राष्ट्रभक्त शिरोमणि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जिंदाबाद । शहीदे आज़म भगत  सिंह  जिंदाबाद ।  डा. बी. आर.  अम्बेदकर जिंदाबाद ।  अमर शहीद चन्द्र शेखर आज़ाद,  अशफ़ाक़ुल्लाह,  खुदीराम बोस,  सुब्रमण्यम भारती, रानी गैडेल्यू आदि जिन्दाबाद ।

जय हिन्द                                                                                                                                         जय भारत

भारतीय एकता अमर रहे                     राष्ट्रभक्ति अमर रहे                            भारतीय गणतन्त्र अमर रहे

MAY LIVE LONG RAASHTRABHAKT SHIROMANI (Torch Bearer Legend of Patriots) NETAA JEE SUBHAASH CHANDRA BOSE and SHAHEEDE AAZAM (Chief of Patriots) BHAGAT SINGH. MAY LIVE LONG Dr B.R. AMBEDKAR. MAY LIVE LONG IMMORTAL MARTYERS LIKE CHANDRA SHEKHAR AAZAAD, ASHAFAAQ-UL-LAAH, KHUDEERAAM BOSE, SUBRAMANYAM BHAARATEE, RAANEE GAIDELIEU.

JAIHIND                                                                                                                           JAI BHAARAT

                               MAY LIVE LONG BHAARATEEY EKATAA (Indian Unity)

                              MAY LIVE LONG RAASHTRABHAKTI (Allegiance to the nation)

                              MAY LIVE LONG   BHAARATEEY GANATANTRA (Indian Republic)

भारतीय अवाम ताक़त दलका अभ्युदय एवम इसकी ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि

Emergence of ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ and its historical background

  1. ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ का अभ्युदय उस वक़्त का तक़ाज़ा है जिस समय अपने देश भारत में जातिवाद, सम्प्रदायवाद, भाषावाद, प्रान्तवाद, क्षेत्रवाद, समूहवाद, व्यक्तिगत स्वार्थवाद, व्यक्तिगत महत्वाकांक्षावाद आदि घातक/ख़तरनाक़ हथियारों से अपने मुल्क़ भारत, भारतीय समाज एवम भारतीय व्यवस्था (Establishment)( कार्यपालिका, विधायिका एवम न्यायपालिका——-अपनी-अपनी अधीनस्थ इकाइयों सहित) मे विघटन पैदा करने व उन्हें कमजोर करने में सतत लिप्त एवम सक्रिय शक्तियाँ, ज्यादेतर राजनैतिक दलों के वेश में (कुछ अपवादों को छोड़कर), अपने मुल्क़ भारत में व्याप्त हैं । ये ताक़तें एक बड़ी साज़िश के तहद राष्ट्र-भक्ति, देश भक्ति आदि जैसे अल्फ़ाज़ों, जिनकी अवधारणायेँ/ज़ज़्बे किसी भी राष्ट्र के नींव के पत्थर होते हैं, का इस तरह से सड़क-छाप एवम बात-बात पर इस्तेमाल कर रहीं हैं जिससे राष्ट्र भक्ति-देश भक्ति’  की अहमियत, महत्व, उसके प्रति संवेदनशीलता, उसके असल जज़्बे से वाक़फ़ियत आदि नष्ट हो गई है । कुल मिलाकर इस तरह का परिवेश खड़ा किया गया है कि जिस परिवेश में राष्ट्रभक्ति व भारतीयता का भाव व आचरण अपने मुल्क़ भारत में कुचल दिया गया है, ऊपर वर्णित किसी न किसी ज़हरवाद (जातिवाद, सम्प्रदायवाद, भाषावाद, प्रान्तवाद, क्षेत्रवाद, समूहवाद, व्यक्तिगत स्वार्थवाद, व्यक्तिगत महत्वाकांक्षावाद आदि) की स्वार्थपूर्ति हेतु छद्म, पाखंडी रूप में इस्तेमाल होता है, एवम भाषणों, मंचों, कवि सम्मेलनों, मुशायरों, किताबों की शोभा बढ़ाने तक सीमित कर उसे अपने आम भारतीय भाई-बहनों, कुछ अपवादों को छोडकर, से गायब होकर ऊपर वर्णित पाखंड/दिखावे के दल-दल में जा फंसने का मार्ग प्रशस्त किया गया है । इसीलिए ये ताक़तें अपने मुल्क़ भारत के ख़िलाफ़ जब देश देश-द्रोही/ग़द्दारी के कारनामे कर रही होती हैं तो भारतीय जनमानस में इनके ख़िलाफ़ कोई रोष/क्रोध/जनाक्रोश/ आंदोलन/ धरना प्रदर्शन नहीं होता, और यदि होता भी है तो सिर्फ़ प्रतीकात्मक, दिखावटी एवम पाखंडी रूप में, वह भी मात्र तात्कालिक व कुछ पल के  लिए ————-अनवरतता व तीक्षणता/ज़ज़्बे का स्पष्ट अभाव रहता है । इसी स्थिति का फ़ायदा उठाते हुए ये ताक़तें, जब भी इनको मौक़ा मिलता है चाहे वह JNU प्रांगण से “भारते तेरे टुकड़े होंगे इंशा अल्लाह-इंशा अल्लाह”, “भारत की बर्बादी तक़ जंग जारी रहेगी”, “अफ़ज़ल हम शर्मिंदा हैं तेरे क़ातिल ज़िंदा हैं” आदि के नारे लगवाने वाले कन्हैया कुमार का साथ देने में एक साथ हो जाते हैं, अपना मुल्क़ भारत जब पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के जरिये छद्म युद्ध का माक़ूल ज़वाब देने हेतु सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर कश्मीर में आतंकवादियों व आतंकवादियों को समर्थन देने वाले अलगाव वादियों व आतंकवादियों को निकल भागने का रास्ता बनाने वाले पत्थरबाजों के सफाये मे हमारी फ़ौज़ बड़ी कामयाबी के साथ आगे बढ़ रही है—-सेना अध्यक्ष पर व सेना पर ना-क़ाबिले-बर्दास्त अनर्गल व अवांछितशब्दों (जनरल डायरसड़क का गुंडाआदि) का इस्तेमाल करके उनका अपमान करना व उनके हौसले गिराना——भारत-चीन के बीच डोकलाम को लेकर जब तना-तनी की स्थिति चल रही है व युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है—-दुश्मन चीन के दूत से गुप्त मुलाक़ात करना आदि जैसी देश विरोधी गतिविधियाँ, भारत विरोधी राष्ट्र द्रोही हरक़तें करने से बाज़ नहीं आती हैं । यह सिलसिला कोई हाल से शुरू हुआ हो ऐसा नहीं है यह तो पिछले 60-70 सालों से निर्बाध रूप से अनवरत ज़ारी है ।

The emergence of ‘ BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ is the need of the hour when our nation BHAARAT is fraught with the forces, mostly in the disguise of political parties, barring few exceptions, with the lethal and deadly weapon of casteism-communalism-provincialism-linguisticism-groupism-regionalism-self aggrandisationalism-self aspirationalism etc. within nation BHAARAT are badly indulged and active in weakening and eventual disintegration of nation BHAARAT, Bhaarateey society and Bhaarateey establishment (Executive, Legislature and Judiciary——with their subordinate units). These forces under the great conspiracy are day-night active in diluting the importance of ‘ PATRIOTISM’ and ‘ALLEGIANCE TO THE NATION’, the concept/passion/conduct of which are foundational stones of a nation, by hackneyedly using the words repeatedly at every street and every jerk of incidence, keeping away the general mass from the real meaning and practice of the concepts/words ‘ PATRIOTISM’ and ‘ALLEGIANCE TO THE NATION’ etc. and squeezing the sensitivity out of thesewords/concepts. In sum total, an atmosphere has deliberately been created in which the conduct and passion of ‘PATRIOTISM’ and ‘FAITFULLNESS TO THE NATION’ has been trampled and crushed, its words are ruthlessly used in justifying any of the ‘casteism-communalism-provincialism- linguisticism – groupism – regionalism -self aggrandisationalism-self aspirationalism’ poison tainted ‘ism’, after confining it to the rhetorical practices in form of article writings and column writings in news papers-in books-in poetic congregations(KAVI SAMMELAN)-in Urdoo poetic congregations (MUSHAAYARAA)-lofty speeches from the diases etc., its conduct/ practice/passion has been disappeared from the realm of our Bhaarateey Bhaai-Bahan, barring few exceptions, and paved its way in order to make it consigned to the quagmire of hypocrisy and show . That is why in the event whenever these forces are noticed in public glare as indulged in anti-national and treasonary activities against the Nation Bhaarat, there is no mass outrage against them and their these anti-BHAARAT activities in public in general, no agitation, no demonstration, no picketing——–and if at all done, these are done as tokenism/hypocritical/ superficial as a rarity and once in a blue moon——NOT incessantly and NOT with full sincerity and passion. Not only this, these forces have representations in Parliament and State Legislatures and also run few of the state governments. Section of our Bhaarateey Bhaai-Bahan who provide support to these forces to enable them in gaining representations in Parliament, State Legislatures and even run state governments do not repent on their own act of supporting such forces and more so there is no general opprobrium against this section of our Bhaarateey Bhaai-Bahan for supporting these anti- BHAARAT forces. Taking advantage of such a pathetic situation in our nation BHAARAT, these forces spare no opportunity in indulging in anti-national and anti-BHAARAT activities whether it is ganging up in support of the traitor-crook Kanhaiyaa kumaar who spearheaded the anti-BHAARAT slogans “Let God be pleased in getting BHAARAT into pieces”, “ Struggle will continue till the nation BHAARAT perishes”, “Afazal (the terrorist who was hanged as per the order of Supreme Court of India and after his numerous mercy petitions to the President of India got rejected) ! we are ashamed as your killers are alive” in the campus of Jawahar Laal Neharoo University New Deli, whether it is unparliamentary and intolerable demeaning utterances like “General Dyer”, “Sadak Kaa Gundaa” against our (Military) General and security forces to demoralize and defame them particularly at a time when our security forces are advancing with great success in continued killing of each and every agent/form of terrorism {terrorists themselves, separatists, stone pelters who by their acts of stone pelting provide terrorists the leeway to flee out of the complete noose/net made by the security forces to nab/kill them} to root out the menace of Kashmir terrorism exported by our enemy Pakistan and foil its proxy war in disguise and whether it is tete-a-tete with the ambassador of China, the enemy no. 1 of BHAARAT, at a time when India-China border tension at Dokalam is inching towards war like situation and our enemy China is badly indulged in issuing continued anti-BHAARAT threatenings. It is not like that such a trend has started just recently but it is continuing unabatedly unbridled for the last 60-70 years in our nation BHAARAT.

2. ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ का अभ्युदय उस वक़्त का भी तक़ाज़ा है जिस समय राष्ट्र भक्ति, देश भक्ति, भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवादजैसे मुद्दों की पैरवी अमूमन एक ही राजनीतिक दल द्वारा की जा रही है, इनका अकेला Champion बनने का दम्भ भी भरा जाता है पर वह दल अपने राजनीतिक गुरु व सहयोगी संगठनों से मिलकर या उनके दबाव में इन राष्ट्र भक्ति, देश भक्ति, भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद जैसे पवित्र एवम अहम राष्ट्रीय विषयों, जिनकी अवधारणा/अनुसरण/ज़ज़्बा भारत राष्ट्र की बुनियाद के पत्थर हैं, को धर्म/आस्था विशेष की श्रेष्ठता की कुंठा से ग्रसित मानसिकता की वज़ह से इन्हें मौक़े-बे-मौक़े गंदा करने, प्रदूषित करने में सतत लिप्त है । इस दल की इस तरह की हरक़तों का ही तो दुष्परिणाम है कि अ. जहाँ एक ओर अन्य धर्मास्था (जैसे इस्लाम, ईसाई, सिक्ख, बौद्ध, जैन, पारसी आदि) वाले भारतीय भाई-बहन इस दल की राष्ट्र भक्ति व भारतीयता की अवधारणा को शक़ की निग़ाह से देखने को विवश होते हैं, इनकी ओर आकर्षित नहीं होते, इसके पास फटकते नहीं हैं, 2. वहीं दूसरी ओर अपने मुल्क़ भारत के ऊपर वर्णित शत्रु व अभिशाप संगठन/राजनैतिक दल जैसी ताक़तें- – -उनमें से ताक़त प्रथम जो अपने मुल्क़ भारत की शत्रु व  अभिशाप ही नहीं अपितु सबसे ख़ूँख़ार औपनिवेशिक ताक़त (या यूँ कहिए सर्वाधिक ऐतिहासिक अभिशाप, शत्रु सबसे ख़ूँख़ार औपनिवेशिक ताक़त- – – इससे बड़ा कोई और अपने मुल्क़ भारत का शत्रु, अभिशाप एवम ख़ूँख़ार औपनिवेशिक ताक़त  अपने पूरे भारत के इतिहास में मिल नहीं सकता (इस कड़वी हक़ीक़त को समझने-समझाने के लिए अलग से विस्तृत परिचर्चा की आवश्यकता है, जिसके लिए भारतीय अवाम ताक़त दल किसी से भी, किसी भी मंच पर वार्ता/चर्चा/परिचर्चा के लिए तैयार है एवम गंभीर भी)) एवम ताक़त द्वितीय जो भारत मुल्क़ की शत्रु तथा अपने देश के शत्रु नम्बर 1 चीन के इशारों व उसकी शह पर अपने मुल्क़ भारत के ख़िलाफ़ साज़िश (भारत देश को अंदर से ही कमजोर करना) रचने की सतत कोशिश में, कभी सफाई से तो कभी बेहयायी से, जैसी गद्दारी करने वाले, अपने देश के गद्दार बौद्धिक व मीडिया वर्ग से साँठ-गाँठ के साथ, सतत लिप्त समूह व संगठन/राजनैतिक दल की तरह आदि संगठनों, राजनैतिक दलों व देश विरोधी ताक़तों को ऊपर कथित राष्ट्रभक्ति व भारतीयता की अवधारणा का मज़ाक़ उड़ाने का तथा राष्ट्रभक्ति व भारतीयता की असल अवधारणा से अपने भारतीय जनमानस से दूर रखने के कुचक्र चलाने की साज़िश का मौक़ा मिलता है ।

इन ताक़तों ने ‘अल्पसंख्यकवाद’, ‘ धर्मनिरपेक्षतावाद बनाम साम्प्रदायिकता ’ आदि भ्रामक एवम व धोख़ेबाज़ अल्फ़ाज़ों से देश में घोर साम्प्रदायिकता/भेद-विभेद/वैमनस्यता फैलाई है और विडम्बना यह भी रही कि इन ताक़तों ने उल्टे उक्त दल (राष्ट्र भक्ति, देश भक्ति, भारतीय/राष्ट्रीय सांस्कृतिकवाद जैसे मुद्दों का अकेला पैरोकार इत्यादि ———– करने में सतत लिप्त है) के ख़िलाफ़ साम्प्रदायिकता के आरोप से रंजित माहौल खड़ा करने की, यहाँ तक कि  छोटे-छोटे दलों जिनका किसी भी विधायिका में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है–द्वारा भी, समानान्तर कोशिश की और वह उक्त दल अपने ऊपर साम्प्रदायिकता का label लगने को अपनी राजनैतिक सुविधा, थोड़े प्रतीकात्मक विरोध के साथ, के रूप में देखता रहा (इधर विगत कुछ वर्षों से इस लीक से यह दल हटने की कोशिश में है) ।

2.अ.  अपने देश भारत में अपने भारत मुल्क की साझी सोंच, साझी संस्कृति, Composite Culture, दो-आबी संस्कृति, गंगा-जमुनी तहज़ीब को धता-बताकर Majoritareanism की हैकड़ी-अहंकार युक्त सोंच के आधार पर यह उक्त दल (राष्ट्र भक्ति, देश भक्ति, भारतीय/राष्ट्रीय सांस्कृतिकवाद जैसे मुद्दों का अकेला पैरोकार इत्यादि ———– करने में सतत लिप्त है) परोक्ष-अपरोक्ष, कभी हाँ-कभी ना, Flip-Flop की शैली में, के तरीक़ों से :-

क.    इस तथ्य को नकारता है कि अपना मुल्क़ भारत भारतीय संविधान से निर्देशित, संचालित एवं नियंत्रित होने के कारण भारतीय गणतन्त्र है ।

ख. हिन्दू राष्ट्र की बात करता है, भारत को हिन्दू राष्ट्र कहता है, “ भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाएँगे—–” आदि की बात करता है——इत्यादि ।

ग.    शेरशाह सूरी, जो भारत के महज़ 05 वर्ष के लिए शासक थे, के उस कल्याणकारी कृति को नकारता है जो उन्होंने पेशावर से कलकत्ता तक ग्रैंड ट्रंक सड़क बनवाई, उसके किनारे-किनारे वृक्ष लगवाये, यात्रियों के लिए सरायेँ बनवाईं ।

घ.   मुग़ल शासन के स्वर्णिम युग, जैसे अक़बर की अपनी जनता एवं धर्म गुरुओं में एकता की बे-मिशाल कोशिश एवम भूमि बंदोबस्त की वह व्यवस्था जो आजतक अपने भारत में क़ायम है; जहाँगीर की न्यायप्रियता, औरंगज़ेब की नियम-कानून से बँधी हुई अनुशासित-सख़्त-प्रणालीवद्ध शासन व्यवस्था, को नकारता है- – -विश्व के स्मारकों में शिरमौर्य स्मारक आगरे का ताज़महल को भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं मानता ।

ङ.   इसीलिए राम मंदिर-बाबरी मस्ज़िद विवाद/समस्या जो संवेदनशील होने के साथ-साथ आस्था से जुड़ा हुआ मुद्दा है- -का समाधान भी आम-सहमति, न्यायालय, कानून, संसद द्वारा नहीं चाहता बल्कि बहुसंख्यकवाद की मानसिकता से ग्रसित हैंकड़ी/अहंकार से और कभी-कभी तो माफिया/गुंडों की इस तरह की भाषा, “ यदि 80 करोड़ हिंदुओं का राम मंदिर नहीं बनता है तो 20 करोड़ मुसलमानों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए- – -उनके हज़ को रोक देना चाहिए- – -” का भी इस्तेमाल करता है । इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करने वाले कोई साधारण नागरिक नहीं बल्कि सभासद एवम सांसद होते हैं जो धर्म/आस्था विशेष की श्रेष्ठता की मानसिकता से ग्रसित/कुंठित बहुसंख्यकवाद के पोषक तत्व होते हैं ।

ब.    इस तरह के वक्तव्यों/भाषणों/बड़बोलेपन से क. न तो यह अपना भारत राष्ट्र हिन्दू राष्ट्र बन जाता है, ख. न तो राम मंदिर बन जाता है, ग. न ही इस देश के मुसलमान पाकिस्तान चले जाते हैं, घ. और न ही इस मुल्क के मुसलमानों का हज़ रुक जाता है ।

स.    बल्कि ऐसे वक्तव्यों से ही तो उन शक्तियों में ताक़त प्रथम, जो अपने मुल्क़ भारत की शत्रु व  अभिशाप ही नहीं अपितु सबसे ख़ूँख़ार औपनिवेशिक ताक़त जिसके मुखिया व नेताओं की फ़ितरत/DNA, मूल इस प्रकार है- – -ये सिर्फ़ ख़ून व चमड़ी में तो भारतीय दीखते हैं पर वस्तुतः ये विचार/सोंच, पसन्द, आदर्श एवम बुद्धि में अँग्रेज़ होते हैं – –ये कभी भी इस मुल्क़ भारत के व उसके ख़ैर-ख़्वाह हो ही नहीं हो सकते- – -ये लाख दिखावा/नाटक (Histrionics) करें तो भी इसका कोई मतलब नहीं– – –इस हक़ीक़त को जितना जल्दी हमारे सीधे-सादे, भोले-भाले, आम एवम ग़रीब/असहाय भारतीय भाई-बहन समझ जाँय उनका व अपने मुल्क़ भारत का नारकीय स्थिति से उद्धार होना शुरू हो जाएगा तथा ताक़त द्वितीय,  इसी प्रकार का अपने मुल्क भारत के शत्रु, अभिशाप संगठन/दल समूह जो अपने देश के शत्रु नम्बर 1 चीन के इशारों व उसकी शह पर अपने मुल्क़ भारत के ख़िलाफ़ साज़िश (अपने देश भारत को अंदर से ही कमजोर करना) रचने की सतत कोशिश, कभी सफाई से तो कभी बेहयायी से, अपने जैसी भारत विरोधी जैसी गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले समूह व संगठन व अपने देश के गद्दार बौद्धिक व मीडिया वर्ग से साँठ-गाँठ के साथ, लिप्त है—को, इन दोनों ताक़तों (उपरोक्त वर्णित ताक़त प्रथम एवम ताक़त द्वितीय)/दलों/समूहों को अपनी-अपनी भारत विरोधी कुकृत्यों को ढँकने व “ उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे” कहावत के सबसे घिनौना तरीक़ों से उल्टे दूसरों पर आरोप लगाने का मौक़ा मिलता है ।

  1. The emergence of ‘ BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ is the need of that hour also when in our nation BHAARAT, the issues of ‘PATRIOTISM’, ‘ALLEGIANCE TO THE NATION’ and ‘BHAARATEEY CULTURAL NATIONALISM’ are raised generally by only one political party and brag itself to be the sole champion of the cause thereof. But, under the mentality developed on account of harbouring and nursing the superiority complex of a particular faith/religion (over the other) either due to association or under the pressure of its political mentor and its fringe organisations, this political party inexorably indulged to desecrate and pollute, on this or that occasion, the very sacred/sanctimonious and nationally important subjects like ‘PATRIOTISM’, ‘ALLEGIANCE TO THE NATION’ and ‘BHAARATEEY CULTURAL NATIONALISM’, the concept/practice/passion of which are foundational stones of the Nation BHAARAT. The inevitable fall out such activities of this political party are:-1.Where on the one hand, the Bhaarateey Bhaai-Bahan of other faith (Islam, Chistianity, Sikkhism, Bauddh, Persian, Jainism etc.) are forced to look with suspicion the very sacred/sanctimonious and nationally important subjects like ‘PATRIOTISM’, ‘ALLEGIANCE TO THE NATION’ and ‘BHAARATEEY CULTURAL NATIONALISM’, championed by the party, and do not get attracted towards it and its such theme and do not come close to the party, 2. Whereas on the other hand, the aforesaid enemy and scourge to the Nation BHAARAT forces in the form of organizations/political parties the FIRST ONE of which is not only the enemy as well as scourge to the Nation BHAARAT but the COLONIAL FORCE, the deadliest ever {this force, if aptly termed, is the greatest historical scourge and enemy as well as the deadliest ever colonial force, to the nation BHAARAT- – -because no force/organization other than this one could be bigger enemy, scourge and deadly colonial force in the entire historical panorama and ramifications of BHAARAT (to understand and make our other Bharateey brethren understand this bitter fact, a separate and comprehensive dialogue/ discussion/ discourse /mutual conversation is required and for that, ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ is ready to discuss in detail with anybody on any platform whenever it occasions and ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ is equally serious about it),.} and the SECOND ONE force/political group which is also scourge and enemy to the Nation BHAARAT, as it, at the instance goaded by China, the enemy no. 1 of BHAARAT, is relentlessly indulged in hatching the conspiracy, some times with sophistry and some times brazenly  with haughtiness, to accomplish the agenda of China (to weaken the Nation BHAARAT from within itself) with the help of and along with other forces, intelligentsia and media in our country who are indulged in similar treasonary activities against the Nation BHAARAT—–both these forces misuse this trend of the political party, claiming to be the sole champion of the aforesaid sacred and nationally important subjects ‘PATRIOTISM’, ‘ALLEGIANCE TO THE NATION’ and ‘BHAARATEEY CULTURAL NATIONALISM’, to deride the same and in keeping the general mass away from the real meaning and concept/practice/passion of such subjects these forces are relentlessly active day and night .

These two aforesaid forces have been driving disinformation campaign to spread and poison the Bhaarateey society with communalism and widened the yawning fissures within society through their acts of communalism  with the hackneyed use of deceptive and most imposture words “ SECULARISM Vs COMMUNALISM  ” and ranting and chanting ‘ MINORITY ’ whenever and wherever they find it opportune to use. Alongside, it is not the providence but the irony that aforesaid party, claiming to be the sole champion of the aforesaid sacred and nationally important subjects ‘PATRIOTISM’, ‘ALLEGIANCE TO THE NATION’ and ‘BHAARATEEY CULTURAL NATIONALISM’, continued to accept, with token protest, the allegation of communalism on it as its expedience, politically or otherwise, not only by these two forces who are deadly agents of communalism, as detailed earlier in this para, but smaller parties/groups/organisations, even those who have no representations in any of the legislatures of BHAARAT- – -but for the last 02/03 years this political party is seen trying to change the track.

2A.   In our country BHAARAT, under the duress of arrogance and haughtiness of ‘ MAJORITAREANISM’ the very political party, claiming to be the sole champion of the aforesaid sacred and nationally important subjects ‘PATRIOTISM’, ‘ALLEGIANCE TO THE NATION’ and ‘BHAARATEEY CULTURAL NATIONALISM’, along with a sizeable chunk of populace and voters of the polity BHAARAT, overtly or covertly under the modus-operandi of blow cold-blow hot and flip-flop, refuse to recognize the concept of composite culture of our Nation BHAARAT, its shared values and thought, two water (Gangaa- Yamunaa) culture (Tahazeeb) etc. by its acts like:-

  • It denies the fact that ours is a Indian Republic as our Nation BHAARAT is directed, conducted and controlled by the Indian Constitution.

(ii) It talks about ‘Hindoo Raashtra’, terms India as ‘ Hindoo Raashtra’ and is seen emphatic in its utterance “We will make India a Hindoo Raashtra” etc.

(iii)  It refuses to recognize the people oriented contributions of Emperor Sher Shaah Suree such as making Grand Trunk Road from Peshawar to Calcutta, retiring asylums (SARAI) to extend relief to travelers and plantations of trees on road side to provide shadow and succour to the travelers (MUSAFIRs) etc. and that too in the short stint of 05 years only as Emperor of BHAARAT.

(iv)  It refuses to recognize the Mughal era as the golden period of the Bhaarateey history, the tireless and unparallel effort of Emperor Aqabar to evolve unity among different religious clerics and among his subject and Land Settlement of his period serves as bedrock in settling land dispute even today, the justice friendly decisions of Emperor Jahaangir, Emperor Auranzeb’s rules-regulations and Law of the land abiding systematic administration and governance through strict discipline, Taj Mahal, the apex monument in BHAARAT and one of the seven wonders of the world—-as quintessential part of the cultural heritage of BHAARAT.

(v)  That is why in Ram Mandir-Babri Mosque dispute which is a sensitive issue apart from being the one related to convictions of different faiths, it—instead finding an honourable and amicable solution through any of the ways—general consensus, court decision, law/Act by Parliament—-resorts to hegemonistic and bullying tactics prompted by haughtiness and arrogance out of the mindset of ‘ MAJORITAREANISM ’ and some times even going further in resorting to the language of mafia and street urchins “ If Ramm Mandir of 80 crore Hindoos is not being allowed to be constructed, then 20 crore Muslims should be sent to Pakistan- – -their Haz should be stopped ” etc. Such foul and filthy language is used NOT by its ordinary members BUT by its MLAs and MPs who foster the‘ MAJORITAREAN ’ mindset under the duress of superiority complex of a particular faith (over the others).

  1. By its such foul but high resounding speeches and utterances NEITHER a. the Ram temple is constructed, NOR b. our Nation BHAARAT becomes a ‘Hindoo Raashtra’, NOR c. Muslims go to the Pakistan, NOR d. Huz of Muslims of this country is stopped.
  2. Albeit, due to such its utterances only, the FORCE FIRST, of the forces detailed in point 2 above, which is not only the enemy as well as scourge to the Nation BHAARAT but the COLONIAL FORCE, the deadliest ever {this force, if aptly termed, is the greatest historical scourge and enemy as well as the deadliest ever colonial force, to the nation BHAARAT- – -because no force/organization other than this one could be bigger enemy, scourge and deadly colonial force in the entire historical panorama and ramifications of BHAARAT } the DNA of its chief and leaders is characterized by the fact, “ They only look Indian in blood and colour but are actually English in opinions, in taste, in morals and in intellect ” and the genesis of this very DNA owes to the demeanor of Lord Macalay who laid the foundation of English education in India in 1836- – –this very force/political organization can never be of or well wisher of BHAARAT, whatever histrionics and tantrums it may play before our hapless Bhaarateeyas (Bhaaratey Bhaai-Bahan) to make believe them, it has no meaning– – –as sooner as our simple, innocent, ordinary and poor/destitute /bereft of any livelihood support Bhaarateey Bhaai-Bahan understand the reality of this bitter fact,  the good beginning of emancipation from their hell like lives and routines and the pathetic situation prevalent in our Nation BHAARAT may be possible to be commenced and the FORCE SECOND (force) which is also scourge and enemy to the Nation BHAARAT, as it, at the instance goaded by China, the enemy no. 1 of BHAARAT, is relentlessly indulged in hatching the conspiracy, sometimes with sophistry and sometimes brazenly  with haughtiness, to accomplish the agenda of China (to weaken the Nation BHAARAT from within itself) with the help of and along with other forces, intelligentsia and media in our country who are indulged in similar treasonary activities against the Nation BHAARAT —–both these forces misuse this occasion to cover up their own acts of treason against the Nation BHAARAT and instead hurl allegations on others in the worst demeaning kind of “ POT CALLING KETTLE BLACK ” modus operandi.
  3. ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ का अभ्युदय उस वक्त का भी तक़ाज़ा है जिस समय ताक़त प्रथम की अपने देश भारत के साथ ग़द्दारी/धोख़ा/शत्रुता की करतूत के साथ-साथ इनके पापों का सिलसिला {– – -लूट——-400 लाख करोड़ के आस-पास, करके विदेशी बैंकों में जमा करना, देश-समाज को बाँट-बाँट कर छिन्न-भिन्न करके तार-तार कर देना, भारतीय समाज एवम तन्त्र (शासन, नौकरशाही, विधान मण्डल, न्यायपालिका, बौद्धिक वर्ग (Intellegentsia)(मीडिया (समाचार पत्र एवम एलेक्ट्रोनिक—टीवी चैनल), शिक्षाविद, उच्च राजनयिक, विचारक (Think Tank), Social मीडिया आदि) में भ्रष्ट/तिकड़ी/झूठ बोलने वाले/छलने वाले/कपटी/अपराधी—सोंच व कृति के तत्वों, यहाँ तक कि माफिया/गैन्ग्स्टर का भी, बोल-बाला एवम वर्चस्व स्थापित कर दिया है; सभी उपरोक्त संस्थाओ, एवम उनकी अधीनस्थ इकाइयों सहित, में अपने Stooges/ Cahoots भर देना ताकि वे सभी इस कथित दल की लूट-पापों को ढकें ही नहीं बल्कि इनके लूट-पापों को अंज़ाम देने हेतु बाधा दूर करके मार्ग प्रशस्त करें} पिछले 60-70 सालों (अब के 03 साल छोड़कर) बदस्तूर कायम है ।
  4. The emergence of ‘ BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ is the need of that hour also when in our nation BHAARAT treacherous/treasonary/enemy like actions of the aforesaid FORCE FIRST and its, not only unpardonable but ever torturing minds of our Bhaarateey Bhaai-Bahan, sins/misdeeds wreaked on hapless BHAARAT and its countrymen {– – -loot of about 400 lakh crore by massive corruption and stashing away in foreign banks- – -Saradaar Patel integrated BHAARAT by getting 565 princely states merged with it but this force not only divided but dismembered BHAARAT into linguistic based states, communalism, casteism, regionalism, groupism and even between husband and wife OR into numerous pieces- – -manipulator/liar/treacherous/duper/criminal/corrupt elements got ensconced OR rammed into Bhaarateey society and establishment (governance/administration, bureaucracy, legislatures, judiciary, intelligentsia (media (news papers and electronic/TV channel), educationists, higher civil servants, think tank, social media etc.) where they established their dominance- – -such elements from respective positions in the various segments of the establishment—bureaucracy/judiciary etc. not only covered up the loot/misdeeds etc. of FORCE FIRST but paved the way for the sake of convenience of FORCE FIRST for such loot/misdeeds etc. – – -such plundering and dismembering has continued through unbridled wreaking havoc by the aforesaid FORCE FIRST on the polity BHAARAT for the last 60-70 years (leaving recent 02/03 years) }.
  5. ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ का अभ्युदय उस वक्त का भी तक़ाज़ा है जब एक ओर राजनीति का अपराधीकरण एवम अपराध का राजनीतिकरण ही नहीं अपितु राजनीति/देश-सेवा को सेवा भाव की ज़गह धन्धा/लूट/भ्रष्टाचार/अपराध का पर्याय बना दिया गया है । लगभग सभी क़ानूनी/संवैधानिक संस्थाओं (अपनी-अपनी अधीनस्थ इकाइयों सहित) (एकाध-इक्का-दुक्का अपवादों को छोडकर), जो जनता के नाम पर एवम उन्हीं की सेवार्थ बनीं हैं, में अपराधी/लूटेरे राजनेताओं/रसूकवालों/माफियाओं/दादाओं के एजेन्टों/सिपहसालारों का वर्चस्व एवम बोलबाला है और इन्हीं के बूते सम्प्रति प्रभावशाली राजनीतिक दल व उनके रसूक वाले नेता अपने व अपने दल की लूट/अपराध को ढंकने में कामयाब हो जाते हैं और सभी दाग़ धोकर व सफ़ेद होकर हमारी निरीह जनता के मसीहा बन बैठते हैं तथा चुनाव के ज़रिये सत्ता में या सत्ता के क़रीब पहुँचकर फिर वही लूट/अपराध का चक्र चलाते हैं । साधारण जनता का इका-दुक्का काम, अपवाद के रूप में ही सही, इन संथाओं में इसलिए कर दिया जाता है क्योंकि जन सामान्य के समक्ष इन संस्थाओं को इस मुखौटे को प्रदर्शित करने की मज़बूरी होती है कि यहाँ सर्व साधारण का भी कार्य होता है । इसलिए अपनी-अपनी अधीनस्थ इकाइयों सहित इन क़ानूनी/संवैधानिक संस्थायेँ, इक्का-दुक्का अपवाद को छोडकर, आम भारतीय भाई-बहनों, विशेषकर ग़रीब/दिहाड़ी (दैनिक आमदनी पर निर्भर रहने वाले) मजदूर/साधन-विहीन/बे-सहारा/समाजिक क़तार का आख़िरी इन्सान के लिए बेकार ही नहीं, कहीं-कहीं तो अभिशाप भी बन गयी हैं ।

वहीं दूसरी ओर मंहगाई व भ्रष्टाचार अपने पूरे देश भारत के आम भारतीय भाई-बहनों, विशेषकर ग़रीब/दिहाड़ी (दैनिक आमदनी पर निर्भर रहने वाले) मजदूर/साधन-विहीन/बे-सहारा/समाजिक क़तार का आख़िरी इन्सान में हहाकार का कारण बना हुआ है– – –आए दिन किसी न किसी चीज़ का दाम बढ़ता ही रहता है—पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस, दूध, राशन, फल-सब्जी, सेवा देने वाली एजेंसियों के प्रभार व दर बस, बिजली यूनिट, पानी, स्कूल की फीस, प्राइवेट परिवहन प्रभार इत्यादि । इस प्रकार अपने मुल्क़ के आम भारतीय भाई-बहनों, विशेषकर ग़रीब/दिहाड़ी (दैनिक आमदनी पर निर्भर रहने वाले) मजदूर/साधन-विहीन/बे-सहारा/समाजिक क़तार का आख़िरी इन्सान के ऊपर जानबूझकर मंहगाई/भ्रष्टाचार/भ्रष्ट-निरंकुश-रिश्वत के लिए परेशान करने वाले सरकारी-गैरसरकारी एवम सेवी संस्थानों (Delivery System) के कर्मचारियों/अधिकारियों द्वारा नारकीय जीवन जीने की विवशता देकर अंग्रेजों वाली ग़ुलामी से भी बदतर नरक/दोज़ख़ की ज़िंदगी थोपी गई है ।

  1. The emergence of ‘ BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ is the need of that hour also when in our nation BHAARAT, on one hand, there is not only ‘ CRIMINALIZATION OF POLITICS ’ and ‘ POLITICIZATION OF CRIME ’ but politics, instead of being service to the nation and its people with spirit to serve, has been rendered as synonymous to business/loot/ corruption/crime. In almost all legal /constitutional institutions, along with its respective subordinate units, which have been created under the name of and for the public service, there is dominance, barring few exceptions, of cahoots of criminals/predator politicians/influentials/mafias/ daadaas. On account of such a precarious situations within these legal/constitutional institutions, influential political parties and its influential politicians succeed in managing to get rid of the charges of loot/crime on them or their parties. Having been white washed by such institutions, the same criminal-predator politicians become messiah of our hapless Bhaarateey Bhaai-Bahan and brag themselves as their (of our hapless Bhaarateey Bhaai-Bahan) greatest emancipator. Thus, through elections they again return in or near governance/administration to repeat the cycle of loot/crime etc. In such legal/constitutional institutions, the service/work of ordinary citizen are done as a rare and on exception basis because these institutions are morally constrained to have to show the mask that also the ordinary citizen’ service/work are done here. That is why for common Bhaarateey Bhaai-Bahan, especially the poor/destitute/ dihaadee (daily wages) labourers/poor bereft of means of livelihood/indigent/poor without any support/poor at the last rung of the society, such institutions, leaving aside their few exceptional actions in favour of our common Bhaarateey Bhaai-Bahan——last rung of the society, are useless and even some times they have become bane for them.

And on the other hand, there is horrifying situation among common Bhaarateey Bhaai-Bahan, especially the poor/destitute/dihaadee (daily wages) labourers/poor bereft of means of livelihood/indigent /poor without any support/poor at the last rung of the social ladder on account of escalating prices of basic food and minimum necessity items and corruption. Daily increase of price of any of the essential items has become routine- – -petrol, diesel, cooking gas, ration, water, milk, vegetables-fruits, rates of service providing agencies such as bus, water, electric units, private transport services etc. Thus, by forcing common Bhaarateey Bhaai-Bahan, especially the poor/destitute/dihaadee(daily wages) labourers/poor bereft of means of livelihood/indigent/poor without any support/poor at the last rung of the social ladder of our Nation BHAARAT to undergo the hell like lives due to price escalation/corruption/corrupt-intractable-harassing for bribe officials of the delivery systems and government/non-government organizations, a life of slavery like hell worse even than those of English period has been thrusted upon them.

  1. ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ का अभ्युदय उस वक्त का भी तक़ाज़ा है जिस समय अपने मुल्क़ भारत में एक सुनियोजित साज़िश के तहद एक ऐसा माहौल खड़ा किया गया है जिसके अंतर्गत हमारे इस्लाम धर्मावलम्बी भारतीय भाई-बहनों, कुछ अपवादों को छोड़कर, को इस शक़, कभी-कभी तो गुस्सा/क्रोध व घृणा/नफ़रत, के दृष्टिकोड़ से देखा जाता है कि- – -” इनकी वफ़ादारी इस मुल्क़ के प्रति नहीं है- – -क्रिकेट के मैदान में पाकिस्तान की जीत पर ख़ुशियाँ मनाते है- – -इनका ज़िस्म तो यहाँ होता है पर

दिल पाकिस्तान में- – -खाते यहाँ की और गाते हैं पाकिस्तान की- – -“ इत्यादि- – -तरह की चर्चाओं, वार्तालापों, व्यक्तिगत गुप्तगूँ आदि में परिलक्षित होता है । आन्तरिक मंशा एवम निहित स्वार्थों के चलते एक बड़े षडयंत्र के अधीन यह एक आम नज़रिया जान-बूझकर रचा गया है ।

इस तरह के माहौल खड़ा करने में लगभग हर राजनीतिक दल की कमोवेश भूमिका है- – -कुछ आपसी गुप्तगूँ एवम परिचर्चा के माध्यम से- – -तो- – -कभी-कभी दादाओं/गुंडों/माफियाओं की भाषा के ज़रिये ।

सबसे मत्वपूर्ण देखने वाली बात यह है कि इस तरह के माहौल का फ़ायदा RSS/VHP/Bajrang Dal या  BJP को नहीं मिलता । ऐसे माहौल का लाभ ग़ैर RSS/VHP/Bajrang Dal या  BJP संगठनों/दलों  को मिलता है – – -यही देखने, समझने एवम ग़ौर कर बूझने वाली बात है ।

क्या कभी इस बात पर गम्भीरता से मंथन किया गया है कि क्या काररण है वे ताक़तें जो अपने मुल्क़ भारत के ख़िलाफ़ जब देश द्रोह/ग़द्दारी के कारनामे कर रही होती हैं जैसे JNU प्रांगण से “भारते तेरे टुकड़े होंगे इंशा अल्लाह-इंशा अल्लाह”, “भारत की बरबादी तक़ जंग जारी रहेगी”, “अफ़ज़ल हम शर्मिंदा हैं तेरे क़ातिल ज़िंदा हैं” आदि के नारे लगवाने वाले देश द्रोही कन्हैया कुमार का साथ देने में एक साथ हो जाती हैं और जब पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के जरिये छद्म युद्ध का माक़ूल ज़वाब देने हेतु सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर कश्मीर में आतंकवादियों व आतंकवादियों को समर्थन देने वाले अलगाव वादियों व आतंकवादियों को निकल भागने का रास्ता बनाने वाले पत्थरबाजों के सफाये मे हमारी फ़ौज़ बड़ी कामयाबी के साथ आगे बढ़ रही होती है—- तो उस दरम्यान सेना अध्यक्ष पर व सेना पर ना-क़ाबिले-बर्दास्त अनर्गल व अवांछित शब्दों (जनरल डायरसड़क का गुंडा आदि) का इस्तेमाल करके उनका अपमान करती हैं, उनके हौसले गिराने का काम करती हैं——भारत-चीन के बीच डोकलाम को लेकर जब तना-तनी की स्थिति चल रही होती है व युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई होती है—-उसी दौरान भारत के  दुश्मन नम्बर 1 चीन के दूत से गुप्त मुलाक़ात करना आदि जैसी देश विरोधी गतिविधियाँ, भारत विरोधी राष्ट्र द्रोही हरक़तें करने से ये ताक़तें बाज़ नहीं आती हैं तो भी भारतीय जनमानस में इन ताक़तों के ख़िलाफ़ कोई रोष/क्रोध/जनाक्रोश/आंदोलन/धरना प्रदर्शन क्यों नहीं होता, और यदि होता भी है तो सिर्फ़ प्रतीकात्मक, दिखावटी एवम पाखंडी रूप में, वह भी मात्र तात्कालिक व कुछ पल के के लिए ————-अनवरतता व तीक्षणता/ज़ज़्बे का स्पष्ट अभाव रहता है ?

ऐसा माहौल उपरोक्त वर्णित घोर देश विरोधी ग़द्दार-राष्ट्र द्रोही ताक़तों के द्वारा बड़े उपयोगी एवम काम के रूप में देखा जाता है क्योंकि इसी माहौल में ये

ताक़तें अपने ग़द्दारी के कुकृत्यों को छिपाने व ढंकने हेतु आम जन मानस का ध्यान इस्लाम धर्मावलम्बी भारतीय भाई-बहनों की ओर घुमा देने में, इसी में अपना सिर छिपा लेने में एवम ऐसे माहौल को अपना ढाल बना लेने में क़ामयाब हो जाती हैं ।

  1. The emergence of ‘ BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ is the need of that hour also when in our nation BHAARAT, under a designed conspiracy, an atmosphere has deliberately been created in which our Islamic faith Bharateey Bhaai-Bahan, barring few exceptions, are looked with an attitude vitiated by suspicion- – -“ Their faithfulness is not with this Nation BHAARAT- – -In the field of cricket match they celebrate at the victory of Pakistan – – -Their body is in India but hearts lie in Pakistan- – -They feed on here (India) but praise/sing for Pakistan ” etc.- – -perceptible during various discussions, discourses, private tete-a-tete etc.

Contribution, more or less, of leaders/office bearers/workers of all political parties in creating such notorious/mischievous atmosphere is a fact- – -some through private discourses and discussions- – -sometimes through unparliamentary blusterings, the language of daadaas/ruffians/mafias.

The most important thing to conceive and understand is that the benefit of such an atmosphere does not go to the RSS/VHP/Bajrang Dal OR BJP wing. This benefit actually goes to the non- RSS/VHP/Bajrang Dal OR BJP wing—this is exactly what is to be delved into, understood and conceived after a deep thought.

Has ever been pondered over seriously on the reality staring in the face of each and every BHAARAT loving patriotic Bhaarateey Bhaai-Bahan that whenever the forces which are noticed in public glare as indulged in anti-national and treasonary activities against the Nation Bhaarat such as whether it is ganging up in support of the traitor-crook Kanhaiyaa kumaar who spearheaded the anti-BHAARAT slogans “ Let God be pleased in getting BHAARAT into pieces ”, “  Struggle will continue till the nation BHAARAT perishes ”, “ Afazal (the terrorist who was hanged as per the order of Supreme Court of India and after his numerous mercy petitions to the President of India got rejected) ! we are ashamed as your killers are alive ” in the campus of Jawahar Laal Neharoo University New Deli, whether it is unparliamentary and intolerable demeaning utterances like “General Dyer”, “Sadak Kaa Gundaa” against our (Military) General and security forces to demoralize and defame them particularly at a time when our security forces are advancing with great success from surgical strike to continued killing of each and every agent/form of terrorism {terrorists themselves, separatists, stone pelters who by their acts of stone pelting provide terrorists the leeway to flee out of the complete noose/net made by the security forces to nab/kill them} to root out the menace of Kashmir terrorism exported by our enemy Pakistan and foil its proxy war in disguise and whether it is tete-a-tete with the ambassador of China, the enemy no. 1 of BHAARAT, at a time when India-China border tension at Dokalam is inching towards war like situation and our enemy China is badly indulged in issuing continued anti-BHAARAT threatenings, why there is no mass outrage against these forces and their these anti-BHAARAT activities, in public in general, no agitation, no demonstration, no picketing——–and if at all done, these are done as tokenism/hypocritical/ superficial as a rarity and once in a blue moon——NOT incessantly and NOT with full sincerity and passion ?

Such an (notoriously crated mischievous and vitiated) atmosphere (against most of our Islamic faith Bharateey Bhaai-Bahan, barring few exceptions) is perceived by aforesaid anti-BHAARAT treasonary forces to be useful and of great help for them. Because on account of prevalence of such an atmosphere only, in our Nation BHAARAT these forces succeed in diverting/digressing the general public attention from their own misdeeds of anti-BHAARAT treasonary acts towards our Islamic faith Bharateey Bhaai-Bahan, in covering and hiding their own faces and in making such an atmosphere as their shield.

  1. ‘भारतीय अवाम ताक़त दल’ का अभ्युदय उस वक़्त का भी तक़ाज़ा है जिस समय अपने मुल्क़ भारत में एक बहुत शातिराना साज़िश के तहद ऊपर वर्णित घोर देश विरोधी ग़द्दार-राष्ट्र द्रोही ताक़तों में ताक़त प्रथम एवम RSS जो उस दल का राजनीतिक गुरु है जिसके द्वारा ‘राष्ट्र भक्ति, देश भक्ति, भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ जैसे अहम एवम राष्ट्रीय मुद्दों का अकेला Champion बनने का दम्भ भरा जाता है, की नूरा कुश्ती (Shadow Boxing) अपने भारतीय भाई-बहनों के समक्ष पेश की जाती है । जब कि वास्तविकता यह है कि RSS एवम ताक़त प्रथम में गठजोड़ ही नहीं बल्कि ताक़त प्रथम के लिए RSS वह काम करता है जो किसी और के बूते का है ही नहीं और न ही वह कर सकता है । इस तरह ताक़त प्रथम के लिए RSS एक बिल्ली का पंजा(Cat’s Paw) की भूमिका/ज़िम्मेदारी निभाता है । इस्लाम धर्मावलम्बी एवम अन्य धर्मावलम्बी भारतीय भाई-बहनों में हिन्दुत्व, हिन्दू राष्ट्र आदि दुष्प्रचारोंभ्रम-दहशत आदि; जिसका ताक़त प्रथम, ताक़त द्वितीय व ताक़त प्रथम के इर्द-गिर्द घूमने वाली पार्टियां जैसे SP, BSP, RJD, TMC आदि इसे और भयावह बनाकर अपने वोट बैक हवश को पूरा करती हैं; को फैलाता हैं, का ज़हर बोता हैं । RSS इस दुष्प्रचार/भ्रम/दहशत (हिन्दुत्व-हिन्दू राष्ट्र आदि का) को फैलाकर इस्लाम धर्मावलम्बी भारतीय भाई-बहनों को ताक़त प्रथम; जो इन इस्लाम धर्मावलम्बी भारतीय भाई-बहनों को अपनी वोट बैक का शिकार बनाने को बेताब रहती है, इस भ्रम-दहशत-दुष्प्रचार को और विकराल व भयावह बनाकर अपने इस्लाम भारतीय भाई-बहनों के सामने पेश करती हैंउनमें और दहशत फैलाती हैं; की ही झोली में धकेलकर ताक़त प्रथम को पिछले 60-70 सालों से सत्तानशीं करता आया है ।

इस कड़वी हक़ीक़त (RSS एवम ताक़त प्रथम में गठजोड़ ही नहीं बल्कि ताक़त प्रथम के लिए RSS एक बिल्ली का पंजा (Cat’s Paw) की भूमिका/ज़िम्मेदारी निभाता है) जो कुछ क्षण के लिए आश्चर्य जनक-बेतुका और यहाँ तक कि बेबुनियाद लग सकती है । इसका मुख्य कारण यह है कि पिछले 60-70 सालों से कितने ऐसे झूठ-असत्य परत दर परत अपने मुल्क़ भारत में इन्हीं ताकतों एवम उनके सिपह सालारों- – -मीडिया, बौद्धिक वर्ग, शिक्षाविदों, इतिहासकारों, विचारकों (Think Tank)- – -आदि द्वारा रचा गया, प्रचारित-प्रसारित किया गया, जन मानस के दिलो-दिमाग़ में ठूँसा गया, Brain Wash किया गया- – -कुल मिलाकर नज़रबंद जैसी स्थिति आज पिछले 60-70 सालों से जानबूझकर इसलिए क़ायम की गई है ताकि कोई भी देश हित से सम्बन्धित तथ्य या कोई अन्य तथ्य सामने आने से पहले ही उक्त नज़रबंदी की चिकनी दीवारों से टकरा कर फिसल जाएगी, विलुप्त हो जाएगी- – –ऐसी स्थिति के लक्षणों का आभास टीवी परिचर्चाओं में, अख़बारों के लेखों-प्रलेखों-स्तम्भों में, उक्त सिपहसालार इतिहासकारों द्वारा रचित इतिहासों में, उक्त सिपहसालार बौद्धिक वर्ग की परिचर्चाओं में, उक्त सिपहसालार विचारक जनित्र विचारों की धुरी की दिशाओं आदि में स्पष्ट परिलक्षित होता है ।

लेकिन देश हित में यह सर्वाधिक ज़रूरी है कि अपना देश व देशवासी इस तरह की हक़ीक़तों/तथ्यों को निष्पक्षता से जाँचें-परखें व आत्मसात करें । हमारे भारतीय भाई-बहन जब भी इस हक़ीक़त को आत्मसात कर लेंगे तभी से उनके एवम इस बेचारे भारत के दुखड़े के अन्त की अच्छी शुरुआत की शुरुआत होनी मुमक़िन हो जाएगी ।

इसके अलावा कई ऐसे ख़ुलासे हैं जो कथित हक़ीक़त को पुख्ता रूप से स्थापित करते हैं जिसके लिए भारतीय अवाम ताक़त दल इस सम्बन्ध में किसी से भी, किसी भी मंच पर वार्ता/चर्चा/परिचर्चा के लिए हर तरह से तैयार है एवम गंभीर भी।

  1. The emergence of ‘ BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ is the need of that hour also when in our nation BHAARAT the shadow boxing between the FORCE FIRST, of the aforesaid anti-BHAARAT treasonary forces, and the RSS, the political mentor of the political party claiming to be the sole champion of the aforesaid sacred and nationally important subjects ‘PATRIOTISM’, ‘ALLEGIANCE TO THE NATION’ and ‘BHAARATEEY CULTURAL NATIONALISM’ is presented before our Bhaarateey Bhaai-bahan under a high level conspiracy and with high degree of sophistry. But the reality about this is NOT ONLY just the opposite BUT EVEN much more than that: there is not only nexus and connivance between the RSS and the FORCE FIRST but RSS acts and discharges the responsibility of CAT’s PAW for the FORCE FIRST. Because the RSS serves the purpose for the task which require capability (to accomplish in its entirety) possessed with none other than itself (RSS). The disinformation campaign with overtones of ‘Hindutwa’, ‘Hindoo Raashtra’ etc. by RSS, along with its fringe organizations, blows tremor of confusion/horror among Islamic and other similar faith (other than Hindutwa) Bhaarateey Bhaai-Bahan. This trail of confusion/horror among Islamic and other similar faith (other than Hindutwa) Bhaarateey Bhaai-Bahan is fanned and puffed/multiplied by the aforesaid FORCE FIRST, FORCE SECOND and other political parties which whirl around the aforesaid FORCE FIRST such as SP, BSP, TMC etc. and these aforesaid FORCES and political parties are extremely eager and impatient to exploit Islamic and other similar faith (other than Hindutwa) Bhaarateey Bhaai-Bahan for their vote bank. Thus, RSS, through its acts of above said disinformation campaign, continues to force, mentally or otherwise, this segment of Indian society (Islamic and other similar faith (other than Hindutwa) Bhaarateey Bhaai-Bahan) into the bag of aforesaid FORCE FIRST for their vote bank exploitation and thereby it (RSS) continues to make the aforesaid FORCE FIRST ensconced into power for the last 60-70 years.

The unraveling of this bitter fact {there is not only nexus and connivance between the RSS and the FORCE FIRST but RSS acts and discharges the responsibility of CAT’s PAW for the FORCE FIRST} may cause, for few moments, our Bharaateey Bhaai-Bahan taken aback and look it as bizarre and even baseless. Its main reason is that for the last 60-70 years in our Nation BHAARAT so many lies, layer by layer, have been continued to be fabricated/concocted, canvassed-proliferated and rammed into the minds of masses, etc. by the FORCE FIRST and FORCE SECOND, both of the aforesaid forces, and their stooges and proteges in various vital positions of Indian society : media, intelligentsia, educationists, think tank etc. In totality, such an atmosphere (of mesmerized like situation) has deliberately been created since last 60-70 years as to whenever a new fact, inconvenient to these forces, surfaces it gets slipped out at the slippery walls of this atmosphere and goes out of scene. The traits of such an atmosphere is very much and glaringly discernible in TV discussions of panelists hand-picked by these forces, in articles/columns and public discourses by the said stooge intelligentsia, the direction of the pivot in the thought process by the said stooge think tank etc.

But in the interest of our Nation BHAARAT it is utmost and crucially important that our fellow countrymen (Bhaarateey Bhaai-Bahan) should examine such facts with impartial and dispassionate discretion, with national and people’s interest first in mind, and mull over its threadbare ramifications and then welcome as accepted fact. The moment our respectable fellow countrymen (Bhaarateey Bhaai-Bahan) understand this bitter but useful fact {there is not only nexus and connivance between the RSS and the FORCE FIRST but RSS acts and discharges the responsibility of CAT’s PAW for the FORCE FIRST} the beginning of a good beginning of the end of woes of hapless Nation BHAARAT and its fellow countrymen (Bhaarateey Bhaai-Bahan) will have a possibility.

Apart from this, there are other similar revelations which can well establish the said bitter fact {there is not only nexus and connivance between the RSS and the FORCE FIRST but RSS acts and discharges the responsibility of CAT’s PAW for the FORCE FIRST} and for that, ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ is ready to discuss in detail with anybody on any platform whenever it occasions and ‘BHAARATEEY AWAAM TAAQAT DAL’ is equally serious about it.

राष्ट्रभक्त शिरोमणि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस जिंदाबाद । शहीदे आज़म भगत सिंह जिंदाबाद । डा. बी. आर. अम्बेदकर जिंदाबाद । अमर शहीद चन्द्र शेखर आज़ाद, अशफ़ाक़ुल्लाह, खुदी राम बोस, सुब्रमण्यम भारती, रानी गैडेल्यू आदि जिंदाबाद ।

जय हिन्द                                                                             जय भारत

भारतीय एकता अमर रहे            राष्ट्रभक्ति अमर रहे                        भारतीय गणतन्त्र अमर रहे

MAY LIVE LONG RAASHTRABHAKT SHIROMANI (Torch Bearer Legend of Patriots) NETAA JEE SUBHAASH CHANDRA BOSE and SHAHEEDE AAZAM (Chief of Patriots) BHAGAT SINGH. MAY LIVE LONG Dr B.R. AMBEDKAR. MAY LIVE LONG IMMORTAL MARTYERS LIKE CHANDRA SHEKHAR AAZAAD, ASHAFAAQ-UL-LAAH, KHUDEERAAM BOSE, SUBRAMANYAM BHAARATEE, RAANEE GAIDELIEU.

JAI HIND                                                                                                                           JAI BHAARAT

                      MAY LIVE LONG BHAARATEEY EKATAA (Indian Unity),

                      MAY LIVE LONG RAASHTRABHAKTI (Allegiance to the nation)

                      MAY LIVE LONG   BHAARATEEY GANATANTRA (Indian Republic)

  

राष्ट्रभक्त शिरोमणि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जिंदाबाद । शहीदे आज़म भगत  सिंह  जिंदाबाद । डा. बी. आर.  अम्बेदकर  जिंदाबाद ।  अमर शहीद  चन्द्र शेखर आज़ाद,  अशफ़ाक़ुल्लाह,  खुदीराम बोस, सुब्रमण्यम भारती, रानी गैडेल्यू आदि जिन्दाबाद ।

जय हिन्द                                                                                                                                      जय भारत

भारतीय एकता अमर रहे                     राष्ट्रभक्ति अमर रहे                 भारतीय गणतन्त्र अमर रहे

MAY LIVE LONG RAASHTRABHAKT SHIROMANI (Torch Bearer Legend of Patriots) NETAA JEE SUBHAASH CHANDRA BOSE and SHAHEEDE AAZAM (Chief of Patriots) BHAGAT SINGH. MAY LIVE LONG Dr B.R. AMBEDKAR. MAY LIVE LONG IMMORTAL MARTYERS LIKE CHANDRA SHEKHAR AAZAAD, ASHAFAAQ-UL-LAAH, KHUDEERAAM BOSE, SUBRAMANYAM BHAARATEE, RAANEE GAIDELIEU.

JAIHIND                                                                                                                             JAI BHAARAT

                               MAY LIVE LONG BHAARATEEY EKATAA (Indian Unity)

                              MAY LIVE LONG RAASHTRABHAKTI (Allegiance to the nation)

                              MAY LIVE LONG   BHAARATEEY GANATANTRA (Indian Republic)