‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ के कतिपय 12 विचारों का सार संग्रह

Summary of the few 12 thoughts of ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’

  1. हम भारतीय हैं, शुरू से आख़िर तक और हमेशा । इसके अलावा हमारा न तो कोई वज़ूद है और न ही कोई पहचान ।
  2. We are BHAARATEEY (Indian) from beginning to end and always. Apart from this, we have neither any existence nor any identity.
  3. हमारे हिन्दू, मुस्लिम, इसाई——आदि ; क्षत्रिय, ब्राह्मण, यादव——आदि ; बंगाली, तमिल, पंजाबी——इत्यादि होने पर गर्व करने का सवाल ही नहीं क्योंकि हमारे भारतीय कद/पहचान के सामने ये सभी बहुत ही तुच्छ एवम् बौने हैं ।
  4. There is no question of taking pride in being Hindoo, Muslim, Christian——etc. ; Kshatriy, Brahmin, Yaadav—–etc. ; Bengaalee, Tamil, Panjaabee——-etc. as all these are of no value and are dwarf vis-à-vis our BHAARATEEY (Indian) stature/identity.
  5. अमर एवम् राष्ट्रभक्ति के ऐतिहासिक स्रोत शहीदों (नेता जी सुभाष चन्द्र बोस, सरदार भगत सिंह——अशफ़ाक़-उल-लाह खां इत्यादि) की कुर्बानी एवम् शहादत के पैग़ाम स्वरुप तथा डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, बाबा साहेब डॉ. भीम राव अम्बेदकर आदि महापुरुषों के द्वारा निर्मित भारतीय सम्विधान के निर्देशानुसार हम सभी भारतवासी समान एवम् एक हैं क्योंकि हम सभी भारतीय {भारतीय नागरिक (Indian Citizen) } हैं ।
  6. As per the message of sacrifices and martyrdom of immortal and legends of patriotism like Raashtra-Bhakt Shiromani (Torch bearer legend of patriotism) Netaa Jee Subhaash Chandra Bose, Shaheede Aazam (Chief of martyres) Bhagat Singh etc. and the the mandate of the BHAARATEEY Constitution made by the great personalities like Dr Rajendra Prasaad, Dr B.R. Ambedkar etc., we all country fellowmen are one and equal as we all are BHAARATEEY (BHAARATEEY NAAGARIK)(Indian citizen) in this Nation BHAARAT.
  7. हमारी भारतीयता सिर्फ़ विचारों तक ही सीमित नहीं रहेगी, उसे आचरण एवम् वाणी में भी लाकर मनसा-वाचा-कर्मणा का पालन करते हुए ‘भारतीयता’ को कृत्रिमता/दिखावा/पाखण्ड/उपहास/व्यंग/कटाक्ष आदि के दलदल से बाहर निकालकर व्यवहार/आदत/संस्कार/स्वभाव की सीमा तक लाना होगा । हमारी एकता भारतीयता पर ही आधारित होगी, आपसी भाई-चारा, आपसी सम्मान, आपसी सद्भाव, आपसी एख़लाक़-मुहब्बत, शान्ति सभी कुछ भारतीयता ही पर आधारित होगा । अर्थात् भारतीय एकता की अवधारणा में जाति/सम्प्रदाय/धर्म/भाषा/प्रान्त/समूह/क्षेत्र आदि संकीर्णताओं पर आधारित एकता/भाई-चारा इत्यादि का कोई स्थान नहीं है ।
  8. Our BHAARATEEYATAA will not remain cofined to the concept only. By taking it to conduct and toungue/speech, following the MANASAA-WAACHAA-KARMANAA (by heart, by speech, by practice) doctrine and by taking it out of the quagmire of superficiality/show/hypocrisy/derision/sarcasm/taunt etc., BHAARATEEYATAA will have to be imbibed/assimilated as our conduct/habit/samskaar/nature. Ours unity will be BHAARATEEYATAA based only. Mutual fraternity, mutual respect, mutual goodwill, mutual co-operation, mutual Eqhalaaq-Muhabbat (mutual love and reverence/respect), peace (mutual or otherwise)—-everything will be BHAARATEEYATAA based only. That is to say that in the concept of BHAARATEEY EKATAA (Indian unity), there is no place for unity and fraternity etc. formed on the parochialism of caste/community/religion/language/province/region/group etc.
  9. हम भारतीय भाई-बहनों को अच्छी तरह समझ लेना होगा कि जो तत्व/राजनेता/दल/संगठन आदि जाति/सम्प्रदाय/धर्म/प्रान्त/समूह/क्षेत्र इत्यादि संकीर्णताओं पर आधारित एकता संचालित करते हैं या/और समाज में भेद-भाव/तनाव पैदा करते हैं या/और एक दूसरे जाति/सम्प्रदाय/धर्म/प्रान्त/समूह/क्षेत्र इत्यादि के ख़िलाफ़ ज़हर उगलते हैं या/और इन्हीं गतिविधियों द्वारा वोट-सत्ता की स्वार्थ-नीति (राजनीति) चलाते हैं—–वे विघटनकारी ताक़तें हैं । अतः ये ताक़तें हम सभी भारतीय भाई-बहनों की, भारतीय समाज की एवम् भारत देश की सबसे बड़ी दुश्मन हैं और इनकी ये गतिविधियाँ विघटनकारी ही नहीं, ग़ैर क़ानूनी व असंवैधानिक भी हैं । इन तत्वों/राजनेताओं/दलों/संगठनों से भारतीयता के आधार पर संगठित होकर निपटना होगा—-कम से कम इतना तो करना ही होगा कि व्यक्तिगत स्वार्थ त्यागते हुए इनको चुनावी सत्ता में जाने से रोका तो अवश्य ही जाय ।
  10. We will have to understand it clearly that elements/political leaders/political parties/organizations who conduct unity on caste-community-language etc. based parochials, create differences/discriminations/fissures-tension, spew venom on the people of other caste-community-language-province etc. and carry out their selfish policy (politics) of vote-power through their these activities are actually the divisive forces of the country. Therefore, they (such elements/political leaders/political parties/ organizations) are the big enemy of all we BHAARATEEY BHAAI-BAHAN (brothers and sisters of India), BHAARATEEY society and the Nation BHAARAT and their these activities are not only divisionary but unlawful and unconstitutional also. We will have to deal with them having been ourselves organized on the basis of BHAARATEEYATAA—-at least it will have to be ensured that they are prevented from accessing to power (through elections) by our united action leaving our personal (self) interest aside.
  11. जातिगत जत्थे जैसे अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा, अखिल भारतीय वैश्य महासभा———आदि ; सम्प्रदायगत जत्थे जैसे विश्व हिन्दू परिषद्, ऑल इण्डिया मुस्लिम मज़लिस, अखिल भारतीय सिक्ख महासभा——आदि ; भाषा/प्रान्तगत जत्थे जैसे अखिल भारतीय बंगाली महासभा, अखिल भारतीय तमिल संगम, अखिल भारतीय पंजाबी महासभा———-इत्यादि सरीखे संगठन भारतीय एकता के मार्ग की सबसे बड़ी रूकावटों में से कुछ हैं जिन्हें निष्क्रिय/निष्प्रभावी बनाते हुए अन्ततोगत्वा समूल समाप्त करना ही होगा ।
  12. Casteist ghettoes like “AKHIL BHAARATEEY KSHATRIY MAHASABHAA, AKHIL BHAARATEEY BRAAHMIN MAHAASABHAA, AKHIL BHAARATEEY WAISHYA MAHAASABHAA——etc.” ; communal ghettoes like “WISHWA HINDOO PARISHAD, ALL INDIA MUSLIM MAZALIS, AKHIL BHAARATEEY SIKKH MAHAASABHAA————etc.” ; provincial (linguistic) ghettoes like “AKHIL BHAARATEEY BENGAALEE MAHAASABHAA, AKHIL BHAARATEEY TAMIL SANGAM, AKHIL BHAARATEEY PANJAABEE MAHAASABHAA———-etc.” are few of the biggest stumbling block for BHAARATEEY unity which are required to be eventually ended by making them successively ineffective.
  13. हमारा सामुहिक धर्म हिन्दू/हिंदुत्व, इस्लाम, सिक्ख——नहीं है, ये तो मात्र तथाकथित धार्मिक आस्थाएँ हैं जो शुद्धतः व्यक्तिगत हैं जिसपर किसी दूसरे या किसी अन्य धर्मास्थावाले को टीका-टिप्पड़ी, कटाक्ष, आहत, नीचा दिखाने आदि का बिल्कुल अधिकार नहीं है । हमारा सामुहिक धर्म यानी ज़माते-फ़र्ज़ तो सिर्फ़ राष्ट्रधर्म यानी फ़र्जे-मुल्क़ अर्थात् अपने देशवासियों एवम् देश के विषय में चिन्तन करना है ।

    इसी प्रकार हमारा जीवन/व्यवहार व्यक्तिगत रूप से किसी भी आस्था (हिन्दू/इस्लाम/सिक्ख—–आदि) से देशित/निर्देशित हो सकता है पर हमारा सामुहिक/सामाजिक जीवन/व्यवहार भारतीय एवम् राष्ट्रीय ही होगा ।

    दुसरे शब्दों में, अपनी व्यक्तिगत आस्था के अनुसरण अनुसार अपने घर/चार दिवारी के अन्दर पूजा/अर्पण/इबादत/शिज़दा—–आदि, जो भी पसन्द हो, कर सकते हैं पर अपनी चौखट/चार दिवारी के बाहर कदम रखते ही हमारा जीवन भारतीय/राष्ट्रीय हो जायगा जिसमें सिर्फ़ राष्ट्रधर्म ही निभाना होगा ।

  1. Hindoo/Hindutwa, Islam, Sikkh——–etc. are not our COLLECTIVE religion. These are merely so called religious convictions which are purely PERSONAL on which no other person nor any other faith holder has any right to any of the acts—comment, derision, casting sarcasm/satire, hurt sentimentally, demean etc.. Our COLLECTIVE religion or COLLECTIVE duty is RAASHTRA DHARM (duty to the nation) i.e. Farze-Mulq, that is, to have concern about only our fellow countrymen and Nation BHAARAT.

    Likewise, our personal lives/practice/conduct may be guided by individual religious convictions as Hindoo, Islaam, Christianity, Sikkhism etc. but our collectve lives/conduct/practices will be BHAARATEEY and National only.

    In other words, within our house, our four walls, we may perform any one or more of the practices such as worship, ARCHANAA (adoration), paying NAMAAZ, SHIZDAA (bowing before Almighty) as we prefer according to individual religious convictions and accomplish/perform other similar practices. But when we step out of our house or four walls, ours lives/conduct will be BHAARATEEY/National only wherein the RAASHTRA DHARM or FARZE-MULQ (National Obligation) only will have to be discharged.

  1. हम उपरोक्त वर्णित अमर एवम् राष्ट्रभक्ति के ऐतिहासिक स्रोत शहीदों की कुर्बानी एवम् शहादत के पैग़ाम से प्रेरणा लेते हुए एकता की ‘अनेकता में एकता’ जैसी अवधारणा/परिभाषा को एकता की प्रदूषित, ख़तरनाक़ एवम् ख़ुराफ़ाती अवधारणा/परिभाषा मानते हैं । अतः, एकता की ‘अनेकता में एकता’ परिभाषा/अवधारण . को सिरे से ख़ारिज़ करते हुए हम अपने भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) की (आपस में) एकता की ‘सूक्ष्म/परम (Absolute)’ अवधारणा/परिभाषा पर क़ायम हैं ।

 अर्थात्, हमारी भारतीय एकता एक मुस्त, एक ही (Monolithic/Monoblock) है जो हमारे मुल्क की मुख्तलिफ़ भौगोलिक परिस्थितियों में प्रकट (Manifest) होती है । इस प्रकार हमारी एक मुस्त (Monolithic/Monoblock) भारतीय एकता हमारे राष्ट्र भारत के विभिन्न भागों में अपना रूप, वेश बदलती है जो कभी भी एवम् कदापि “अनेकता में एकता” नहीं है । हमारे मुल्क़ का भौगोलिक विस्तार (Geographical Stretch) बहुत बड़ा है जो गुजरात के कच्छ से लेकर मणिपुर के मोरंग (म्यानमार/वर्मा की सीमा से लगा हुआ आख़िरी स्टेशन) तक एवम् कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैला हुआ है और हर 10-15 किलो मीटर पर अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) में कुछ भाषा, पोशाक़ एवम् खान-पान पसन्द का फर्क़ दृष्टिगोचर होता है।

  1. Taking inspiration from the message of sacrifices and martyrdom of immortal and legends of patriotiots as delineated above, we consider “Unity in Diversity” concept/definition of Unity among our Indian brothers and sisters as perverted/polluted, nefarious and mischievous. Therefore, dismissing “Unity in Diversity” definition/concept of unity ab-initio, we maintain “ABSOLUTE UNITY” as the concept of unity among our BHAARATEEY AWAAM (BHAARATEEY BHAAI-BAHAN) (Indian brothers and sisters).

       Ours unity is only one “MONOLITHIC/MONOBLOCK” which manifests in various forms and guises as per the respective geo-social circumstances in different parts of our Nation BHAARAT. Thus ours “MONOLITHIC/MONOBLOCK” BHAARATEEY unity changes its forms, appearances and guises in various parts our NATION BHAARAT and is NEVER, NEVER and NEVER “Unity in Diversity”. The geographical stretch our Nation BHAARAT is too large. It extends from KUCHCHH of GUJRAT to MOREING, the last station meeting with Myaanmaar (Varma), of MANIPUR and from KASHMIR to KANYAAKUMAAREE. At every 10 to 15 KM, the change of some dialect, some dress/costume, some predilections of food etc. in our BHAARATEEY AWAAM (BHAARATEEY BHAAI-BAHAN) (Indian brothers and sisters) is perceptible as per the change of geo-social circumstances.

  1. हमें याद रखना होगा एवम् सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी एकता, विशेषकर हमारी भारतीय एकता, के दो बड़े शत्रु : 1. भेद-भाव एवम् 2. शोषण । इनके किसी भी कारक/भावना/अवधारणा से दूरी ही नहीं बनाना अपितु उसे समाप्त करना होगा क्योंकि एक भारतीय भाई-बहन या उसका समूह दूसरे भारतीय भाई-बहन या उसके समूह से भेद-भाव (छोटा-बड़ा, ऊँच-नीच की भावना रखना या व्यवहार करना) करता रहे या/और उसका शोषण करता रहे तो इन परिस्थितियों में भारतीय एकता की कल्पना भी सम्भव नहीं है ।
  2. WE must remember (be conscious) and accordingly ensure that for any type of unity, particularly for BHAARATEEY Unity, there are its two big enemies : 1. Discrimination, and 2. Exploitation. Instead of merely maintaining a distance from it, its any type of cause/thought (feeling)/concept will necessarily have to be eradicated and finished. Because in a situation, wherein one BHAARATEEY BHAAI-BAHAN or its group conducts a discriminatory (harbouring inferior-superior, higher-lower feeling and behave accordingly) behavior with and/or exploit the other BHAARATEEY BHAAI-BAHAN or its group, even imagination of BHAARATEEY Unity is not possible.
  3. हमें इस कड़वी हक़ीक़त को कभी भी नहीं भूलना चाहिए कि अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) विशेषकर, आम एवम ग़रीब/असहाय/दिहाड़ी (दैनिक आमदनी पर निर्भर रहने वाले जैसे रेड़ी-पटरी वाले, रिक्से वाले, छोटे-छोटे कारीगर आदि) मज़दूर/विपन्न/क़तार का आख़िरी व्यक्ति एवम् देश की तक़लीफ़ की जड़ में भ्रष्ट/अपराधी/तिकड़मी व जनता से झूठ पर झूठ वादा करने में माहिर नेताओं एवम् उनके दल नहीं हैं बल्कि हम सभी भारतीय भाई-बहन हैं जो जातिवाद/साम्प्रदायिकता/भाषावाद/प्रान्तवाद/समूहवाद/क्षेत्रवाद आदि कई विकारों एवम विकृतियों में बिखरे हुए हैं, बंटे हुए हैं, वैसा अनुभव करते हैं, व्यवहार करते हैं, इन्हीं संकीर्णताओं पर आधारित एकता/जत्थे बनाते/बनवाते हैं ।

      इसी बिखराव एवम् भारतीय एकता के अभाव के चलते हम अंग्रेजों  के ग़ुलाम हुए थे और आज आज़ादी मिलने पर भी इन्हीं की वज़ह से ही हम भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) विशेषकर, आम एवम ग़रीब/असहाय/ दिहाड़ी (दैनिक आमदनी पर निर्भर रहने वाले जैसे रेड़ी-पटरी वाले, रिक्से वाले, छोटे-छोटे कारीगर आदि) मज़दूर/ विपन्न/क़तार का आख़िरी व्यक्ति, अंग्रेज़ों वाली ग़ुलामी से भी बदतर दोज़ख़ झेलने को मज़बूर हैं ।

सबसे दुखद बात यह है कि चुनाव (आम/संसदीय, विधानसभा, पंचायात/स्थानीय निकाय यहाँ तक कि संगठनों के भी) जैसे राष्ट्रीय एवम अहम मौक़ों पर भी हम भारतीय भाई-बहन, बहुत थोड़े से अपवादों को छोड़कर, अपने नागरिक फर्ज़ निभाने के बजाय इन्हीं जातिवाद/साम्प्रदायिकता/भाषावाद/प्रान्तवाद/समूहवाद/क्षेत्रवाद आदि बुराइयों में ही अपने व्यक्तिगत स्वार्थ साधते हैं और यहाँ तक कि प्रलोभन/लालच (रुपया/पैसा/बोतल/कंबल/मांस-मंदिरा/वादा (ठीका मिलने का, थाने से बसें छुड़वाने का, ग़लत-सलत/भ्रष्ट काम करवाने/दिलवाने आदि का)) के वशीभूत होकर समाज के ऐसे सबसे गंदे तत्वों, कुछ अपवादों को छोड़कर, जिन्हें भारतीय समाज यदि जागरूक हो तो समाज और देश के बाहर कर दिया जाय एवम यदि देश का क़ानून निष्पक्षता व सख़्ती से काम करे तो जेल की सलाख़ों के पीछे कर दिया जाय, को चुनकर सदन/सत्ता में भेज देते हैं । इस हक़ीक़त को इमानदारी/साफ़गोई से क़बूलना ही होगा तभी ‘अच्छे दिन’ की शुरुआत का रास्ता बनेगा ।

  1. We must never be oblivion of the bitter fact that genesis of the woeful situation, as of common knowledge, does not lie with crook (corrupt-criminal-manipulator-expert in making false promises with public etc.) political leaders and their political parties but solely lies with the people—Bhaarateey Bhaai-Bahan themselves who, barring very few exceptions, being deeply entrenched in the maladies/evils of casteism/ communalism / religion / provincialism/l inguisticism / regionalism/groupism etc., stand divided being disunited, feel accordingly, conduct accordingly, form unity and associations based on these parochials of caste——etc.

      Because of this very state of affairs of we BHAARATEEY BHAAI-BAHAN being fragmented and disunited, we fell prey to slavery by English and today, even after independence, we BHAARATEEY AWAAM (Bhaarateey Bhaai-Bahan) especially in them the poor/daily earning labourers/rikshaw pullers/street sellers/destitute/indigent/ poor without any support of livelihood/poor at the last rung of the social ladder are helpless but to suffer the hell like lives even worse than those of the period of slavery by English.

The most tragic aspect of this fact is that at the time of national and important occasions of elections (General/ Parliamentary, Assembly, Panchaayat/Local Bodies etc. even of unions/associations of various groups and trades ) we Bhaarateey Bhaai-Bahan, barring very few exceptions, instead of discharging their citizenry duty, settle our selfish ends in these maladies/evils of casteism/communalism/religion/provincialism/linguisticism/ regionalism/groupism etc. and even being captive of our own greed (money/paisa/bottle(of wine)/blanket/meat-wine/selfish promises of (contract, manage to get released of seized buses, arranging immoral/corrupt jobs etc. ) we elect and send into power such persons, by and large the most scum of our society, barring very few exceptions, who deserve to be thrown out of Bharateey society and the territory of BHAARAT if its people are conscious (of their duties as citizen of this country ) and to be put behind bar if the law of the land (BHAARAT ) is complied with impartiality and strictness. This bitter fact must have to be accepted with full sincerity, honesty and clarity. Only then the beginning of way/possibility of “Achchhe Din (Good Days)” can be made.

  1. “ लोगों को सरकार वैसी ही मिलाती है जिसके वे पात्र होते हैं”—की सच्चाई/यथार्थ को समझना होगा, बग़ैर किसी आना-कानी के व बगली झाँके हुए क़बूल करना ही होगा क्योंकि तभी अपनी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) विशेषकर, आम एवम ग़रीब/असहाय/दिहाड़ी (दैनिक आमदनी पर निर्भर रहने वाले जैसे रेड़ी-पटरी वाले, रिक्से वाले, छोटे-छोटे कारीगर आदि) मज़दूर/विपन्न/क़तार का आख़िरी व्यक्ति के नारकीय जीवन एवम् मुल्क़ की तक़लीफ़ के अन्त की शुरुआत मुमक़िन है ।

      हमारी अपनी इसी पात्रता (इमानदार अल्फाज़ों में ‘कुपात्रता’) ही के कारण जहाँ एक ओर, हम भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) विशेषकर, आम एवम ग़रीब/असहाय/दिहाड़ी (दैनिक आमदनी पर निर्भर रहने वाले जैसे रेड़ी-पटरी वाले, रिक्से वाले, छोटे-छोटे कारीगर आदि) मज़दूर/विपन्न/क़तार का आख़िरी व्यक्ति इन्हीं {भ्रष्ट/अपराधी/तिकड़मी व जनता से झूठ पर झूठ वादा करने में माहिर नेताओं एवम् उनके दलों } के द्द्वारा पैदा किये गए अंग्रेज़ों वाली ग़ुलामी से भी बदतर दोज़ख़ को झेलने की मज़बूरी को आमन्त्रित करते हैं, वहीं दूसरी ओर इन भ्रष्ट/अपराधी/तिकड़मी व जनता से झूठ पर झूठ वादा करने में माहिर नेताओं एवम् उनके दलों को आक्सीजन/ताक़त दे रहे है और इन्हें सत्ता में चुन-भेजकर इन्हें ही ज़न्नत की सहूलियतें नसीब कराते हैं ।

       हमारी अपनी पात्रता (इमानदार अल्फाज़ों में ‘कुपात्रता’) के ही कारण पैदा विचित्र नज़ारे, जिसमें आम भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहन) के लिए अंग्रेजों वाली ग़ुलामी से बदतर दोज़ख़ तथा भ्रष्ट/अपराधी/तिकड़मी व जनता से झूठ पर झूठ वादा करने में माहिर नेताओं एवम् उनके दलों को ज़न्नत की सहूलियतें नसीब होतीं हैं, की पृष्ठभूमि में इस विडम्बना के कड़वी हक़ीक़त को हमें कदापि नहीं भूलना चाहिए कि मताधिकार का अमोघ हथियार तो अपने पास है ।

      कहने का तात्पर्य यह कि वर्तमान स्थिति के लिए सिर्फ़ व सिर्फ़ हम एवम् हमारी पात्रता जिम्मेदार है । इस हक़ीक़त (या दुःखदाई स्थिति) कि हमारी भारतीय अवाम (भारतीय भाई-बहनों) में इस एहसास का अभाव कि “वर्तमान स्थिति के लिए सिर्फ़ व सिर्फ़ हम एवम् हमारी पात्रता जिम्मेदार है” की वज़ह से हालात की गम्भीरता एवम् जटिलता कई गुना बढ़ जाती हैं ।

  1. We BHAARATEEY AWAAM (Bhaarateey Bhaai-Bahan) especially in them the poor/daily earning labourers/rikshaw pullers/street sellers/destitute/indigent/ poor without any support of livelihood/poor at the last rung of the social ladder wll have to understand and conceive the fact conveyed through the saying, “People get the government they deserve” and candidly accept and admit the same withot putting any alibis of this and that and without placing any pretext or bogey. Only then, the beginning of end of hell like lives of we poor and destitute etc. BHAARATEEY AWAAM (BHAARATEEY BHAAI-BAHAN) and the pathetic situation in our Nation BHAARAT can be made possible.

      It is only because of this laxity in deserving ability or KUPAATRATAA (in honest terms) of we BHAARATEEY AWAAM in electing our own govt., where on one side, we BHAARATEEY AWAAM (Bhaarateey Bhaai-Bahan) especially in them the poor/daily earning labourers/rikshaw pullers/street sellers/destitute/indigent/ poor without any support of livelihood/poor at the last rung of the social ladder invite the helplessness in suffering the hell like lives even worse than those of the period of slavery by English, whereas on the other, we supply the oxygen and strength to the crook (corrupt-criminal-manipulator-expert in making false promises with public etc.) political leaders and their political parties and make available the heavenly facilities by electing them to power.

      Against the backdrop of scenario, created by this laxity in deserving ability or KUPAATRATAA (in honest terms) of we BHAARATEEY AWAAM in electing our own govt., we must not forget the fact of the IRONY that the invincible weapon of franchise (right to vote) is with us only.

      The whole thing is that for the prevaing situation in our Nation BHAARAT, we BHAARATEEY AWAAM (Bhaarateey Bhaai-Bahan) especially in them the poor/daily earning labourers/rikshaw pullers/street sellers/destitute/indigent/ poor without any support of livelihood/poor at the last rung of the social ladder and their laxity in deserving ability or KUPAATRATAA are squarely and eventually responsible. The near absence of a candid admission of this fact (or responsibility) among we BHAARATEEY AWAAM aggravates the complexity and intricacy of the problem.

  1. अपनी पात्रता को दुरुस्त करने के दो ही उपाय :- 1. अपनी वास्तविक/सम्वैधानिक वज़ूद/पहचान भारतीयता को वापस लाकर (जातीय/साम्प्रदायिक/भाषाई/प्रान्तीय/क्षेत्रीय/सामुहिक इत्यादि कृत्रिम पहचान को सर्वथा एवं सदैव के लिए तिलांजलि देते हुए) भारतीयता आधारित एकता, आपसी भाई-चारा, आपसी सम्मान/सद्भाव, आपसी एख़लाक़-मुहब्बत, शान्ति आदि स्थापित करना, और 2. इसी भारतीय एकता, भाई-चारा—–इत्यादि के आधार पर पात्र लोगों जो अल्फाज़ों में नहीं , सच्चे मायनों में राष्ट्रभक्त (जो प्रत्येक भारतीय भाई-बहन से सामान रूप से प्रेम करता हो, उनका सम्मान करता हो एवम् उनकी सुख-सुविधाओं का चिंतन करता हो)-समर्पित-कर्तव्यनिष्ठ (कम से कम बोलकर अधिक से अधिक काम करके दिखाए अर्थात उसके काम ही उसकी ज़ुबान बने)-चरित्रवान (पैसा/रुपया/लालच/भ्रष्टाचार आदि बुराइयों को दूर रखने की तथा स्वयम् इन बुराइयों से दूर रहने की पर्याप्त क्षमता वाला) (कम से कम चार गुण वाले) को व्यक्तिगत स्वार्थ (जाति/सम्प्रदाय/भाषा/प्रान्त/समूह/ क्षेत्र/रिस्तेदारी/परिचय आदि) एवम् प्रलोभन (रुपया/पैसा/रिश्वत/बोतल/कम्बल/माँस-मंदिरा/थानों से बसें छुड़वाने एवम् अनैतिक/भ्रष्ट काम दिलवाने आदि का वादे) को त्यागते हुए चुनकर सत्ता में भेजने का भारतीय नागरिक फ़र्ज़ निभाना ।

      तभी जाकर उन प्रतिनिधियों से उसी ज़ज़्बे में भारतीय नागरिक की भांति सेवा एवम् सम्मान मिलना मुमकिन होगा तथा इस नारकीय स्थिति का शनैः-शनैः निराकरण होगा ।

  1. There are two ways for our BHAARATEEY AWAAM to correct our deserving ability to elect our own govt. :- 1. To establish the BHAARATEEYATAA based mutual unity, mutual fraternity, mutual co-operation, mutual respect, mutual goodwill, mutual or otherwise peace etc. by restoring back our real and constitutional existence/identity BHAARATEEY (leaving the superficial identities of cste, community, language/province, region/group etc. for ever). 2. To elect-send (to Legislature/Governance) the deserving people, i.e. who are RAASHTRA BHAKT (who loves and respect each of our BHAARATEEY AWAAM (BHAARATEEY BHAAI-BAHAN (brothers and sisters of India) and have concern about their well being and facilities equally), SAMARPIT (dedicated), KARTAWYANISHTH (dutiful i.e. he delivers too much by speaking the least, that is, his actions themselves speak more than his words) and CHARITRAWAAN (man of character i.e. he has the capability to keep the evils of greed of money/corruption etc. away from himself as well as to keep himself away from these evils)—-at least these 04 virtues/traits, not in words or not for hearsake but as de-facto, by discharging our citizenry duty and not settling our selfish ends in the maladies/evils of casteism/ communalism/ religion/ provincialism/ linguisticism/ regionalism/ groupism etc. and without being captive of our own greed (money/paisa/bottle(of wine)/blanket/meat-wine/selfish promises of (contract, manage to get released of seized buses, arranging immoral/corrupt jobs etc.).

      Then only, citizenry honour and service to our BHAARATEEY AWAAM (BHAARATEEY BHAAI-BAHAN) (brothers and sisters of India) from our representatives in the same spirit/passion of RAASHTRABHAKTI-SAMARPAN-KARTAWYANISHTHAA and CHARITRA could be possible and there will be gradual mitigation of hell like lives {of Bhaarateey Bhaai-Bahan especially in them the poor/daily earning labourers/rikshaw pullers/street sellers/destitute/indigent/poor without any support of livelihood/poor at the last rung of the social ladder}.

राष्ट्रभक्त शिरोमणि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस जिंदाबाद । शहीदे आज़म भगत सिंह जिंदाबाद । डा. बी. आर. अम्बेदकर जिंदाबाद । अमर शहीद चन्द्र शेखर आज़ाद, अशफ़ाक़ुल्लाह, खुदी राम बोस, सुब्रमण्यम भारती, रानी गैडेल्यू आदि जिंदाबाद ।

                                                     जय हिन्द                                                                             जय भारत

                                भारतीय एकता अमर रहे            राष्ट्रभक्ति अमर रहे                        भारतीय गणतन्त्र अमर रहे

MAY LIVE LONG RAASHTRABHAKT SHIROMANI (Torch Bearer Legend of Patriots) NETAA JEE SUBHAASH CHANDRA BOSE and SHAHEEDE AAZAM (Chief of Patriots) BHAGAT SINGH. MAY LIVE LONG Dr B.R. AMBEDKAR.  MAY LIVE LONG IMMORTAL MARTYERS LIKE CHANDRA SHEKHAR AAZAAD, ASHAFAAQ-UL-LAAH, KHUDEERAAM BOSE, SUBRAMANYAM BHAARATEE, RAANEE GAIDELIEU.

JAI HIND                                                                                                                                                    JAI BHAARAT

                                                 MAY LIVE LONG BHAARATEEY EKATAA (Indian Unity)

                                                 MAY LIVE LONG RAASHTRABHAKTI (Allegiance to the nation)

                                                    MAY LIVE LONG   BHAARATEEY GANATANTRA (Indian Republic)

 

 

राष्ट्रभक्त शिरोमणि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जिंदाबाद । शहीदे आज़म भगत  सिंह जिंदाबाद ।  डा. बी. आर.  अम्बेदकर  जिंदाबाद ।  अमर शहीद चन्द्र शेखर आज़ाद,  अशफ़ाक़ुल्लाह,  खुदीराम बोस,  सुब्रमण्यम भारती, रानी गैडेल्यू आदि जिन्दाबाद ।

           जय हिन्द                                                                                                                                   जय भारत

                भारतीय एकता अमर रहे                     राष्ट्रभक्ति अमर रहे                   भारतीय गणतन्त्र अमर रहे

MAY LIVE LONG RAASHTRABHAKT SHIROMANI (Torch Bearer Legend of Patriots) NETAA JEE SUBHAASH CHANDRA BOSE and SHAHEEDE AAZAM (Chief of Patriots) BHAGAT SINGH. MAY LIVE LONG Dr B.R. AMBEDKAR. MAY LIVE LONG IMMORTAL MARTYERS LIKE CHANDRA SHEKHAR AAZAAD, ASHAFAAQ-UL-LAAH, KHUDEERAAM BOSE, SUBRAMANYAM BHAARATEE, RAANEE GAIDELIEU.

                JAIHIND                                                                                                                             JAI BHAARAT

                               MAY LIVE LONG BHAARATEEY EKATAA (Indian Unity)

                              MAY LIVE LONG RAASHTRABHAKTI (Allegiance to the nation)

                              MAY LIVE LONG   BHAARATEEY GANATANTRA (Indian Republic)