आज के अपने राष्ट्र भारत के राजनैतिक तथा सामाजिक परिवेश में ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ की ही स्वीकार्यता एवम ग्राह्यता इतनी ज़रूरी क्यों ! ! !

In todays political and social atmosphere in our Nation BHAARAT, why the acceptability and adoptability ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ is so necessary ! ! !

  1. ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ की आवश्यकता क्यों पड़ी एवम इसकी आवश्यकता क्यों महसूस की गई । इस गंभीर विषय पर ग़ौर करने एवम अपने भारतीय भाई-बहनों के समक्ष प्रस्तुत करने हेतु राष्ट्रभक्त शिरोमणि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस, शहीदे आजम भगत सिंह, अमर शहीदों चन्द्र शेखर आज़ाद, अशफ़ाक़-उल-लाह, खुदीराम बोस, सुब्रमण्यम भारती, रानी गैडेल्यू आदि का उल्लेख करना ज़रूरी हो जाता है जिनको 15 अगस्त, 26 जनवरी या इसी तरह के अवसरों पर याद किया जाता है । कितनी विचित्र एवम दुख की बात है कि इन अवसरों पर ये अमर शहीद याद तो किये जाते हैं पर उनको याद करने की रश्म अदयगी के पश्चात उनके द्वारा बताये गए सिद्धान्तों, रास्तों की कोई बात नहीं होती, कोई चर्चा नहीं होती; उन सिद्धांतो को अपनाने व उनके बताये गए रास्तों पर चलने के विचार पर चर्चा/बात नहीं होती, कोई कटिवद्धता दिखाई नहीं देती इन अमर एवम् देशभक्ति के ऐतिहासिक स्रोत शहीदों की जीवनी के अध्ययन पश्चात् ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ (मौलिक नाम ‘भारतीय दल’) ने पाया एवम् महसूस किया कि कितनी दुशवारियों, कठिनाइयों एवम् विपरीत परिस्थितियों के बावज़ूद इन अमर एवम् देशभक्ति के ऐतिहासिक स्रोत शहीदों ने अपनी देशभक्ति के ज़ज़्बे एवम् हौसले को क़ायम रख़ते हुए आज़ादी की ज़ंग को ज़ारी रख़ा और अपने मुल्क़ की आज़ादी की ख़ातिर फाँसी के फन्दे को हँसते-हँसते चूमते हुए मातृभूमि भारत पर अपने प्राण सहित अपना सर्वश्व न्यौछावर कर दिया । इन्हीं अमर एवम् देशभक्ति के ऐतिहासिक स्रोत शहीदों की क़ुर्बानी एवम् शहादत से प्रेरणा लेकर उस पैग़ाम जो इन्होंनें अपनी क़ुर्बानी एवम् शहादत देकर इस राष्ट्र भारत, उसके लोगों (भारतीय भाई-बहनों) एवम् भावी पीढ़ी के लिए छोड़ गए को समझने, अपनाने एवम् उसके लिए ज़ज्बा पैदा करने हेतु ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ ने अपने लोगों (अपने भारतीय भाई-बहनों) में उसी पैग़ाम को प्रचारित/प्रसारित करने का फ़ैसला किया है ।

उस पैग़ाम का अहम् हिस्सा हम भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) में परम/सूक्ष्म (Absolute) एकता ही है जो निहित स्वार्थी एवम् आन्तरिक मन्सूबों वाले लोगों द्वारा रची गयी ख़ुराफ़ाती एवम् भ्रम में जकड़ी गयी परिभाषा/अवधारणा “अनेकता में एकता” से सुदूर व निरपेक्ष है इस परम एकता के पैग़ाम के आधार पर ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) को यह एहसास करने का अनुरोध करता है कि भारत मिट्टी की जो भी सन्तानें हैं वे सभी अर्थात् भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) बग़ैर जाति/सम्प्रदाय/भाषा/प्रान्त/क्षेत्र/समूह आदि की विशेषता जोड़े आपस में (परम रूप में) एक एवम् बराबर हैं । इन अमर एवम् देशभक्ति के ऐतिहासिक स्रोत शहीदों ने मातृभूमि भारत पर अपने प्राण सहित अपना सर्वश्व न्यौछावर किसी ख़ास जाति या ख़ास सम्प्रदाय या ख़ास भाषा के लोगों या ख़ास प्रान्त के लोगों या किसी क्षेत्र विशेष के लोगों या किसी ख़ास समूह के लोगों की ख़ातिर नहीं किया था अपितु समूचे देश भारत व उसके समूचे लोगों अर्थात् भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) एवम् उनकी आज़ादी की ख़ातिर किया था । मसलन, राष्ट्रभक्त शिरोमणि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस ने अपने प्राणों की आहुति कटक (नेता जी की जन्म स्थली) व कटक के लोगों या उडीशा व उड़िया लोगों या बंगाल व बंगाल के लोगों के लिए नहीं दी थी अपितु समूचे राष्ट्र भारत व उसके समूचे लोगों एवम् उनकी स्वतन्त्रता के लिए दी थी । शहीदे आज़म भगत सिंह ने जो हँसते-हँसते फाँसी के फन्दे को चूम कर अपने प्राणों की आहुति दी थी तो पंजाब व उसके सरदार/सिक्ख सम्प्रदाय की ख़ातिर नहीं दी थी बल्कि समूचे देश भारत व उसके समूचे लोगों अर्थात् भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) एवम् उनकी आज़ादी की ख़ातिर दी थी । इसी प्रकार अमर शहीद अशफाक़उल्ला जी ने जो अपने प्राणों की आहुति दी वह किसी सम्प्रदाय विशेष के लिए नहीं अपितु समूचे देश भारत व उसके समूचे लोगों अर्थात् भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) एवम् उनकी आज़ादी की ख़ातिर दी थी ।

इसलिए ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ इन्हीं अमर एवम् देशभक्ति के ऐतिहासिक स्रोत शहीदों की क़ुर्बानी एवम् शहादत की प्रेरणा के आधार पर हम भारतीय भाई-बहनों के बीच “अनेकता में एकता” जैसी एकता की ख़ुराफ़ाती एवम् भ्रम में जकड़ी गयी परिभाषा/अवधारणा को सिरे से ख़ारिज़ करने में विश्वास करता है । हम भारतीय भाई-बहनों के दरम्यान “ अनेकता में एकता” का तो यही मतलब हुआ न कि हम सभी भारतीय भाई-बहन आपस में अलग-अलग, ज़ुदा-ज़ुदा (Divergent, Different, Diversified) हैं, इनमें यदि कोई उभय (Common) चीज़ दिखाई दे तो उसे ही एकता के रूप में देखा जा सकता है अन्यथा हम भारतीय भाई-बहनों के बीच कोई एकता-वेकता है नहीं । हम भारतीय भाई-बहनों के बीच एकता की इस तरह की परिभाषा/अवधारणा इन अमर एवम् देशभक्ति के ऐतिहासिक स्रोत शहीदों एवम् उनकी क़ुर्बानी एवम् शहादत का अपमान है ।         

  1. Why the ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ was necessitated and why its necessity was felt. In order to draw attention on such a serious thought and present it before our Bhaarateey Bhaai-Bahan (Indian brethren and sisters), it becomes obviously essential to illustrate Raashtrabhakt Shiromani(the torch bearer legend of patriots) Netaa Jee Subhaash Chandra Bose, Shaheede AAzam(Chief of Martyres) Bhagat Singh, immortal martyres like Chandra Shekhar Aazaad, Ashfaaq-ul-laah, Khudeeraam Bose, Subramanyam Bhaaratee, Raanee Gaidelyoo etc. who are remembered at least on occasions of 15 August, 26 January and on other similar occasions. How ironical and painful fact for our Bhaarateey Bhaai-Bahan and the nation BHAARAT is that these immortal martyrs and legends of patriotism are done remembered on such occasions but after their ritualistic remembrance, there is no talk, no discussion, no intention to follow/adopt the principles, the ways they laid down and made/left for us and no commitment thereof is discernible. After the study of life histories of these immortal martyrs and legends of patriotism, ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ {earlier and original name ’BHAARATEEY DAL’} found and thereby realised that how they maintained their unflinching and unflagging morale and passion of patriotism, continued their struggle of freedom against immense adversities, difficulties, adverse circumstances and eventually sacrificed/offered all including their lives even happily embracing the hanging-noose{Faansee kaa fandaa} at the altar of Motherland BHAARAT. Taking inspiration from their sacrifices and martyrdom, ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ has decided to propagate among our Bhaarateey Bhaai-Bahan the massage, these immortal martyrs and legends of patriotism gave to this hapless Nation BHAARAT, its people {our Bhaarateey Bhaai-Bahan} and future posterity through their sacrifices and martyrdom, with urge to adopt/practice the same(message) and to create passion for that.

The important part of the said message, unequivocally and in no uncertain terms, is ‘Absolute Unity’ only, among our Bhaarateey Bhaai-Bahan, totally far away and irrespective of the confusion ridden and nefarious definition/concept “Unity in diversity” (of unity) framed/propagated by the people with ulterior motives and vested interests. On the basis of this sacred message of ‘Absolute Unity’ (among our Bhaarateey Bhaai-Bahan), ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ is trying to make our Bhaarateey Bhaai-Bahan realise that whosoever are the offspring of this sacred soil BHAARAT, they are absolutely ONE and equal irrespective of their caste, creed, religion, language, region, group etc.—because of the glaring fact emerging from the sacrifices and martyrdom of these immortal martyrs and legends of patriotism is that these great people sacrificed their all including their lives (at the altar of Motherland BHAARAT) NOT for the people of particular religion OR caste OR language OR region OR group BUT for the whole people of BHAARAT and for BHAARAT itself. Raashtrabhakt Shiromani(the torch bearer legend of patriots) Netaa Jee Subhaash Chandra Bose sacrificed himself NOT for Katak (Odishaa), his birth place, OR Odishaa, OR Oriyaa people, OR Benagaalee, Or West Bengal BUT for the whole people Of BHAARAT and for BHAARAT itself, Shaheede AAzam (Chief of Martyres) Bhagat Singh happily embraced hanging-noose {Faansee kaa fandaa} NOT for Sikkhs/Saradaars and Punjab BUT FOR the whole people Of BHAARAT and for BHAARAT itself, Ashafaaq-ul-llah Jee sacrificed himself at the altar of Motherland BHAARAT NOT for his community BUT for the whole people Of BHAARAT and for BHAARAT itself etc.

That is why ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ believes in totally dismissing ab-initio the deceptive, mischievous and nefarious concept “Unity in diversity” by dint of inspiration from the sacrifices and martyrdom of our these immortal martyrs and legends of patriotism. The sum total of “Unity in diversity” concept of unity, in a nutshell, is that we, the people of India, are mutually different, divergent, diversified among ourselves and if anything is perceived as ‘COMMON’ among ourselves that we can call it unity, otherwise there is no unity at all in absolute terms. The “Unity in diversity” concept of unity is a disgrace to the sacrifices and martyrdom of our these immortal martyrs and legends of patriotism.

  1. एकता के मामले में ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) से भारतीय सम्विधान, जो हम भारत के लोगों के प्रतिनिधियों द्वारा 3 वर्ष 11 माह और 18 दिन में तैयार किया गया था, के प्रस्तावना से सम्बन्धित एक दूसरे तथ्य की और ध्यानाकर्षित करने का अनुरोध करता है । अपने लोगों एवम् सभी सम्वैधानिक/वैधानिक संस्थाओं/हस्तियों सहित यह देश भारतीय सम्विधान द्वारा सन्चालित/निर्देशित/नियन्त्रित है । इसीलिए इसे भारतीय गणतन्त्र कहते हैं । अपना भारतीय सम्विधान हमारी सभी जातीय, धार्मिक, भाषाई प्रान्तीय, क्षेत्रीय, सामूहिक आदि पहचानों को आत्मसात करके अपने प्रस्तावना के माध्यम से आदेशित/निर्देशित करता है कि हम भारतीय भाई-बहनों का वास्तविक एवम् सम्वैधानिक वज़ूद “ हम भारत के लोग” ही है । दूसरे शब्दों में, इस देश के सबसे बड़े क़ानून भारतीय सम्विधान अनुसार हम सभी भारतीय भाई-बहनों का वास्तविक एवम् सम्वैधानिक वज़ूद हिन्दू नहीं है, मुस्लिम नहीं है, इसाई नहीं है———क्षत्रिय नहीं है, ब्राह्मण नहीं है, यादव नहीं है——–पंजाबी नहीं है, बंगाली नहीं है, तमिल नहीं है बल्कि सिर्फ़ व सिर्फ़ भारतीय (भारतीय नागरिक) है । ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) से यह कहता है कि ऊपर के उद्धरणों के अनुसार हम सभी के समक्ष दो जीवन्त तथ्य हैं : 1. अपने सभी जातीय/धार्मिक/भाषाई/प्रांतीय/क्षेत्रीय/सामूहिक क्रत्रिम आवरण (केचुर-साँप का) को त्यागते हुए हम सभी भारतीय भाई-बहन एक (परम रूप में) एवम् बराबर हैं, 2. हम सभी भारतीय भाई-बहन भारतीय (भारतीय नागरिक) एवम् बराबर हैं । इन दोनों तथ्यों को एक साथ करने पर सारांश यही है कि अपने सभी जातीय/धार्मिक/भाषाई/प्रान्तीय/क्षेत्रीय/सामुहिक वाधाओं, जिसे भारतीय सम्विधान अनुसार मिथ्या एवम् अस्तित्वहीन कर दिया गया है, से विरत हम सभी भारतीय भाई-बहन एक (परम रूप में), बराबर एवम् भारतीय (भारतीय नागरिक) हैं । ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ का भी यही मानना है कि इस देश भारत के हम 130/137 करोड़ लोग एक (परम रूप में), बराबर एवम् भारतीय (भारतीय नागरिक) हैं । ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ अपने देशवासियों को सिर्फ़ भारतीय के रूप में देखता है एवम् तद अनुसार आचरण/व्यवहार भी करता है । ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ की नज़र में न तो कोई ‘बहुसंख्यक’ है और न ही कोई ‘अल्पसंख्यक’ ;  न तो कोई ‘दलित’ है और न ही कोई ‘ग़ैर दलित’ ; न तो कोई ‘हिन्दू’ है और न ही कोई ‘मुस्लिम’ ; न तो कोई ‘क्षत्रिय’ है और न ही कोई ‘ब्राह्मण’ ; न तो कोई ‘बंगाली’ है और न ही कोई ‘तमिल’ ; न तो कोई ‘युवा शक्ति’ है और न ही कोई ‘महिला शक्ति’ ; न तो कोई ‘बच्चा शक्ति’ है और न ही कोई ‘बुड्ढा शक्ति’ इत्यादि । अर्थात्, ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ की शब्दावली में इन विभाजनकारी एवम् विभेदकारी शब्दों/अवधारणाओं के लिए कोई ज़गह नहीं है ।
  1. In matter of unity, ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ urges our Bhaarateey Bhaai-Bahan to draw their attention towards another fact emerging from the PREAMBLE of our INDIAN CONSTITUTION prepared by the representatives of we the people of India in 3 years, 11 months and 18 days. This country along with its people, all constitutional/legal institutions/authorities is conducted / directed / controlled by the INDIAN CONSTITUTION and that is why our this country BHAARAT is and called BHAARATEEY GANATANTRA(INDIAN REPUBLIC). Our INDIAN CONSTITUTION through its PREAMBLE mandates that ours constitutional existence and identity is only “ WE THE PEOPLE OF INDIA” subsuming in it ours all religious, caste, linguistic, regional, group identities. In other words, as per our INDIAN CONSTITUTION, the supreme Law of the Land BHAARAT, our real and constitutional existence and identity is NOT AS A HINDOO, NOT AS A MUSLIM———NOT AS A KSHATREEY, NOT AS A BRAHMIN, NOT AS A YAADAV——–NOT AS A TAMIL, NOT AS a PUNJAABEE, NOT AS A BENGAALEE———BUT ONLY AND ONLY BHAARATEEY-BHAARAREEY NAAGARIK(INDIAN CITIZEN)-THE PEOPLE OF INDIA. ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ says to our Bhaarateey Bhaai-Bahan that we are confronted with the two livening facts, emerging from aforesaid illustrations, that 1. We are absolutely one and equal, leaving the sloughs of caste-communal-linguistic-regional-group identities far aside, and 2. We are BHAARATEEY, BHAARATEEY NAAGARIK (Indian Citizen) only and equal. Keeping these two facts together it can safely be concluded that “WE BHAARATEEY BHAAI-BAHAN ARE ABSOLUTELY EQUAL, ONE AND BHAARATEEY (BHAARATEEY NAAGARIK/INDIAN CITIZEN) ONLY’” without the barriers of caste-creed-community-language-region-group which have been rendered pseudo and nonest in Indian Constitutional terms—-‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ urges this much only to our esteemed Bhaarateey Bhaai-Bahan. Thus, ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’, based on above said two facts, maintains the concept that 130/137 crore Bharateey Bhaai-Bahan of our country BHAARAT are equal and one and Bhaarateey Naagarik (Indian citizen). ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ perceives our fellow countrymen as our Bharateey Bhaai-Bahan or Bhaarateey Naagarik (Indian citizen) only and conduct also accordingly. In the eyes of ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’, there is neither ‘Majority’ nor ‘Minority’ ; neither ‘Dalit’ nor ‘Non-Dalit’ ; neither ‘Hindoo’ nor ‘Muslim’ ; neither ‘Kshatreey’ nor Brahmin’ ; neither ‘Bengaalee’ nor ‘Tamil’ ; neither ‘Youth Power’ nor ‘ Women Power’ ; neither ‘Child Power’ nor ‘Old Age Power’ etc. That is, in the attitude of ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’, there is no place for such divisionary and discriminatory words/concepts.
  1. अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) के इस्लाम धर्म/आस्था अनुयायी तबक़े, जिन्हें पारम्परिक रूप में ‘मुस्लिम’ अल्फ़ाज़ से संबोधित किया जाता है, को ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ ‘मुस्लिम’ के नज़रिए से न देखकर बल्कि उन्हें “इस्लाम धर्मावलम्बी (या “इस्लाम धर्मास्था वाले”) भारतीय भाई-बहन” के ही नज़रिए से देखता है, इन्हीं अल्फाज़ों से उन्हें नवाज़ता है, सम्बोधित/सन्दर्भित करता है तथा तद अनुसार उनके साथ आचरण/व्यवहार भी करता है । अपने पिछड़े/वंचित/ग़रीब भारतीय भाई-बहनों के लिए “हरिजन-चमार” आदि जैसे अभद्र/तिरस्कार-पूर्ण शब्दों को कोई ज़गह न देते हुए उन्हें ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ सिर्फ़ “पिछड़े भारतीय भाई-बहन” के ही रूप में देखता है, इन्हीं शब्दों से उन्हें सम्बोधित/सन्दर्भित करता है एवम् तद अनुसार उनके साथ आचरण/व्यवहार भी करता है । प्रान्त/क्षेत्र विशेष जैसे तमिलनाडु में रहने वाले भारतीय भाई-बहनों को ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ ‘तमिलियन’ के रूप में न देखकर अपने “तमिलनाडु वासी भारतीय भाई-बहन” के ही रूप में देखता है, इन्हीं शब्दों से उन्हें सम्बोधित/सन्दर्भित करता है एवम् तद अनुसार उनके साथ आचरण/व्यवहार भी करता है । कोई भारतीय भाषा विशेष जैसे मलयालम बोलने वाले वाले भारतीय भाई-बहनों को ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ ‘केरलाईट’ के रूप में न देखकर अपने “मलयालम भाषी भारतीय भाई-बहन” के ही रूप में देखता है, इन्हीं शब्दों से उन्हें सम्बोधित/सन्दर्भित करता है एवम् तद अनुसार उनके साथ आचरण/व्यवहार भी करता है ।—–तथा-तथा । कहने का तात्पर्य यह है कि ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ का दृढ विश्वास है कि हमारे देश के लोगों के साथ “भारतीय भाई-बहन” का अल्फ़ाज़ (शब्द)/लगाव/बन्धन/ज़ज़्बा अनिवार्य एवम् विफलता-रहित तरीक़े से प्रयुक्त/आचरणित होना ही चाहिए ।
  1. ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ perceives our Islaamic faith brothers and sisters, who are traditionally called as ‘MUSALAMAAN’, NOT as a ‘MUSLIM’ BUT as “Islaam Dharmaawalambee (OR Dharmaasthaa Waale) Bhaarateey Bhaai-Bahan”, embellishes them with these words, addresses/referes them with these words and conducts with them accordingly. ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ perceives our backward/down trodden brothers and sisters NOT AS with demeaning words/addresses like “Chamaar-Harijan etc.” BUT AS our “PICHHADE(Backward) BHAARATEEY BHAAI-BAHAN” and conducts with them accordingly. ’BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ perceives our brothers and sisters residing in a area/region/province such as Taamilnaadu NOT AS TAMILIAN BUT AS “TAMILNAADU WAASEE {residing in Tamilnaadu} BHAARATEEY BHAAI-BAHAN” and conducts accordingly. Similarly, ’BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ perceives our brothers and sisters who speak an Indian language or dialect such as Malayaalam NOT AS “KERALITES” BUT AS “MALAYAALAM BHAASHEE (speaking) BHAARATEEY BHAAI-BAHAN” and conduct accordingly. That is to say that ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ is of the firm conviction that in our each and every address or discourse about people of India, the attachment / bondage / passion / term “BHAARATEEY BHAAI-BAHAN” must necessarily and invariably/ inevitably be used and conducted accordingly.
  1. ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ अपने भारतीय भाई-बहनों में पिछड़ेपन से वाक़िफ़ है एवम् उसे वाज़िब अहमियत देता है । ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ अपने भारतीय भाई-बहनों में पिछड़ेपन का आधार सिर्फ़ आर्थिक के रूप में स्वीकारता है और निश्चित तौर पर उसे किसी जाति/धर्म/सम्प्रदाय/भाषा/प्रान्त/ क्षेत्र/समूह से जोड़ने के पक्ष में बिलकुल नहीं है । ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ अपने भारतीय भाई-बहनों में पिछड़ेपन की समस्या के समाधान में आरक्षण की भूमिका से सहमत नहीं है और इस सम्बन्ध में उसका दो टूक कहना है कि इस समस्या का समाधान आरक्षण नहीं है । यह जानना कौतुहल होगा कि बाबा साहेब डॉ. भीम राव अम्बेदकर, जो सम्विधान निर्मात्री सभा में प्रारूप/मसौदा समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष थे, ने भारतीय सम्विधान में आरक्षण की सिफ़ारिश नहीं की थी । उनके ख़िलाफ़ कुछ निहित स्वार्थी ताक़तों द्वारा दुष्प्रचार किया गया है कि बाबा साहेब ने भारतीय सम्विधान में आरक्षण की सिफ़ारिश की थी और इस तरह का दुष्प्रचार भारतीय जनमानस में समा गया है ।

देश में आरक्षणके स्थान पर, आर्थिक साधन-विहीन भारतीय भाई-बहनों को उचित/पर्याप्त आर्थिक मदद देते हुए एवम सीखने व अपनी आन्तरिक प्रतिभा को निखारने हेतु उचित/पर्याप्त वातावरण——Coaching, Training, Pruning, Grooming आदि——-उचित/पर्याप्त स्तर (दिल्ली आदि) का——-निःशुल्क उपलब्ध कराते हुए उन्हें उनकी निखरी हुई नैसर्गिक क़ाबिलियत के बूते उन्हें उनके पात्र नौकरी/ओहदा देने एवम् उन्हें उनके पात्र सामाजिक प्रतिष्ठा बख़्शने, जिन सभी के वे समकक्ष भारतीय प्रतिस्पर्धी के समतुल्य नैतिक हक़दार हैं, में ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ यक़ीन करता है ।

ये स्वार्थी ताक़तें/संगठन, जो अधिकांशतः राजनैतिक दलों के वेश में हैं, और जिन्होंनें यह दुष्प्रचार किया कि बाबा साहेब ने ही भारतीय सम्विधान में आरक्षण की सिफ़ारिश की थी, अपनी स्वार्थ पूर्ति हेतु बाबा साहेब को ढाल के रूप में इस्तेमाल करती आई हैं एवम् कर रही हैं । ये स्वार्थी ताक़तें/संगठन/राजनैतिक दल  अधिकांशतः भ्रष्टाचारी/अपराधी/तिकड़मी तथा भारतीय भाई-बहनों से झूठ बोल-बोल कर उन्हें छलने वाले, ठगने वाले समूह के साथ-साथ विघटनकारी शक्तियाँ हैं जो भारतीय समाज में व्याप्त जातिवाद/साम्प्रदायिकता/भाषावाद/प्रान्तवाद/समूहवाद/क्षेत्रवाद आदि राष्ट्रीय बुराइ/ज़हर/बिखराव को और चौड़ा/विकराल करके अपने वोट/सत्ता की स्वार्थ नीति/राजनीति की रोटी सेंकती हैं । आरक्षण एवम् उसका ज़ारी रखना इन्हीं स्वार्थी/भ्रष्टाचारी/अपराधी/तिकड़मी तथा भारतीय भाई-बहनों से झूठ बोल-बोल कर उन्हें छलने वाले, ठगने वाले समूह के साथ-साथ विघटनकारी शक्तियाँ अथवा स्वार्थी संगठनों/राजनैतिक दलों, जो अपने भारतीय समाज की विघटनकारी शक्तियाँ भी हैं, की साज़िश है । ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ इस सन्दर्भ में उस साज़िश की ओर इशारा करता है जिसके तहद आरक्षण का लाभ पात्र पिछड़े भाई-बहनों (ग़रीब व वंचित) से छीनकर जाति के नाम पर नए सामन्तशाहों, जो अपने को स्वयं-भू ‘दलितों के मसीहा’ व ‘पिछड़ों के मसीहा’ इत्यादि घोषित किये हुए हैं, के बच्चों व उनके आश्रितों को परोशा जाता है तथा नए सामन्तशाहों, स्वयं-भू ‘दलितों के मसीहा’ व ‘पिछड़ों के मसीहा’ इत्यादि, द्वारा जाति आधारित आरक्षण एवम् जाति आधारित उपरोक्त वर्णित वोट-सत्ता की स्वार्थ नीति/राजनीति को अनन्त काल तक ज़ारी रख़ा जाता है जिससे ये नए सामन्तशाह, स्वयं-भू ‘दलितों के मसीहा’ व ‘पिछड़ों के मसीहा’ इत्यादि, उन पात्र ग़रीब/विपन्न/असहाय भारतीय भाई-बहनों के आरक्षण का हक़ भी छीनते हैं, आरक्षण के नाम पर भारतीय समाज में उपरोक्त वर्णित विघटनकारी कृत्य द्वारा वोट-सत्ता की स्वार्थ नीति/राजनीति करके सत्ता का सुख भी भोगते हैं और हमारे ये पात्र ग़रीब/विपन्न/असहाय भारतीय भाई-बहन उसी दयनीय स्थिति में अनन्त काल तक पड़े हुए हैं और इसी कभी न ख़त्म होनेवाली पात्र ग़रीब/विपन्न/असहाय भारतीय भाई-बहन की उसी दयनीय स्थिति को दिखा-दिखा कर ही अनन्त काल तक आरक्षण ज़ारी रखने की साज़िश को अंज़ाम दिया जाता है । हमारे बच्चे स्कूल से लेकर सेवा समाप्ति तक राष्ट्रीय अभिशाप ‘आरक्षण’ का सितम झेल रहे हैं ।

आरक्षण को अन्य दूसरे दलों, इनमे से एक दल तो स्वयं इस जातिगत-आरक्षण अभिशाप की ही जड़ है,  का मूक समर्थन इसलिए प्राप्त है क्योंकि वोट-चुनावी लाभ-नुक़सान के ख़तरे को उठाने के लिए वे तैयार नहीं है और इसीलिये वे भी आरक्षण की जातीय घिनौनी स्वार्थनीति (जिसे राजनीति कहते हैं) की sewage (गन्दी-नाली) में अपने को जान-बूझकर बहने दे रहे हैं ।

दो समानान्तर तथ्यों की विडम्बना का परिदृश्य देखिये : 1. एक ओर जहाँ नए सामन्तशाहों, स्वयं-भू ‘दलितों के मसीहा’ व ‘पिछड़ों के मसीहा’ इत्यादि, के बच्चे एवम् आश्रित पात्र ग़रीब/विपन्न/असहाय भारतीय भाई-बहनों के आरक्षण का हक़  छीनते चले जा रहे हैं जिससे ये पात्र ग़रीब/विपन्न/असहाय भारतीय भाई-बहन उसी दयनीय स्थिति में अनन्त काल तक पड़े हुए हैं तथा हमारे बच्चे स्कूल से लेकर सेवा समाप्ति तक राष्ट्रीय अभिशाप ‘आरक्षण’ का सितम झेल रहे हैं ।  2. दूसरी ओर वहीं अपने बच्चों एवम् आश्रितों को आरक्षण का लाभ परोशने (पात्र ग़रीब/विपन्न/असहाय भारतीय भाई-बहनों के आरक्षण का हक़  छीनकर) के साथ-साथ नए सामन्तशाह, स्वयं-भू ‘दलितों के मसीहा’ व ‘पिछड़ों के मसीहा’ इत्यादि जाति-गत आरक्षण की राजनीति के बूते भारतीय समाज में उपरोक्त वर्णित विघटनकारी कृत्य द्वारा वोट-सत्ता की स्वार्थ नीति/राजनीति करके सत्ता का सुख भी भोग रहे हैं । इन दोनों तथ्यों को मिलाने पर सारान्श यह है कि जाति-गत आरक्षण की राजनीति के कारण हमारे पात्र ग़रीब/विपन्न/असहाय भारतीय भाई-बहन अपनी दयनीय स्थिति में एवम् हमारे बच्चे राष्ट्रीय अभिशाप ‘आरक्षण’ का सितम, दोनों,   अनन्त कालीन दोज़ख़ झेलने को मज़बूर तथा नए सामन्तशाह के लिए अपने बच्चों एवम् आश्रितों को आरक्षण का लाभ परोशने के साथ सत्ता का स्वर्ग तुल्य सुख—-इनके लिए तो “मौजा ही मौजा” ।

इसलिए ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ का स्पष्ट मानना है कि आरक्षण एवम् उसका ज़ारी रखना इन्हीं स्वार्थी/भ्रष्टाचारी/अपराधी/तिकड़मी तथा भारतीय भाई-बहनों से झूठ बोल-बोल कर उन्हें छलने वाले, ठगने वाले समूह के साथ-साथ जाति-गत आरक्षण की राजनीति चलाने वाली विघटनकारी शक्तियाँ तथा अन्य स्वार्थी संगठनों/राजनैतिक दलों, जो अपने भारतीय समाज की विघटनकारी शक्तियाँ भी हैं, की कभी न ख़त्म होने वाली साज़िश है—— अपने देश भारत एवम् हमारे पात्र ग़रीब/विपन्न/असहाय पिछड़े भारतीय भाई-बहन विशेषकर, आम एवम ग़रीब/असहाय/दिहाड़ी (दैनिक आमदनी पर निर्भर रहने वाले जैसे रेड़ी-पटरी वाले, रिक्से वाले, छोटे-छोटे कारीगर आदि) मज़दूर/विपन्न/सामाजिक क़तार का आख़िरी व्यक्ति जिनके नाम पर आरक्षण के ढिंढोरे पीटे जाते हैं, तुरही बजायी जाती है, के हित में तो कत्तई नहीं ।

  1. Yes, ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ does recognise the backwardness among our Bharrateey Bhaai-Bahan but that backwardness is economic only and certainly NOT based on any other consideration of caste, creed etc. and in this respect, ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ is unequivocally clear that ‘RESERVATION’ is not the way to address this problem. It is intriguing to know in this regard that Baabaa Saheb Dr B. R. Ambedkar had not recommended for reservation in the Indian Constitution he drafted. It is the disinformation campaign against him by the forces of vested interests to defame him that Ambedkar Saheb had recommended for reservation in the Indian Constitution and such disinformation (wrong information) has proliferated into the minds of Indian masses.

In place of ‘Reservation’, ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ believes that by providing them adequate economic support, by making available to them the training/coaching/pruning /grooming of standard level (what is available in Delhi etc.) free of cost for making their talent within themselves to take full bloom and thereby making themselves capable to qualify for their deserving posts/services/positions at par with their fellow Indian competitor counterparts and thus bestowing them their deserving recognition and prestige in Bhaarateey establishment as well as in Bhaarateey society. This is the way or solution to eradicate the backwardness of this vulnerable section (PICHHADE( Backward) BHAARATEEY BHAAI-BAHAN) of our Bhaarateey society.

The forces of vested interests, who defame Baabaa Saheb Dr B. R. Ambedkar for recommending reservation in Indian Constitution, mostly in guise of political parties and their supporters, use Dr Ambedkar as their shield. These forces in the form of selfish political parties/organizations who are mostly, barring few exceptions, corrupt/criminal/ manipulator and group of elements who repeatedly deceive and dupe our innocent Bhaaratey Bhaai-Bahan through lie after lie, are actually the divisive forces in our country BHAARAT who settle their vested and selfish ends by widening the yawning gaps in our Bhaarateey society in the form of prevalent casteism/communalism/ linguisticism/provincialism/regionalism/groupism etc., the national ill and poison, and thereby fulfil their motives of grabbing power by cooking/manipulating electoral politics through the national ills and poison of casteism/communalism/linguisticism/ provincialism/regionalism/groupism. Our children suffer the persecution under the national scourge of ‘RESERVATION’ from schooldays to the end of service/job. The national scourge ‘RESERVATION’ and its continuation is the outcome of conspiracy of aforesaid divisive forces. ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ hints, in this respect, towards the dimension of that conspiracy under which the benefit of reservation is being snatched from our deserving PICHHADE (backward and down trodden) Bhaarateey Bhaai-Bahan and is being grabbed, under the premise of “CASTE BASED RESERVATION”, by the children and dependents of NEO-FEUDAL OVER LORDS under the garb of self-proclaimed “MESSIAH OF DALIT”, “MESSIAH OF BACKWARDS” and so on. The politics of “CASTE BASED RESERVATION” being made continued, under the other dimension of aforesaid conspiracy, unabatedly without any end by NEO-FEUDAL OVER LORDS under the garb of self-proclaimed “MESSIAH OF DALIT”, “MESSIAH OF BACKWARDS” etc. is being exploited in electoral politics for grabbing power.

The other political parties, one of them is at the root of such a problem, are meek/dumb on the issue with tacit support and have made themselves as co-opted under the greed of electoral gains. These NEO-FEUDAL OVER LORDS through their caste based reservation politics are enjoying the fruits of power either directly or proximity with it by citing the cases of very those deserving PICHHADE (backward and down trodden) Bhaarateey Bhaai-Bahan whose benefit of reservation is being appropriated by the children and dependents of the same NEO-FEUDAL OVER LORDS. and this vulnerable section of our Bhaarateey Bhaai-Bahan continue in their same pathetic condition endlessly. Now, the irony of the scenario depicting the two parallel facts deserves the attention to be drawn 1. The benefit of reservation of our deserving PICHHADE (backward and down trodden) Bhaarateey Bhaai-Bahan is continued to be appropriated endlessly by the children and dependents of NEO-FEUDAL OVER LORDS under the garb of self-proclaimed “MESSIAH OF DALIT”, “MESSIAH OF BACKWARDS”, and 2. These NEO-FEUDAL OVER LORDS through their caste based reservation politics are enjoying the fruits of power either directly or proximity with it by citing the cases of same those deserving PICHHADE (backward and down trodden) Bhaarateey Bhaai-Bahan who continue in their same pathetic condition endlessly as their benefit of reservation is continued to be appropriated endlessly by the children and dependents of same NEO-FEUDAL OVER LORDS. So, whereas, on one side, our children suffer the persecution under the national scourge of ‘RESERVATION’ from schooldays to the end of service/job and our deserving PICHHADE (backward and down trodden) Bhaarateey Bhaai-Bahan continue in their same pathetic condition endlessly, in the circumstances delineated above, under the wheel of “CASTE BASED RESERVATION”, and on the other side, the NEO-FEUDAL OVER LORDS through their caste based reservation politics are enjoying the fruits of power either directly or proximity with it by citing the cases of same those deserving PICHHADE (backward and down trodden) Bhaarateey Bhaai-Bahan who continue in their same pathetic condition endlessly under the circumstances delineated above. In other words, in the situation thrusted upon by the ‘caste based reservation’, our chindren and our deserving PICHHADE (backward and down trodden) Bhaarateey Bhaai-Bahan suffer hell whereas for above described NEO-FEUDAL OVER LORDS it is “MAUJAA HEE MAUJAA” like heavenly bliss. That is why, ‘CASTE BASED RESERVATION’ is a potent tool in the hands of NEO-FEUDAL OVER LORDS and the political parties who are meek/dumb on the issue with tacit support and have made themselves as co-opted under the greed of electoral gains to fulfil their vested interests of electoral politics and power, BUT CAN NEVER be in the interest of our Nation BHAARAT and its children and its deserving PICHHADE (backward and down trodden) Bhaarateey Bhaai-Bahan especially in them the poor/daily earning labourers/rikshaw pullers/street sellers/destitute/indigent/ poor without any support of livelihood/poor at the last rung of the social ladder in uplifting their standards of life on whose name ‘RESERVATION’ issue is trumpeted and drummed up.

  1. इस तरह के प्रेरक विचारों से ज़ज़्बा पैदा कर ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) में भारतीयता आधारित एकता, भारतीयता आधारित भाई-चारा, भारतीयता आधारित आपसी सम्मान, भारतीयता आधारित आपसी सहयोग, भारतीयता आधारित आपसी सद्भाव, भारतीयता आधारित शांति का भाव/भावना/लगाव/ज़ज़्बा/आचरण आदि स्थापित करने के अनवरत प्रयास में रत है ।

राष्ट्रभक्त शिरोमणि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस, शहीदे आजम भगत सिंह, अमर शहीदों चन्द्र शेखर आज़ाद, अशफ़ाक़-उल-लाह, खुदीराम बोस, सुब्रमण्यम भारती, रानी गैडेल्यू आदि अमर एवम् देशभक्ति के ऐतिहासिक स्रोत शहीदों जिन्होंनें अपने मुल्क़ की आज़ादी की ख़ातिर मातृभूमि भारत पर अपने प्राण सहित अपना सर्वश्व न्यौछावर कर दिया की क़ुर्बानी एवम् शहादत का वह पैग़ाम जो इन्होंनें अपनी क़ुर्बानी एवम् शहादत देकर इस राष्ट्र भारत, उसके लोगों (भारतीय भाई-बहनों) एवम् भावी नस्लों के लिए छोड़ गए—-को भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) में समझने/समझाने, अपनाने एवम् उसके लिए ज़ज्बा पैदा करने तथा उनमें उसी पैग़ाम के आधार पर  परम/सूक्ष्म (Absolute) एकता {अर्थात भारतीय एकता} {प्रदूषित, ख़ुराफ़ाती एवम् भ्रम में जकड़ी गयी परिभाषा/अवधारणा “अनेकता में एकता” से सुदूर व निरपेक्ष} एवम् राष्ट्रभक्ति की भावना पैदा करने, अपनाने तथा ज़ज़्बे में लाने के इरादे से अपने लोगों (अपने भारतीय भाई-बहनों) में प्रचारित/प्रसारित करने के लिए आरम्भ में, इसी तरह के प्रेरक विचारों से ज़ज़्बा लेकर ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ (मौलिक नाम ‘भारतीय दल’) के सदस्यों ने कई सभाएँ कीं ।

इस तरह के भारतीय एकता एवम् राष्ट्रभक्ति के अभियान के परिणाम स्वरुप यह देखने को मिला कि मोटे तौर पर लोगों नें इसको पसन्द किया, इसकी ओर आकर्षित हुए और लोगों ने स्वीकार भी किया कि हमारे देश में जो बुराइयाँ व्याप्त हैं, जिन समस्याओं से यह देश व उसके देशवासी ग्रसित/त्रासित/दुखी एवम् उसे झेल रहे हैं का काफ़ी हद तक एक मात्र निदान भी है । लेकिन अफ़शोश  के साथ विडम्बना यह रही कि इतनी अच्छी प्रतिक्रया (पसन्द एवम् आकर्षण) के बावज़ूद लोग इसे अपनाने एवम् इसे अपने आचरण में लाने हेतु आगे नहीं आये । सम्भव है कि उन्हें ऐसा करने (अपनाने एवम् आचरण में लाने) में व्यवहारिक दिक्कतों का सामना करने के लिए मानसिक तौर पर तैयार न हों ।

इसके पश्चात्, हमारे संगठन के लोगों नें फ़ैसला किया कि हम लोगों को अपने लोगों अर्थात् भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) में, ख़ासकर, ज़मीन से जुड़े लोगों में, जाना चाहिए और उनका जीवन एवम् दिनचर्या आसान करने के लिए  कुछ करना चाहिए । इसके माध्यम से हम अपने उन भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) के बीच यह सन्देश दे पायेंगे कि हमारी कथनी व करनी में कोई फ़र्क नहीं है अर्थात् जो हम कहते हैं वही करते भी हैं या हम वही करते हैं जो हम कहते हैं। साथ ही साथ भारतीय एकता एवम् राष्ट्रभक्ति के विचार/भावना एवम् उसे अपनाने व आचरण में लाने के प्रति उनका विश्वास भी जगना आरम्भ हो जायगा । ऐसा करने के लिए ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ के सदस्यों को कुछ हैसियत/अधिकार की आवश्यकता होती है जिसके लिए भारतीय चुनाव व्यवस्था (लोक सभा, विधान सभा व अन्य) से गुज़रना होगा । अतः ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ के सदस्यों का यह मत हुआ कि एक राष्ट्रीय स्तर का दल बनाकर भारत निर्वाचन आयोग (चुनाव आयोग) से पन्जीकृत कराया जाय । लभभग 20 मार्च, 2016 को पन्जीकरण हेतु आवेदन ‘भारतीय दल’ के नाम से भारत निर्वाचन आयोग में दाख़िल किया गया और लगभग 08 माह पश्चात् 19 नवम्बर, 2016 को भारत निर्वाचन आयोग से ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ नाम के साथ पन्जीकरण हासिल हो गया। इसका पन्जीकरण संख्या : 56/85/2016-16/रा०द० अनु०-1 है ।

अमर एवम् देशभक्ति के ऐतिहासिक स्रोत शहीदों जैसे राष्ट्रभक्त शिरोमणि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस आदि की क़ुर्बानी एवम् शहादत के पैग़ाम स्वरुप बराबरी एवम् भारतीय एकता (परम/सूक्ष्म एकता) तथा भारतीय सम्विधान के निर्देश/आदेश ‘हम भारत के लोग बराबर एवम् भारतीय नागरिक’ की अर्थात् दोंनों की अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) में भावना/ज़ज़्बा/अपनाने/आचरण हेतु ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ अथक एवम् अनवरत प्रयासरत है । इसलिए ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) से यह व्यक्तिगत/सामूहिक प्रतिज्ञा करने का अनुरोध करता है कि, “हम भारतीय हैं शुरू से आख़िर तक और हमेशा । इसके अलावा हमारा न तो कोई वज़ूद है और न ही कोई पहचान” । इसके साथ वह इस ज़ज़्बे को भी आत्मसात करने का अनुरोध करता है,  “हमारे हिन्दू या मुस्लिम या इसाई या सिक्ख आदि ; क्षत्रिय या ब्राह्मण या यादव आदि ; बंगाली या तमिल या पंजाबी आदि पर गर्व करने का सवाल ही नहीं क्योंकि ये सभी हमारे भारतीय कद/पहचान के समक्ष बहुत ही बौने एवम् तुच्छ हैं” ।

  1. Being fired of such inspirational thoughts, ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ is relentlessly making its endeavour to bring about the sense/spirit/attachment/passion/conduct of unity based on Bhaarateeyataa only, fraternity based on Bhaarateeyataa only, mutual respect based on Bhaarateeyataa only, mutual co-operation based on Bhaarateeyataa only, mutual goodwill based on Bhaarateeyataa only, (mutual or otherwise) peace based on Bhaarateeyataa only among our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN(Indian brethren and sisters).

Initially, with the same fire of inspirational thoughts, members of ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ (original name ‘BHAARATEEY DAL’) organised a number of meetings to drive a campaign of BHAARATEEY EKATAA (Indian Unity) and RAASHTRABHAKTI (Allegiance to the Nation (BHAARAT)) in order to inculcate, cultivate and enthuse the sense and sprit of unity and oneness among our Bhaarateey Bhaai-Bahan (brothers and sisters of India) leaving far behind the perverted theory of unity in India  under the name, “ Anekataa Men Ekataa (“Unity in Diversity”), owing to the very spirit and message the immortal martyrs, legends of patrots and real heroes of the Nation BHAARAT such as Raashtrabhakt Shiromani (the torch bearer legend of patriots) Netaa Jee Subhaash Chandra Bose, Shaheede AAzam (Chief of Martyres) Bhagat Singh———Raanee Gaidelyoo etc. who sacrificed their all including their lives at the altar of Motherland BHAARAT to liberate it from the English subjugation, conveyed and gave to the nation, its bewildered people and coming posterity through their martyrdom and sacrifices.

As a result of the campaign of BHAARATEEY EKATAA EWAM RAASHTRABHAKTI (Indian Unity and allegiance to the Nation), it was observed that, by and large, people appreciated it and attracted towards its idea of BHAARATEEY EKATAA (Indan Unity) and they also seemed to be conceded that this BHAARATEEY EKATAA is the panacea of all the ills, problems our Nation BHAARAT and its people are facing and are being inficted. But the irony with tragedy of such an encouraging response from the people had been that, in spite their above said appreciation and attraction, they did not come forward to adopt it and conduct accordingly, may be want of faith in the practicability in adopting and conducting BHAARATEEY EKATAA (Indan Unity).

Thereafter, our organisation members decided that we should go among the people, particularly the graas root people, and do something to ease their lives and routine and thereby give them a sort of relief and help. Through this our action, we may be able to convey a message to our own people that what we say we do the same OR, in other words, we do exactly what we say, thereby we might be able to start gaining confidence of our Bhaarateey Bhaai- Bahan(brothers and sisters of India) in adopting and conducting the idea/spirit/ways of BHAARATEEY EKATAA. To perform such an action by our organisation members, certain position/authority is required and for that, passing through Indian electoral process (Assembly, General and others) is a must. Consequently, our organisation members decided to form a national level political party and get it registered with Election Commission of India. After a span of about 8 months since its filing (for registration with the name ‘BHAARATEEY DAL’ on 20th March of 2016, the impugned political party got registered on 19th November of 2016 with Election Commission of India with the name ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’. Its registration No. : 56/85/2016-16/PPS-I.

On the basis of message of “Absolute Unity” among our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN through the inspiration of sacrifices and martyrdom of our immortal martyrs and legends of patriotism like Raashtrabhakt Shiromani (he torch bearer legend of patriots) Netaa Jee Subhaash Chandra Bose etc. and on the basis of mandate of Indian Constitution through its Preamble (“WE THE PEOPLE OF INDIA”) for our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN, ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ is making tireless endeavour to make our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN to take oath, “WE ARE BHAARATEEY from beginning to end and always. Ours, apart from this, there is neither any existence NOR any identity”. And also, “There is no question taking pride in being Hindoo—Muslim—Christian etc. OR being Kshatriy—Brahamin—Yaadav etc. Or being Bengalee—Tamil—-Punjabee—Marathi/Gujrati etc. because these identities are too dwarf, tiny and without any value vis-a-vis ours BHAARATEEY stature and identity”.

  1. ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ अपने नाम के सन्देशानुसार अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) को उनकी सम्वैधानिक ताक़त का एहसास कराने उनके दरम्यान आया है । ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) से कहता है कि आप में अपरम्पार सम्वैधानिक शक्ति है । ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) को स्पष्ट करता है कि भारतीय सम्विधान ने आपके हाथों में मताधिकार का हथियार देकर उसने आपको इस मुल्क़ भारत की सम्प्रभु शक्ति की मान्यता दे दी है । इसके अलावा, ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ आगे कहता है कि भारतीय सम्विधान की नज़रों में अपने मुल्क़ भारत में भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) को, व्यक्तिगत एवम् सामुहिक दोनों रूप में, अंतिम शक्ति के रूप में असीमित शक्ति प्रदान की गयी है ।

सम्प्रभु शक्ति/असीमित शक्ति को महसूस करने व एहसास करने के वास्ते बरती जाने वाली सावधानी/ऐतिहात के विषय में ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) के समक्ष ख़ुलासा करता है कि “ जब तक आप अपने को हिन्दू-हिन्दू महसूस करेंगे, एहसास करेंगे, बोलेंगे/कहेंगे, बल देंगे तब तक ये ताक़तें आप के पास नहीं आ सकतीं ;  जब तक आप अपने को मुस्लिम-मुस्लिम  महसूस करेंगे, एहसास करेंगे, बोलेंगे/कहेंगे, बल देंगे तब तक ये ताक़तें आप के पास नहीं आ सकतीं ; जब तक आप अपने को इसाई-इसाई महसूस करेंगे, एहसास करेंगे, बोलेंगे/कहेंगे, बल देंगे तब तक ये ताक़तें आप के पास नहीं आ सकतीं——–आदि; जब तक आप अपने को क्षत्रिय-क्षत्रिय महसूस करेंगे, एहसास करेंगे, बोलेंगे/कहेंगे, बल देंगे तब तक ये ताक़तें आप के पास नहीं आ सकतीं ; जब तक आप अपने को ब्राह्मण-ब्राह्मण महसूस करेंगे, एहसास करेंगे, बोलेंगे/कहेंगे, बल देंगे तब तक ये ताक़तें आप के पास नहीं आ सकतीं ; जब तक आप अपने को यादव-यादव महसूस करेंगे, एहसास करेंगे, बोलेंगे/कहेंगे, बल देंगे तब तक ये ताक़तें आप के पास नहीं आ सकतीं———-आदि ; जब तक आप अपने को बंगाली-बंगाली महसूस करेंगे, एहसास करेंगे, बोलेंगे/कहेंगे, बल देंगे तब तक ये ताक़तें आप के पास नहीं आ सकतीं ; जब तक आप अपने को तमिल-तमिल महसूस करेंगे, एहसास करेंगे, बोलेंगे/कहेंगे, बल देंगे तब तक ये ताक़तें आप के पास नहीं आ सकतीं ; जब तक आप अपने को पंजाबी-पंजाबी महसूस करेंगे, एहसास करेंगे, बोलेंगे/कहेंगे, बल देंगे तब तक ये ताक़तें आप के पास नहीं आ सकतीं———आदि” ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) से अर्ज़ के साथ यह समझाता है कि आपकी ये शक्तियाँ आपके पास तभी आ सकतीं हैं जब आप अपने को सिर्फ़ व सिर्फ़ भारतीय महसूस करेंगे, एहसास करेंगे, बोलेंगे/कहेंगे, बल देंगे, एहसास करवायेंगे, आचरण/व्यवहार/आदत/संस्कार में लायेंगे ।

‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) से आगे अर्ज़ करता है कि आपकी सामुहिक शक्तियाँ तब आयेंगी जब आप सभी एक साथ होंगे, आपस में एकता लायेंगे । एक साथ आने एवम् आपस में एकता लाने के विषय में ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) को यह यक़ीन दिलाता है कि एक साथ आने एवम् आपस में एकता लाने का एक ही आधार है और वह आधार है ‘भारतीयता’ । भारतीयता ही के आधार पर हम सभी भारतीय भाई-बहन एक साथ हों, भारतीयता ही के आधार पर हम सभी भारतीय भाई-बहन एक हों, भारतीयता ही के आधार पर हम सभी भारतीय भाई-बहन आपसी भाई-चारा लाएँ, भारतीयता ही के आधार पर हम सभी भारतीय भाई-बहन आपसी सहयोग बढ़ायें, भारतीयता ही के आधार पर हम सभी भारतीय भाई-बहन आपसी सम्मान करें, भारतीयता ही के आधार पर हम सभी भारतीय भाई-बहन आपसी एख़लाक़-मुहब्बत बनाएं-बढ़ायें, भारतीयता ही के आधार पर हम सभी भारतीय भाई-बहन आपसी सद्भाव का आदान-प्रदान करें, भारतीयता ही के आधार पर हम सभी भारतीय भाई-बहन आपस में या वैसे भी शान्ति स्थापित करें व लाएँ——अर्थात् ये सभी कुछ भारतीयता आधारित करने पर ही आप सभी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) को सामुहिक शक्ति हासिल होगी—–यही ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ की अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) से गुज़ारिश है ।

  1. ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ in sync. with its name, has come to our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN to make them realise their (constitutional) power. ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ says to our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN that they have immense (Constitutional) Power. ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ clarifies to its BHAARATEEY BHAAI-BAHAN that by providing in their hands the weapon of Franchise (Right to vote), the Indian Constitution has recognised them as Sovereign Power of this country BHAARAT. Apart from this, in the eyes of BHAARATEEY Constitution, BHAARATEEY BHAAI-BAHAN enjoy unlimited power in our Nation BHAARAT, individually and collectively, both, as a final authority. This Sovereign Power and final authority, our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN have to be felt and realised.

But the precaution ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ ueges our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN to take is that “Till you feel yourself, have confidence, utter/say, emphasize as Hindoo-Hindoo, the said power OR authority can’t be realised; till you feel yourself, have confidence, utter/say, emphasize as Muslim-Muslim, the said power OR authority can’t be realised; till you feel yourself, have confidence, utter/say, emphasize as Kshatreey-Kshatreey, the said power OR authority can’t be realised; till you feel yourself, have confidence, utter/say, emphasize as Brahmin-Brahmin, the said power OR authority can’t be realised; till you feel yourself, have confidence, utter/say, emphasize as Bengaalee-Bengaalee, the said power OR authority can’t be realised; till you feel yourself, have confidence, utter/say, emphasize as Tamilian-Tamilian, the said power OR authority can’t be realised; till you feel yourself, have confidence, utter/say, emphasize as Punjaabee-Punjaabee, the said power OR authority can’t be realised; till you feel yourself, have confidence, utter/say, emphasize as Maraathee-Maraathee, the said power OR authority can’t be realised; till you feel yourself, have confidence, utter/say, emphasize as Gujraatee-Gujraatee, the said power OR authority can’t be realised—-etc. ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ urges further to our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN that said power OR authority can be realised by them only when they will feel themselves, have confidence, utter/say, emphasize as BHAARATEEY/BHAARATEEY NAAGARIK (Indian citizen) ONLY and will translate it into their condut-practice-habit-samskaar.

‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ further requests to our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN that said collective power OR collective authority can be realised by them only when they will come together and bring about unity mutually within themselves. ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ clarifies to our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN that the basis for coming together and bringing about unity is BHAARATEEYATAA only. On the basis of BHAARATEEYATAA only, all our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN should come together; on the basis of BHAARATEEYATAA only, all our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN should usher as one; on the basis of BHAARATEEYATAA only, all our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN should bring about mutual fraternity; on the basis of BHAARATEEYATAA only, all our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN should evole and augment Eqhakaaq-Muhabbat (Mutual love and mutual reverence/respect); on the basis of BHAARATEEYATAA only, all our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN should augment mutual co-operation; on the basis of BHAARATEEYATAA only, all our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN should mutually respect; on the basis of BHAARATEEYATAA only, all our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN should exchange mutual goodwill; on the basis of BHAARATEEYATAA only, all our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN should bring about peace within themselves—–that is to say that only after doing all these based on BHAARATEEYATAA, you BHAARATEEY BHAAI-BAHAN may be able to have collective Sovereign Power and collective final authority—-this is the humble request of ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ to our esteened BHAARATEEY AWAAM (BHAARATEEY BHAAI-BAHAN).

  1. बहुत ग़ौर करने का विषय एवम् मसला है कि जहाँ एक ओर ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) को व्यक्तिगत/ज्यातती एवम् सामुहिक तौर पर उनकी अपनी ताक़त का एहसास करवाकर उनको ताक़तवर बनाना चाहता है वहीं दूसरी ओर विघटनकारी ताक़तें, अधिकाँश राजनैतिक दलों के वेश में, उसी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) को जाति के आधार पर बाँट कर कमजोर करना चाहती हैं, सम्प्रदाय के आधार पर बाँट कर कमजोर करना चाहती हैं, धर्म के आधार पर बाँट कर कमजोर करना चाहती हैं, भाषा के आधार पर बाँट कर कमजोर करना चाहती हैं, प्रान्त के आधार पर बाँट कर कमजोर करना चाहती हैं, समूह के आधार पर बाँट कर कमजोर करना चाहती हैं, क्षेत्र के आधार पर बाँट कर कमजोर करना चाहती हैं- – -अदि । इस प्रकार अपने भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) को कमजोर करने में यदि कोई कसर रह भी जाती है तो रुपया/पैसा/बोतल/कम्बल/माँस/मंदिरा आदि द्वारा अपने भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) को क़मजोर से क़मजोर बनाने में ये विघटनकारी ताक़तें, जो अधिकाँश राजनीति दलों के वेश में हैं, सतत सक्रिय हैं । इन विघटनकारी ताक़तों की विशेषता यह है कि अपने भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) को क़मजोर करने में ये विघटनकारी ताक़तें एकजुट हैं, एवम् एक साथ हैं क्योंकि ये शक्तियाँ अच्छी तरह जानती हैं कि अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) अपने मुल्क़ भारत में सम्वैधानिक तौर पर तथा वैसे भी सबसे ताक़तवर सम्प्रभु शक्ति है और इसे कमज़ोर से कमज़ोर किए बग़ैर ये ताक़तें अपने मन्सूबों (वोट-सत्ता हथियाने की साज़िश) में कभी भी क़ामयाब नहीं हो सकतीं । इसी हक़ीक़त के परिप्रेक्ष्य में ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ की अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) को ताक़तवर बनाने की एक इमानदार कोशिश पर गौर करने एवम् उसे अपेक्षित अहमियत बक्शने की गुजारिश करता है ।

 

  1. The subject and the issue worth drawing adequate attention are that where on side, ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ wants as well as tries to make our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN powerful by making themselves realise their own individual as well as collective power, whereas on the other, divisive forces, mosly in the guise of political parties, want to make our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN weak by dividing them on caste basis; want to make our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN weak by dividing them on communal basis; want to make our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN weak by dividing them on religion basis; want to make our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN weak by dividing them on language basis; want to make our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN weak by dividing them on province basis; want to make our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN weak by dividing them on group basis; want to make our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN weak by dividing them on region basis- – -etc. In making our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN weaker and weaker by these divisive forces, mosly in the guise of political parties, if anything is felt left undone, as per their estimate and calculation, they try to further weaken our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN through the brazen means of shameless distribution of money/paisa/bottle/blanket/meat/wine during elections. The characteristic feature about these divisive forces is that they stand united and are together in dividing and making our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN the weakest. These divisive forces are fully conscious that in our country BHAARAT our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN are the most powerful Sovereign Power as per the Constitutional arrangement OR otherwise also and without making our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN the weakest, they can’t succeed in fulfilling their motives of grabbing votes and power.

Against the backdrop of aforesaid fact, ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ requests to our BHAARATEEY AWAAM (BHAARATEEY BHAAI-BAHAN) to look with attention and appreciate towards its honest effort in making our BHAARATEEY BHAAI-BAHAN the MOST POWERFUL AND THEREBY THE MOST RESPECTABLE.

राष्ट्रभक्त शिरोमणि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस जिंदाबाद । शहीदे आज़म भगत सिंह जिंदाबाद । डा. बी. आर. अम्बेदकर जिंदाबाद । अमर शहीद चन्द्र शेखर आज़ाद, अशफ़ाक़ुल्लाह, खुदी राम बोस, सुब्रमण्यम भारती, रानी गैडेल्यू आदि जिंदाबाद ।

जय हिन्द                                                                             जय भारत

भारतीय एकता अमर रहे            राष्ट्रभक्ति अमर रहे                        भारतीय गणतन्त्र अमर रहे

MAY LIVE LONG RAASHTRABHAKT SHIROMANI (Torch Bearer Legend of Patriots) NETAA JEE SUBHAASH CHANDRA BOSE and SHAHEEDE AAZAM (Chief of Patriots) BHAGAT SINGH. MAY LIVE LONG Dr AMBEDKAR.  MAY LIVE LONG IMMORTAL MARTYERS LIKE CHANDRA SHEKHAR AAZAAD, ASHAFAAQ-UL-LAAH, KHUDEERAAM BOSE, SUBRAMANYAM BHAARATEE, RAANEE GAIDELIEU.

JAI HIND                                                                                                                                                                        JAI BHAARAT

                                                MAY LIVE LONG BHAARATEEY EKATAA (Indian Unity)

                                                 MAY LIVE LONG RAASHTRABHAKTI (Allegiance to the nation)

                                                 MAY LIVE LONG   BHAARATEEY GANATANTRA (Indian Republic)

राष्ट्रभक्त शिरोमणि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जिंदाबाद । शहीदे आज़म भगत  सिंह  जिंदाबाद ।  डा. बी. आर.  अम्बेदकर जिंदाबाद ।  अमर शहीद  चन्द्र शेखर आज़ाद,  अशफ़ाक़ुल्लाह,  खुदीराम बोस, सुब्रमण्यम भारती, रानी गैडेल्यू आदि जिन्दाबाद ।

               जय हिन्द                                                                                                                             जय भारत

 

                      भारतीय एकता अमर रहे                     राष्ट्रभक्ति अमर रहे                भारतीय गणतन्त्र अमर रहे

MAY LIVE LONG RAASHTRABHAKT SHIROMANI (Torch Bearer Legend of Patriots) NETAA JEE SUBHAASH CHANDRA BOSE and SHAHEEDE AAZAM (Chief of Patriots) BHAGAT SINGH. MAY LIVE LONG Dr B.R. AMBEDKAR MAY LIVE LONG IMMORTAL MARTYERS LIKE CHANDRA SHEKHAR AAZAAD, ASHAFAAQ-UL-LAAH, KHUDEERAAM BOSE, SUBRAMANYAM BHAARATEE, RAANEE GAIDELIEU.

JAIHIND                                                                                                                             JAI BHAARAT

                               MAY LIVE LONG BHAARATEEY EKATAA (Indian Unity)

                              MAY LIVE LONG RAASHTRABHAKTI (Allegiance to the nation)

                              MAY LIVE LONG   BHAARATEEY GANATANTRA (Indian Republic)