता :        

क-    ‘दल’ के वे प्राथमिक सदस्य जो निम्न आवश्यकताओं/शर्तों को पूरा करते हैं, ‘दल’ के सक्रिय सदस्यता की पात्रता रखते/रखती हैं :                           

  • जो तीन (03) लगातार वर्षों तक प्राथमिक सदस्य रहे/रही हों, अथवा
  • राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा अनुमति प्राप्त ।

ख-    ‘दल’ के सक्रिय सदस्यों को निम्न शर्तों को पूरा करना होगा :

  • वह कम से कम रुपया 100/- की सदस्यता शुल्क अदा करेगा ।
  • वह ‘दल’ की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति द्वारा निर्धारित न्यूनतम कार्य, जिसमें शारीरिक श्रम (Manual/Physical Labour ) शामिल है, करने के लिए तत्पर होगा ।
  • वह ‘दल’ के किसी विशिष्ट कार्य का उत्तरदायित्व उठाने अथवा ‘दल’ द्वारा सुझाई गई किसी भी गतिविधि में भाग लेने हेतु तत्पर होगा ।
  • वह निर्धारित दीक्षा (Training) में भाग लेगा ।
  • वह निर्धारित आचार संहिता का पालन करेगा ।
  • वह समय-समय पर निर्धारित मानदण्डों का पालन करेगा ।

मात्र सक्रिय सदस्यों को ही मताधिकार प्राप्त होंगे ।

प्राथमिक एवम सक्रिय, दोनों, सदस्यताएं नामांकन तिथि से सामान्यतया 03 साल तक वैध होंगी । फिर भी दल के चुनावी वर्ष में ’दल’ द्वारा निर्धारित तिथि पूर्व नामांकन तिथि से निष्प्रभावी होते हुए सदस्यता का नवीनीकरण हो सकता है ।

‘दल’ का प्रत्येक बुनियादी सदस्य कम से कम ‘दल’ का प्राथमिक सदस्य अवश्य होगा ।

A-Primary Membership :

Any citizen of BHAARAT :

  • Who has conviction in people of BHAARAT, soil of BHAARAT and Constitution of BHAARAT along with having faith in sovereignty and integrity of BHAARAT.
  • Who has conviction in objectives, principles, policies, programmes and constitution of ‘DAL’.
  • Who has attained the age of 18 years.
  • Who does not have corrupt/criminal background.
  • Whose behaviour/conduct is not morally undesirable.
  • Who is not the member of any other party.

–has the eligibility to become a primary member of ‘DAL’.

B-Active Membership :

  1. Primary members of the ‘DAL’ who satisfy the following requirements/conditions have the eligibility of its active membership :

(i)    who have been primary member of the ’DAL’ continuously for 03 years, OR

(ii)    on permission of National President of the ‘DAL’.

  1. An active member of the ‘DAL’ shall have to fulfill following conditions :
  • He will pay a minimum of Rs. 100/- as membership fee.
  • He will be ready to perform the minimum work, which includes manual/physical labour, prescribed by Central Executive Committee of the ‘DAL’.
  • He will be ready to undertake the specific work of the ‘DAL’ or to participate in any of the activities suggested by the ‘DAL’.
  • He will participate in any prescribed training.
  • He will follow the prescribed code of conduct.
  • He will follow the criterion prescribed time to time.

Only the active members (of the ‘DAL’) will have the voting right.

Primary and active memberships, both, will be valid normally up to 03 years from the date of nominations. Yet, membership may be renewed during election year of the ‘DAL’ even before the date of nomination and not withstanding from the date of nomination.

Every founding member of the ‘DAL’ will at least be its primary member.

धारा-4 : संगठनात्मक संरचना

Article-4 : Organizational structure

1-‘दल’ के केंद्रीय संगठन के प्रमुख निम्न अंग हैं :

  • केंद्रीय आम सभा (Central General Body)
  • केंद्रीय कार्यकारिणी समिति (Central Executive Committee)

2- ‘दल’ के स्थानीय संगठन निम्न हैं :

  • प्रत्येक प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य (State/UT) में एक प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य आम सभा (State/UT General Body) होगी ।
  • प्रत्येक प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य (State/UT) में एक प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य कार्यकारिणी समिति (State/UT Executive Committee) होगी ।
  • प्रत्येक जिले के लिए एक जिला आम सभा (District General Body) होगी ।
  • प्रत्येक जिले के लिए एक जिला कार्यकारीणी समिति (District Executive Committee) होगी ।

1-Main organs of the Central Organization are as follows :

  • Central General Body
  • Central Executive Committee

2-Local organizations of the ‘DAL” are as follows :

  • There will be a State/UT General Body in each of the State/UT (Union Territory).
  • There will be a State/UT Executive Committee in each of the State/UT.
  • There will be a District General Body for each of the District.
  • There will be a District Executive Committee for each of the District.

3- (i)          जिला कार्यकारीणी समिति ‘दल’ की प्राथमिक इकाई होगी ।

*यहाँ जिले का तात्पर्य सामान्यतया एक लोक सभा चुनाव क्षेत्र से है ।

(ii)         सम्बन्धित जिले में ‘दल’ की पंजीकृत इकाई क्षेत्र के सक्रिय सदस्यों द्वारा अपने में से चुने गए

सदस्य जिला आम सभा के सदस्य (31 से अधिक नहीं) होंगे ।

  • जिला कार्यकारीणी समिति में एक अध्यक्ष (जो जिला आम सभा का भी अध्यक्ष होगा), एक उपाध्यक्ष और नीचे दिये गए अनुच्छेद 3(xi) अनुसार निर्धारित संख्या में महामंत्री एवम मंत्री, एक कोषाध्यक्ष तथा अनुच्छेद 3(xi) द्वारा निर्धारित संख्या में सदस्य (11 से अधिक नहीं) होंगे । दल का जिलाध्यक्ष जिले में पंजीकृत इकाई के सक्रिय सदस्यों द्वारा चुना जायगा । जिला आम सभा के सदस्य अपने में से ही जिला कार्यकारीणी समिति के अन्य पदाधिकारियों एवम सदस्यों का चयन करेंगे ।
  • प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य के सभी जिला कार्यकारिणी समितियों के अध्यक्ष उस प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य की आम सभा के सदस्य होंगे ।
  • प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य कार्यकारिणी समिति में एक अध्यक्ष (जो प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य आम सभा का भी अध्यक्ष होगा), एक उपाध्यक्ष, अनुच्छेद 3(xi) अनुसार निर्धारित संख्या में महामंत्री एवम मंत्री (03 से अधिक नहीं), एक कोषाध्यक्ष तथा अनुच्छेद 3(xi) अनुसार निर्धारित संख्या में कार्यकारी सदस्य (05 से अधिक नहीं) होंगे । प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष एवम उपरोक्त सदस्य उस प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य की आम सभा के सदस्यों द्वारा चुने जाएँगे । प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य के अध्यक्ष उस प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य कार्यकारिणी समिति के सदस्यों की सलाह/मशविरा से उन्हीं कार्यकारी सदस्यों में से समिति के अन्य पदाधिकारियों को नामित करेंगे ।
  • सभी जिलाध्यक्ष एवम प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य अध्यक्ष केंद्रीय (राष्ट्रीय) आम सभा के सदस्य होंगे।
  • केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति में एक राष्ट्रीय अध्यक्ष जो केंद्रीय (राष्ट्रीय) आम सभा का भी अध्यक्ष होगा, एक राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी, एक उपाध्यक्ष, अनुच्छेद 3(xi) अनुसार निर्धारित संख्या में राष्ट्रीय महासचिव व सचिव, एक कोषाध्यक्ष और अनुच्छेद 3(xi) अनुसार निर्धारित संख्या में (11 से अधिक नहीं) कार्यकारी सदस्य होंगे । केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करेगी । केंद्रीय (राष्ट्रीय) आम सभा राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी तथा केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति के अन्य सदस्यों का चुनाव करेगी । राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति के चुने हुए सदस्यों की सलाह/मशविरा पर केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति के चुने हुए सदस्यों में से राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति के अन्य पदाधिकारियों को नामित करेंगे ।
  • जिला कार्यकारीणी के पदाधिकारी/पदाधिकारियों को जिला कार्यकारीणी समिति से सलाह लेकर सम्बन्धित प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य कार्यकारिणी समिति के अनुमोदन पर जिलाध्यक्ष द्वारा पदमुक्त किया जा सकता है ।
  • प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य कार्यकारिणी समिति पदाधिकारी/पदाधिकारियों को सम्बन्धित प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य कार्यकारिणी समिति के सदस्यों से सलाह लेकर केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति के अनुमोदन पर सम्बन्धित प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य अध्यक्ष द्वारा पदमुक्त किया जा सकता है ।
  • जिला कार्यकारीणी समिति एवम प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य कार्यकारिणी समिति में हस्तक्षेप करने तथा इनके किसी भी पदाधिकारी/पदाधिकारियों को पदमुक्त कर पुनः निर्वाचन का निर्देश देने का विशेषाधिकार केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति के पास सुरक्षित होंगे ।
  • जिला कार्यकारीणी समिति एवम प्रान्त/केंद्र-शासित-राज्य कार्यकारिणी समिति के पदाधिकारियों/ सदस्यों की संख्या ‘दल’ के संविधान अंतर्गत केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति द्वारा निर्मित नियम अनुसार होगी ।
  • ‘दल’ के सभी आम सभाओं एवम कार्यकारिणी समितियों तथा उनके पदाधिकारियों का कार्यकाल 03 साल का होगा ।
  • ‘दल’ की सभी आम सभाओं एवम कार्यकारिणी समितियों के सदस्य तथा उनके पदाधिकारी कितनी बार भी चुने जाँय–इस पर प्रतिबन्ध नहीं है । लगातार 02 बार ही चुने जाएँगे (ऐसा प्रतिबन्ध ‘दल’ में है) । पर यह प्रतिबन्ध राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी पर लागू नहीं होगा ।
  • ‘दल’ की सभी उपरोक्त आम सभाओं एवम कार्यकारिणी समितियों के सदस्यों व पदाधिकारियों का चुनाव Single Transferable Vote (STV) या preferential मतदान पद्धति से गुप्त मतदान द्वारा स्पष्ट बहुमत (Simple Majority) के आधार पर किया जायगा । मतदान देने की योग्यता के मानदण्ड एवम मतदान पद्धति की प्रकृति ‘दल’ के संविधान अन्तर्गत केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति द्वारा निर्मित नियम अनुसार तय किए जाएँगे ।

3-(i)     District Executive Committee will be the primary unit of ‘DAL’.

*Here, normally, a District means a parliamentary constituency.

(ii)       The members (not more than 31) elected by the active members of the area of registered unit (of ‘DAL’) will be the members of District General Body.

  • In a District Executive Committee, there will be a President, who will also be the President of District General Body, a Vice President, General Secretary and Secretaries whose no. is prescribed by the para 3(xi) below, a Treasurer and the members whose no. (not more than 11) is prescribed by the para 3(xi) below. The District President of ‘DAL’ will be elected by the active members of the area of registered unit in District. The members of the District General Body will elect, from within themselves, other office bearers and the members of District Executive Committee.
  • All the Presidents of District Executive Committees in a State/UT will be the members of General Body of the State/UT.
  • In a State/UT Executive Committee, there will be a President, who will also be the President of State/UT General Body, a Vice President, General Secretary and Secretaries whose no. (not more than 03) is prescribed by the para 3(xi) below, a Treasurer and the executive members whose no. (not more than 05) is prescribed by the para 3(xi) below. The State/UT Executive Committee President and aforesaid executive members will be elected by the members of State/UT General Body. The State/UT President will nominate, in consultation with and from within members of the State/UT Executive Committee, other office bearers (of State/UT).
  • All the District Presidents and State/UT Presidents will be the members of Central (National) General Body.
  • In a Central (National) Executive Committee, there will be a President, who will also be the President of Central (National) General Body, a Vice President, General Secretary and Secretaries whose no. is prescribed by the para 3(xi) below, a Treasurer and the executive members whose no. (not more than 11) is prescribed by the para 3(xi) below. The Central (National) Executive Committee will elect National President. The Central (National) General Body will elect National Convenor and Chief Executive and the other members of Central (National) Executive Committee. The National Convenor and Chief Executive will nominate other office bearers of the Committee from within the elected members of Central (National) Executive Committee after consultation with National President and the elected members of Central (National) Executive Committee.
  • The office bearer(s) of District Executive Committee can be removed by the District President on consultation with District Executive Committee and after the approval of State/UT Executive Committee concerned.
  • The office bearer(s) of State/UT Executive Committee can be removed by the State/UT President on consultation with the members of concerned State/UT Executive Committee and after the approval of Central (National) Executive Committee.
  • The Central (National) Executive Committee will reserve the right to intervene in the affairs of District Executive Committee and State/UT Executive Committee and to direct the re-election of their office bearers after removing them.
  • The no. of office bearers/members of the District Executive Committee and State/UT Executive Committee will be according to the rules framed by the Central (National) Executive Committee under the Constitution of ‘DAL’.
  • ‘DAL’ ’s all the General Bodies and Executive Committees and their office bearers/members will have the term of 03 years.
  • There is no bar on the no. of times office bearers/members of the General Bodies and Executive Committees of ‘DAL’ can be elected. They can be elected for 02 consecutive terms only. But this restriction is not applicable on National Convenor and Chief Executive.
  • Election of all the office bearers/members of the General Bodies and Executive Committees of ‘DAL’ will be conducted in accordance with the system of Single Transferable Vote (STV) and preferential voting and on the basis of simple majority through secret ballot. The criterion of eligibility for voting and system of voting will be decided by the rules framed by the Central (National) Executive Committee under the Constitution of ‘DAL’.

4-‘दल’ के राष्ट्रीय पदाधिकारियों कार्य तथा उनके अधिकार :

अ.राष्ट्रीय अध्यक्ष :

क. ‘दल’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ‘दल’ की सामान्य, केंद्रीय (राष्ट्रीय) आम सभा की एवम केंद्रीय(राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति की सभी बैठकों की अध्यक्षता करेंगे ।

ख. राष्ट्रीय अध्यक्ष केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति के अनुमोदन की प्रत्याशा में अनुशासन सम्बन्धी कोई भी कार्यवाई करने में सक्षम होगा । राष्ट्रीय अध्यक्ष यदि यह समझता है कि पार्टी के किसी पदाधिकारी या सदस्य का आचरण ‘दल’ विरोधी है तो वह ऐसे किसी भी पदाधिकारी या सदस्य को पार्टी से निलम्बित कर सकता है । लेकिन वह ऐसे मामलों की जाँच के लिए अनुशासन समिति के पास प्रेषित करेगा ।

ग. जब भी केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति सत्र में नहीं होगी, राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी संयुक्त रूप से केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति की सभी शक्तियों का प्रयोग कर सकेंगे । इस प्रकार राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी के संयुक्त रूप से लिए गए सभी निर्णय बाद में केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति, जब भी वह सत्र में आएगी, द्वारा अनुमोदित किए जाएँगे । राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी के संयुक्त रूप से लिए गए निर्णयों में से जो केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति, जब भी वह सत्र में आएगी, के अनुमोदन से वंचित रह जाएँगे स्वतः निरस्त हो जाएँगे ।

घ. केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति की बैठक बुलाने का अधिकार राष्ट्रीय अध्यक्ष को होगा । केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति के 50% सदस्यों की मांग पर केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति की बैठक बुलाने को राष्ट्रीय अध्यक्ष वाध्य होगा ।

ङ. केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति के किसी सदस्य के त्यागपत्र देने, मृत्यु होने या ‘दल’ से निकाले जाने के कारण रिक्त हुए स्थान/स्थानों को राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति से सलाह-मशविरा करके मनोनयन के माध्यम से भरा जा सकता है ।

4- Duties and rights of National Office Bearers of ‘DAL’

  1. National President :
  2. National President of ’DAL’ will preside over the general meeting of ’DAL’ and the meetings of Central (National) General Body and Central (National) Executive Committee.
  3. In the hope of approval by Central (National) Executive Committee, National President will be competent to take any action in disciplinary related matters. If the National President considers the conduct of any office bearer or member is antiparty (to ’DAL’), then he can suspend the office bearer/member concerned from party. But he will have to send such matters to Disciplinary Committee.
  4. Whenever Central (National) Executive Committee is not in session, the National President and the National Convenor and Chief Executive, jointly, can exercise all the powers of Central (National) Executive Committee. Thus, later on, all the decisions taken jointly by the National President and the National Convenor and Chief Executive will be approved by the Central (National) Executive Committee whenever it subsequently comes in session.

The decisions, jointly taken by the National President and the National Convenor and Chief Executive, left out of the approval by Central (National) Executive Committee will automatically stand cancelled.

  1. The National President will have the right to convene the meeting of Central (National) Executive Committee. The National President is bound to convene the meeting of Central (National) Executive Committee on the demand of 50% of its members.
  2. Vacancy(ies) in Central (National) Executive Committee created on resignation, death, expulsion from the party of its member(s) can be filled up by the National President through nomination after consultation with it (Central (National) Executive Committee).

ब. राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी :-

क. राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष के बीच की स्थिति भारतीय संविधान के क्रमशः प्रधान मंत्री तथा राष्ट्रपति के बीच की स्थिति जैसी है । अतः ‘दल’ की सामान्य, केंद्रीय आम सभा एवम केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति की सभी बैठकों की अध्यक्षता को छोड़कर राष्ट्रीय अध्यक्ष के/की सभी दायित्वों/शक्तियों का वास्तविक संपन्नता/प्रयोग राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी द्वारा किया जाएगा ।

ख. राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति के चुने गए सदस्यों की सलाह/मशविरा पर केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति के चुने गए सदस्यों में से राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी समिति के अन्य पदाधिकारियों को नामित कररेंगे ।

ग. ज़रूरत अनुसार, केंद्रीय(राष्ट्रीय) आम सभा एवम केंद्रीय ( राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति की बैठकें राष्ट्रीय अध्यक्ष से मशविरा करके राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी द्वारा आयोजित की जाएँगी ।

घ. इन बैठकों का एजेंडा राष्ट्रीय अध्यक्ष से मशविरा करके राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी राष्ट्रीय महासचिव के माध्यम से तैयार करेंगे ।

ङ. ‘दल’ के हितों की रक्षा हेतु किसी परिस्थिति में ‘दल’ के निर्णय पर राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी वीटो लगा सकते हैं । इन वीटों की संख्या क्या होगी केंद्रीय (राष्ट्रीय) आम सभा तय करेगी ।

B . National Convenor and Chief Executive :-

  1. The position between the National Convenor and Chief Executive and the National President is similar to the arrangement between Prime Minister and President enshrined in the Indian constitution. Except the functions of National President to preside over the general meetings and the meetings of Central (National) General Body and Central (National) Executive Committee, his (of National President) all other functions/responsibilities/powers will really be exercise by the National Convenor and Chief Executive.
  2. The National Convenor and Chief Executive will nominate other office bearers of Central (National) Executive Committee from within the members of it after consulting the National President and (National) Executive Committee.
  3. As per the need (of ’DAL’), meetings of Central (National) General Body and Central (National) Executive Committee will be convened by the National Convenor and Chief Executive after consulting the National President.
  4. The agenda of such meetings will be prepared by the National Convenor and Chief Executive in consultation with the National President and through National General Secretary.
  5. In order to protect the interests of ‘DAL’, National Convenor and Chief Executive can use veto against the decisions of ‘DAL’. The no. of such vetoes will be decided by the Central (National) General Body.

स. राष्ट्रीय महासचिव :-

राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी द्वारा सौपे गए उत्तरदायित्वों के अनुसार राष्ट्रीय महासचिव ‘दल’ के अधिवेशन/विशेष अधिवेशन की कार्यवाही की रूप-रेखा तैयार करेंगे तथा उनका प्रकाशन कराना उनका दायित्व होगा । राष्ट्रीय सम्मेलन में एवम केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति के द्वारा किए गए कार्यों का विवरण तैयार करना, अगली बैठक में प्रस्तुत करने कार्य भी उन्हीं का होगा ।

द. राष्ट्रीय कोशाध्यक्ष :-

राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष ‘दल’ के कोष के व्यवस्थापक होंगे । वे समस्त पूंजी निवेश, आमदनी तथा खर्च का हिसाब रखेंगे ।

य. राष्ट्रीय सचिव :-

राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी तथा राष्ट्रीय महासचिव से परामर्श करते हुए उनके निर्देशानुसार राष्ट्रीय सचिव ‘दल’ के लिए कार्य करेंगे ।

  1. राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उनकी/उनके सभी शक्तियों/दायित्व/कार्य/अधिकार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष द्वारा प्रयुक्त/सम्पन्न होंगी/होंगे ।
  2. इसी तरह की व्यवस्था के तहद, राष्ट्रीय अध्यक्ष की अकस्मात मृत्यु की स्थिति में उनकी/उनके सभी शक्तियों/दायित्व/कार्य/अधिकार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष की वर्तमान शेषावधि तक के लिए प्रयुक्त/सम्पन्न होंगी/होंगे ।
  3. National General Secretary :-

As per the responsibilities given by the National President and the National Convenor and Chief Executive, National General Secretary will prepare the outline of proceedings of ‘DAL’ ’s Conference/Special Conference and its publication will be his responsibility. He will prepare the details of works done in National Conference (of ‘DAL’) and those done by Central (National) Executive Committee and will present them in next meeting.

D.National Treasurer :-

The National Treasurer will be the manager of ‘DAL’ ’s fund. He will maintain the account of total investment, income and expenditure (of ‘DAL’).

E.National Secretary :-

In consultation with the National President, the National Convenor and Chief Executive and the National General Secretary and as per their directions National Secretary will discharge the functions of ‘DAL”.

  1. In the absence of National President, all his powers/responsibilities/works/rights will be exercised/discharged by the National Vice President.
  2. Under the similar arrangement, on all of a sudden demise of the National President, all his powers/responsibilities/works/rights will be exercised/discharged by the National Vice President for the rest period of the current term of the deceased National President.

धारा-5 : केंद्रीय सचिवालय

  1. ‘दल’ द्वारा निर्धारित नीतियों एवम कार्यक्रमों को संचालित करने हेतु राष्ट्रीय अध्यक्ष व राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी को केंद्रीय सचिवालय, जिसमें राष्ट्रीय महासचिव व राष्ट्रीय सचिव और दूसरे कर्मचारी (आवश्यकता/ निर्धारित संख्या में) होंगे जो राष्ट्रीय अध्यक्ष व राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी द्वारा संयुक्त रूप से नियुक्त किए जाएँगे, की मदद करेगा । ‘दल’ की धनराशि के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी संयुक्त रूप से प्रभारी होंगे । राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष व केंद्रीय सचिवालय की मदद से निवेश, आमदनी एवम व्यय का विधिवत लेखा रखा जाएगा ।
  2. सभी धन ‘दल’ के नाम से खोले गए राष्ट्रीयकृत बैंक के खाते में जमा किए जाएँगे । इस तरह का खाता राष्ट्रीय अध्यक्ष व राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी द्वारा संयुक्त रूप से या इनमे से किसी एक द्वारा अथवा इनके संयुक्त रूप से अधिकृत केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति के किसी सदस्य द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष व राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी के संयुक्त नाम पर संचालित एवम नियंत्रित होगा । दिन-प्रतिदिन के खर्चे हेतु पैसे का निस्तारण राष्ट्रीय अध्यक्ष या राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी या इनके संयुक्त रूप से अधिकृत केन्द्रीय सचिवालय के किसी कर्मचारी द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी के या इनमें से किसी एक की अनुमति उपरांत किया जाएगा ।

Article-5 : Central Secretariat

  1. To implement the policies and programmes prescribed by ‘DAL’, the Central Secretariat which will comprise National General Secretary, National Secretary and other staff (in nos. as per need/prescription of ‘DAL’) to be appointed jointly by National President and the National Convenor and Chief Executive, will help National President and the National Convenor and Chief Executive. National President and the National Convenor and Chief Executive will jointly be the in-charge of ‘DAL’ ’s fund.
  2. All the money will be deposited in the Nationalized bank account opened/operated in the name of ‘DAL’. Such accounts will be operated and controlled either jointly by National President and the National Convenor and Chief Executive OR by anyone of them (on ‘one or the survivor’ basis) OR by a member of Central (National) Executive Committee jointly approvrd by the National President and the National Convenor and Chief Executive under the joint name of National President and the National Convenor and Chief Executive. The disposal of money to meet the day-to-day expenses will be discharged either by National President OR by the National Convenor and Chief Executive OR by the Central Secretariat staff authorized jointly by National President and the National Convenor and Chief Executive and after the permission either jointly by National President and the National Convenor and Chief Executive OR by anyone of them.

धारा-6 : केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति

  1. केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति ‘दल’ की सर्वोच्च कार्यपालक शक्ति( Executive Authority) है । ‘दल’ के विभिन्न प्रावधानों की व्याख्या व उनके पालन के मामले में यह अंतिम शक्ति है । विशेष मामलों में, ख़ासकर आसन्न दिक़्क़तों को दूर करने के लिहाज़ से, इस समिति के पास ‘दल’ के संविधान के प्रावधान/प्रावधानों का उल्लंघन किए बग़ैर ‘दल’ के संवैधानिक प्रावधान में ढील देने की शक्ति निहित होगी ।
  2. केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति प्रशासन एवम ‘दल’ के संविधान के प्रावधानों के अनुपालन हेतु नियम बनाएगी । यह उन प्रशासनिक मामलों के लिए भी नियम बनाएगी जो ‘दल’ के संविधान में स्पष्ट जगह नहीं पा सके, पर ‘दल’ के संविधान से बे-मेल(Inconsistent) भी न रहे ।
  3. केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति ‘दल’ में अनुशासन बनाए रखने के लिए नियम बनाएगी ।
  4. केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति सभी प्रान्त/केंद्र शासित राज्य एवम जिले की आम सभाओं तथा कार्यकारिणी समितियों का अधीक्षण(Superintendence) करेगी, उनको निर्देश देगी और उनके कार्यों को नियंत्रित करेगी ।
  5. केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति किसी भी आम सभा या समिति के पदाधिकारी या सदस्य के विरुद्ध नियमान्तर्गत यथोचित अनुशासनात्मक कार्यवाई कर सकेगी ।
  6. किसी विकट स्थिति का सामना करने के लिए केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति को ‘दल’ के हित में यथोचित कोई भी कार्यवाई करने की विशिष्ट शक्तियाँ प्राप्त होगी बस शर्त यह होगी कि समिति द्वारा उपरोक्त परिस्थितियों में लिया गया निर्णय( कार्यवाई करने का) ‘दल’ के संविधान द्वारा निर्धारित/परिभाषित अधिकार क्षेत्र के यदि बाहर हो तो वह शीघ्र केंद्रीय (राष्ट्रीय) आम सभा के समक्ष अनुमोदनार्थ रखा जाय ।
  7. केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति प्रत्येक वर्ष ‘दल’ एवम केंद्रीय (राष्ट्रीय) आम सभा का लेखा तैयार करेगी ।
  8. केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति राष्ट्रीय अध्यक्ष व राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी के संयुक्त अनुमोदन पर एक या दो लेखा परीक्षक (Auditor), निरीक्षक या दूसरे अधिकारियों की नियुक्ति कर सकती है जो ‘दल’ के सभी या किसी अंग/अवयव के अभिलेख, कागज़ात एवम लेखा-बही (Account Book) की परीक्षा करेंगे । दल’ के सभी अंगों/अवयवों के पदाधिकारियों का यह उत्तरदायित्व होगा कि उपरोक्त लेखा परीक्षकों, निरीक्षकों या दूसरे ऐसे अधिकारियों को सभी ज़रूरी जानकारियाँ उपलब्ध कराएं और इन सभी को सभी कार्यालय लेखा एवम अभिलेख तक पहुँचने को सुनिश्चित करें ।
  9. प्रान्त/केन्द्र शासित राज्य व जिले की विभिन्न समितियों के उचित कार्य निर्वहन हेतु प्रान्त/केन्द्र शासित राज्यों की कार्यकारिणी समितियाँ जो नियम बनाएँगी वे ‘दल संविधान’ के प्रावधानों तथा केंद्रीय राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति द्वारा बनाए गए नियमों से बे-मेल नहीं हो सकतीं । कोई भी इस तरह का नियम (प्रान्त/केन्द्र शासित राज्यों की कार्यकारिणी समितियाँ द्वारा बनाए गए) केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति और राष्ट्रीय अध्यक्ष व राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी के संयुक्त अनुमोदनोपरान्त ही वैध होंगे ।

Article-6 : Central(National) Executive Committee

  1. Central (National) Executive Committee is the supreme Executive Authority of ‘DAL’. In matters of interpretation and implementation of various provisions (of CONSTITUTION, its framed rules and regulations etc.) of the ‘DAL’, it is the final authority/power. In special matters, particularly in respect of removing impending hindrances, the power to relax in implementation of provision of ‘DAL CONSTITUTION’ without violating provision(s) of ‘DAL CONSTITUTION’ will be vested with this Committee.
  2. Central (National) Executive Committee will frame rules for conduct of ‘DAL’ administration and implementation of provisions of ‘DAL CONSTITUTION’. It will frame rule even for those ‘DAL’ ’s administrative provisions which could not find clear space in ‘DAL CONSTITUTION’ but remained not inconsistent with the provision(s) of ‘DAL CONSTITUTION’.
  3. Central (National) Executive Committee will frame rules for maintaining discipline in ‘DAL’.
  4. Central (National) Executive Committee will superintend the General Bodies and Executive Committees of all the State/UTs and Districts, will direct them and will control them.
  5. Central (National) Executive Committee will be able to take disciplinary action under rules against any office bearer or member of any General Body or Executive Committee.
  6. Special powers to deal with peculiar problem(s) will be vested with Central (National) Executive Committee which can take any suitable action in the interest of ‘DAL’. But the only condition in such a situation is that if the decision( to take the said action) taken by the Central (National) Executive Committee in the said circumstance is out of jurisdiction defined/demarcated in ‘DAL CONSTITUTION’, the same will have to be put up before Central(National) General Body for its approval.
  7. Central (National) Executive Committee will prepare account of ‘DAL’ and its Central (National) General Body.
  8. On joint approval of the National President and the National Convenor and Chief Executive, Central (National) Executive Committee can appoint one or two auditors, inspectors and other officers who will examine the records, papers and account books of all or any organ(s) of ‘DAL’. It will be the responsibility of all the organs of ‘DAL’ to make available all necessary informations to these auditors, inspectors and other officers and to ensure their access to all the office accounts and records.
  9. For proper discharge of duties of various Committees of States/UTs and Districts, State/UT Executive Committee will frame rules which can not be inconsistent with the provisions of ‘DAL CONSTITUTION’ and the rules framed by the Central (National) Executive Committee. Any such rules (framed by the State/UT Executive Committee) will be valid only after the approval of Central (National) Executive Committee and jointly of the National President and the National Convenor and Chief Executive.

धारा-7 : प्रान्त/केन्द्र शासित राज्यों एवम जिलों की कार्यकारिणी समितियाँ

  1. प्रत्येक प्रान्त/केन्द्र शासित राज्य की कार्यकारिणी समिति एवम प्रत्येक जिले की कार्यकारिणी समिति अपने-अपने अधिकार क्षेत्र अन्तर्गत आने वाले मामलों के लिए उत्तरदायी होंगी ।
  2. प्रत्येक जिले की कार्यकारिणी समिति जिले में ‘दल’ की गतिविधियों एवम जिले की आम सभा के काम जिसमें वार्षिक लेखा वक्तव्य (Annual Statement of Account) भी शामिल होगा, के सम्बन्ध में एक वार्षिक प्रतिवेदन (Annual Report) सम्बन्धित प्रान्त/केन्द्र शासित राज्य अध्यक्ष को देगी जो उस प्रान्त/केन्द्र शासित राज्य की कार्यकारिणी के समक्ष प्रस्तुत करेंगे ।
  3. उसी प्रकार प्रत्येक प्रान्त/केन्द्र शासित राज्य की कार्यकारिणी समिति उस प्रत्येक प्रान्त/केन्द्र शासित राज्य में ‘दल’ एवम अपनी आम सभा की गतिविधियों जिसमें वार्षिक लेखा वक्तव्य (Annual Statement of Account) भी शामिल होगा, के सम्बन्ध में एक वार्षिक प्रतिवेदन ( Annual Report) राष्ट्रीय अध्यक्ष को देगी जो केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति के समक्ष प्रस्तुत करेंगे ।
  4. ‘दल संविधान’ के प्राविधान/प्राविधानों, बनाए गए नियम एवम केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति द्वारा जारी निर्देशों के पालन की विफलता की स्थिति में केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति राष्ट्रीय अध्यक्ष व राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी के संयुक्त अनुमोदन पर सम्बन्धित समिति/सभा को तत्काल निलम्बित करते हुए उसके स्थान पर एक तदर्थ(Ad-hoc) समिति/आम सभा नियुक्त करेगी ताकि उस कार्य क्षेत्र की गतिविधियाँ निर्बाध रूप से ज़ारी रहें ।
  5. प्रान्त/केन्द्र शासित राज्य की कार्यकारिणी समिति एवम जिले की कार्यकारिणी समितियों में त्यागपत्र, मृत्यु, पदमुक्ति आदि द्वारा रिक्तियों को केंद्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति या राष्ट्रीय अध्यक्ष या राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी के निर्देश के अभाव की स्थिति में उसी चयन प्रक्रिया द्वारा भारी जाएगी जिस प्रक्रिया से रिक्त वाला सदस्य/पदाधिकारी चुना गया था/पदासीन हुआ था । रिक्ति स्थान पर चयनित सदस्य/पदाधिकारी रिक्त सदस्य/पदाधिकारी के शेषावधि तक पदासीन रहेगा ।
  6. किसी भी समिति या आम सभा , जो एक बार अस्तित्व में आ गयी, के द्वारा की गायी कार्यवाई/कार्यवाइयाँ सिर्फ इस आधार पर अवैध नहीं हो सकती/सकतीं कि उसमें/उनमें एकाध रिक्तियाँ हैं ।

Article-7 : Executive Committees of State/UT and Districts

  1. Executive Committees of every State/UT and District will be responsible for the matters under their jurisdictions.
  2. Executive Committee of every District will send the Annual Report, which will include Annual Statement of Account, about the activities of ‘DAL’ and the works of District General Body to the President of the State/UT concerned who will present it before the Executive Committee of that State/UT.
  3. Similarly, Executive Committees of every State/UT will send the Annual Report, which will include Annual Statement of Account, about the activities of ‘DAL’ and of state/UT General Body to the National President who will present it before the Central (National) Executive Committee.
  4. In the event of failure in following/obeying the provision(s) of ‘DAL CONSTITUTION’ and the directions of Central (National) Executive Committee, it(Central (National) Executive Committee), on joint approval of of the National President and the National Convenor and Chief Executive will suspend the concerned Committee/General Body with immediate effect and will appoint an Ad-hoc Committee/General Body in order to continue the activities uninterruptedly in that jurisdiction.
  5. In the event of resignation(s), demise, removal etc. in Executive Committees of State/UT and District, the vacancies so created are filled up, in the absence of direction of any of the Central (National) Executive Committee or National President or the National Convenor and Chief Executive, through the procedure the vacating member/office bearer was elected/posted. The member/office bearer elected/posted against the vacancy so created will continue for the remaining period of the vacating member/office bearer.
  6. The actions of any Committee or General Body, once it comes into existence, can’t be invalid on the premise that there are one or two/few vacancies in them.

धारा-8 : अनुशासन के नियम

1-अनुशासनहीनता की अवधारणा अंतर्गत निम्न आएंगे :

  • ‘दल’ की घोषित नीतियों के विरुद्ध कार्य ।
  • ‘दल’ की नीतियों की सरेआम व जनता के बीच आलोचना ।
  • ‘दल’ के अंदर समूह बनाना या ‘दल संविधान’ सम्मत नियुक्त ‘दल’ के किसी पदाधिकारी के संवैधानिक (अर्थात, ‘दल’ के संविधान-प्रावधानानुसार) अधिकार व हैसियत को चुनौती देने की नीयत व आशय से किसी सदस्य को समर्थन देना ।
  • सदस्यों में बुरी भावना फैलाना अथवा किसी सदस्य के विरुद्ध दुष्प्रचार में संलिप्त रहना ।
  • ‘दल’ के किसी कार्य निष्पादन में किसी तरह का व्यवधान उत्पन्न करना ।
  • ‘दल’ के धन का ग़बन या दुरुपयोग करना ।
  • ऐसे समूह या संघ या दल में शामिल होना जो ‘दल’ के द्वारा मान्यता प्राप्त न हो अथवा जिनके सिद्धान्त ‘दल’ की केन्द्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति द्वारा अनुमोदित न हो ।
  • अपने पदाधिकार का दुरुपयोग करना अथवा अपने अधिकार का उपयोग न करके ‘दल’ के किसी अंग द्वारा सम्पन्न होने वाले कार्य को विफलता की स्थिति में ला देना ।
  • आम/संसदीय, विधान सभा या स्थानीय निकायों आदि के चुनाव में ‘दल’ के अधिकृत प्रत्याशी का विरोध करना ।
  1. अनुशासनहीनता के दोषी सदस्य/पदाधिकारी निम्न दण्डों में से एक या अनेक के भागी होंगे :
  • ‘दल’ से निष्कासन जो स्थायी भी हो सकता है ।
  • किसी नियत अवधि के लिए सदस्यता निलंबित ।
  • कार्यालय से मुक्ति या निष्कासन ।
  • किसी नियत अवधि या स्थायी रूप से ‘दल’ के किसी पद के लिए अयोग्यता लागू होना ।
  1. ’दल’ के किसी सदस्य के विरुद्ध अनुशासनहीनता के सभी मामले सम्बन्धित जिला कार्यकारिणी समिति द्वारा अभियोजित किए जाएँगे और सम्बन्धित जिला कार्यकारिणी समिति अपने प्रान्त/केन्द्र शासित राज्य कार्यकारिणी समिति अध्यक्ष के अनुमोदन पर निर्धारित दण्ड लागू करेगी और इस दण्ड आदेश के विरुद्ध अपील राष्ट्रीय अध्यक्ष को की जा सकेगी ।
  2. जिला कार्यकारिणी समिति के किसी सदस्य या पदाधिकारी के विरुद्ध अनुशासनहीनता के सभी मामले सम्बन्धित प्रान्त/केन्द्र शासित राज्य कार्यकारिणी समिति द्वारा अभियोजित किए जाएँगे और वही निर्धारित दण्ड भी लागू करेगी और इस दण्ड आदेश के विरुद्ध अपील राष्ट्रीय अध्यक्ष को की जा सकेगी ।
  3. प्रान्त/केन्द्र शासित राज्य कार्यकारिणी समिति के किसी सदस्य या पदाधिकारी के विरुद्ध अनुशासनहीनता के सभी मामले राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा अभियोजित किए जाएँगे और वही निर्धारित दण्ड भी लागू करेंगे और इस दण्ड आदेश के विरुद्ध अपील केन्द्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति को की जा सकेगी ।
  4. केन्द्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति के किसी सदस्य और पदाधिकारी, राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी को छोड़कर, के विरुद्ध अनुशासनहीनता के सभी मामले केन्द्रीय (राष्ट्रीय) कार्यकारिणी समिति के शेष सदस्यगणों द्वारा अभियोजित किए जाएँगे और वे ही सामूहिक रूप से निर्धारित दण्ड भी लागू करेंगे । इस दण्ड आदेश के विरुद्ध अपील केन्द्रीय (राष्ट्रीय) आम सभा को की जा सकेगी ।
  5. राष्ट्रीय संयोजक एवम मुख्य कार्यकारी के विरुद्ध अनुशासनहीनता के सभी मामले केन्द्रीय (राष्ट्रीय) आम सभा की कुल सदस्यता का दो तिहाई एवम उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों की कम से कम तीन चौथाई संख्या, इनमें जो भी अधिक हो, द्वारा अभियोजित किए जाएँगे और वही निर्धारित दण्ड भी लागू करेगी । इस दण्ड आदेश के विरुद्ध अपील भी केन्द्रीय (राष्ट्रीय) आम सभा को ही की जा सकेगी जो अपनी कुल सदस्यता के तीन चौथाई संख्या के बहुमत से फैसला लेगी ।

Article- 8 : Rules of Discipline

  1. The concept of anti-disciplinary conduct will include the following :

(i)  Action against the declared policies of ‘DAL’.

(ii) To criticize the policies of ‘DAL’ openly and in public.

(iii)To form group within ‘DAL’ or to support any member with an intent and motive to challenge the Constitutional (i.e. as per ‘DAL’ ’s constitutional provision) authority or position of an office bearer appointed as per the provisions of ‘DAL CONSTITUTION’.

(iv)To propagate ill feeling among members or to indulge in disinformation campaign against any member.

(v)To create any type of hindrance in disposal of ‘DAL’ ’s work.

(vi) Embezzlement or misuse of ‘DAL’ ’s  fund.

(vii)To join such a group or organization or party which is not recognized by the ‘DAL’ or which principles do not have the approval of ‘DAL’ ’s Central (National) Executive Committee.

(viii)To abuse his official position or to make ongoing work being accomplished by an organ of ‘DAL’ into a failure by not using his power/authority.

(ix)To oppose the authorized candidate of ‘DAL’in General/Parliamentary, Assembly or Local Bodies elections.

2- One or more of following penalties will be imposed on members/office bearers found guilty of anti-disciplinary conduct :-

  • Expulsion from ‘DAL’ which may be permanent.
  • Suspension of membership for a prescribed period.
  • Removal or expulsion from office.
  • Making ineligible for a post of ‘DAL’ for a prescribed period or permanently.

3- All the cases of anti-disciplinary conduct of ‘DAL’ member will be prosecuted by the District Executive Committee concerned and this Committee, on approval of its State/UT Executive President, will impose prescribed penalty and the appeal against this penalty order can be made to the National President.

4- All the cases of anti-disciplinary conduct of any member or office bearer of District Executive Committee will be prosecuted by the concerned State/UT Executive Committee and it will impose prescribed penalty and the appeal against this penalty order can be made to the National President.

5- All the cases of anti-disciplinary conduct of any member or office bearer of State/UT Executive Committee will be prosecuted by the National President and he will impose prescribed penalty and the appeal against this penalty order can be made to the Central (National) Executive Committee.

6- All the cases of anti-disciplinary conduct of any member or office bearer, except National Convenor and Chief Executive, of Central (National) Executive Committee will be prosecuted collectively by the rest of its members and they will collectively impose prescribed penalty and the appeal against this penalty order can be made to the Central (National) General Body.

7- All the cases of anti-disciplinary conduct of National Convenor and Chief Executive will be prosecuted by the Central (National) General Body through the numbers of its members governed by two-thirds of its membership and three-fourth of the members sitting and voting, whichever is greater. The appeal against this penalty order can be made to the Central (National) General Body itself which will take its decision on its three-fourth majority.

धारा-9 : ‘दल संविधान’ संसोधन

  • केन्द्रीय (राष्ट्रीय) आम सभा की कुल सदस्यता का दो तिहाई एवम उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों की कम से कम तीन चौथाई संख्या, इनमें जो भी अधिक हो, के द्वारा अनुमोदित होने पर ‘दल संविधान’ में संसोधन किया जा सकेगा ।
  • ‘दल संविधान’ में संसोधन के इरादे से कोई भी नोटिस( प्रस्ताव का) केन्द्रीय (राष्ट्रीय) आम सभा की कुल सदस्यता का 10% सदस्यों द्वारा अनुसूचित तिथि से कम से कम 30 दिन पूर्व दिया जाना चाहिए ।

 Article-9 : Amendment in ‘DAL Constitution’

1-On the approval of Central (National) General Body through the numbers of its members governed by two-thirds of its membership and three-fourth of the members sitting and voting, whichever is greater, amendment to the ‘DAL CONSTITUTION’ can be made.

2-A notice(of proposal) with aim to amend the ‘DAL CONSTITUTION’ will have to be served 30 days in advance from the scheduled date by the members of Central (National) General Body not less than 10% of its total membership.

धारा-10 : विलय एवम भंग

केन्द्रीय (राष्ट्रीय) आम सभा की कुल सदस्यता का 10% सदस्यों द्वारा 30 दिन की अग्रिम नोटिस के साथ केन्द्रीय (राष्ट्रीय) आम सभा की एक आहूत बैठक’दल’ के विलय या भंग के किसी भी प्रस्ताव पर विचार करने के लिए आयोजित की जाएगी । इस तरह की सभा का कोरम 90% का होगा । केन्द्रीय (राष्ट्रीय) आम सभा की कुल सदस्यता का दो तिहाई एवम उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों की कम से कम तीन चौथाई संख्या, इनमें जो भी अधिक हो, के बहुमत से पारित ही यह प्रस्ताव वैध होगा ।

 

Article-10 : Merger and Dissolution

With 30 days advance notice by the members of Central (National) General Body not less than 10% of its total membership, its meeting may be convened to consider the proposal of Merger or Dissolution of ‘DAL’. Such proposal will be valid only after passage by the Central (National) General Body through the numbers of its members governed by two-thirds of its membership and three-fourth of the members sitting and voting, whichever is greater.

धारा-11 : आदेशित/अनिवार्य (Mandatory) प्रावधान

‘दल’ विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति तथा समाजवाद, पंथ निरपेक्षता और लोक तंत्र के सिद्धांतों के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखेगा तथा भारत की सम्प्रभुता, एकता एवम अखण्डता को अक्षुण्ण रखेगा ।

Article-11 : Mandatory Provision

‘DAL’ will repose true reverence and allegiance to the Indian Constitution, established by Law, and to the principles of Socialism, Secularism and Democracy and it will eternalize the Sovereignty, unity and integrity of BHAARAT( India).

 

राष्ट्रभक्त शिरोमणि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस जिंदाबाद । शहीदे आज़म भगत सिंह जिंदाबाद । डा. बी. आर. अम्बेदकर जिंदाबाद । अमर शहीद चन्द्र शेखर आज़ाद, अशफ़ाक़ुल्लाह, खुदी राम बोस, सुब्रमण्यम भारती, रानी गैडेल्यू आदि जिंदाबाद ।

 

जय हिन्द                                                                             जय भारत

भारतीय एकता अमर रहे            राष्ट्रभक्ति अमर रहे                        भारतीय गणतन्त्र अमर रहे

 

MAY LIVE LONG RAASHTRABHAKT SHIROMANI (Torch Bearer Legend of Patriots) NETAA JEE SUBHAASH CHANDRA BOSE and SHAHEEDE AAZAM (Chief of Patriots) BHAGAT SINGH. MAY LIVE LONG Dr B.R. AMBEDKAR.  MAY LIVE LONG IMMORTAL MARTYERS LIKE CHANDRA SHEKHAR AAZAAD, ASHAFAAQ-UL-LAAH, KHUDEERAAM BOSE, SUBRAMANYAM BHAARATEE, RAANEE GAIDELIEU.

JAI HIND                                                                                                         JAI BHAARAT

 

                                 MAY  LIVE LONG BHAARATEEY EKATAA (Indian Unity)

                                 MAY LIVE LONG RAASHTRABHAKTI (Allegiance to the nation)

                                 MAY LIVE LONG   BHAARATEEY GANATANTRA (Indian Republic)

  

राष्ट्रभक्त शिरोमणि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जिंदाबाद । शहीदे आज़म भगत  सिंह  जिंदाबाद ।  डा. बी. आर.  अम्बेदकर जिंदाबाद ।  अमर शहीद चन्द्र  शेखर आज़ाद,  अशफ़ाक़ुल्लाह,  खुदीराम बोस, सुब्रमण्यम भारती, रानी गैडेल्यू आदि जिन्दाबाद ।

 

  जय हिन्द                                         जय भारत

भारतीय एकता अमर रहे                      राष्ट्रभक्ति अमर रहे                  भारतीय गणतन्त्र अमर रहे

 

MAY LIVE LONG RAASHTRABHAKT SHIROMANI (Torch Bearer Legend of Patriots) NETAA JEE SUBHAASH CHANDRA BOSE and SHAHEEDE AAZAM (Chief of Patriots) BHAGAT SINGH. MAY LIVE LONG Dr B.R. AMBEDKAR. MAY LIVE LONG Dr B.R. AMBEDKAR. MAY LIVE LONG IMMORTAL MARTYERS LIKE CHANDRA SHEKHAR AAZAAD, ASHAFAAQ-UL-LAAH, KHUDEERAAM BOSE, SUBRAMANYAM BHAARATEE, RAANEE GAIDELIEU.

JAIHIND                                                                                                                             JAI BHAARAT

                               MAY LIVE LONG BHAARATEEY EKATAA (Indian Unity)

                              MAY LIVE LONG RAASHTRABHAKTI (Allegiance to the nation)

                              MAY LIVE LONG   BHAARATEEY GANATANTRA (Indian Republic)